३६
यासीन
يس
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ
साथ नाम
bis'mi
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
साथ नाम ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
३६:१
يسٓ
ي س
ya-seen
ي س ١ (1)
(1)
ي س ١ (1)
(1)
या, सीन।
३६:२
وَٱلْقُرْءَانِ
क़सम है क़ुरआन
wal-qur'āni
क़सम है क़ुरआन ٱلْحَكِيمِ हिकमत वाले की l-ḥakīmi
हिकमत वाले की ٢ (2)
(2)
क़सम है क़ुरआन ٱلْحَكِيمِ हिकमत वाले की l-ḥakīmi
हिकमत वाले की ٢ (2)
(2)
क़सम है हिकमत वाले क़ुरआन की!
३६:३
إِنَّكَ
बेशक आप
innaka
बेशक आप لَمِنَ (are) among lamina
(are) among ٱلْمُرْسَلِينَ अलबत्ता रसूलों में से हैं l-mur'salīna
अलबत्ता रसूलों में से हैं ٣ (3)
(3)
बेशक आप لَمِنَ (are) among lamina
(are) among ٱلْمُرْسَلِينَ अलबत्ता रसूलों में से हैं l-mur'salīna
अलबत्ता रसूलों में से हैं ٣ (3)
(3)
निःसंदेह आप रसूलों में से हैं।
३६:४
عَلَىٰ
ऊपर
ʿalā
ऊपर صِرَٰطٍۢ रास्ते ṣirāṭin
रास्ते مُّسْتَقِيمٍۢ सीधे के mus'taqīmin
सीधे के ٤ (4)
(4)
ऊपर صِرَٰطٍۢ रास्ते ṣirāṭin
रास्ते مُّسْتَقِيمٍۢ सीधे के mus'taqīmin
सीधे के ٤ (4)
(4)
सीधे रास्ते पर हैं।
३६:५
تَنزِيلَ
नाज़िल करदा है
tanzīla
नाज़िल करदा है ٱلْعَزِيزِ बहुत ज़बरदस्त का l-ʿazīzi
बहुत ज़बरदस्त का ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाले का l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाले का ٥ (5)
(5)
नाज़िल करदा है ٱلْعَزِيزِ बहुत ज़बरदस्त का l-ʿazīzi
बहुत ज़बरदस्त का ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाले का l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाले का ٥ (5)
(5)
(यह) प्रभुत्वशाली, अति दयावान् (अल्लाह) का उतारा हुआ है।
३६:६
لِتُنذِرَ
ताकि आप डराऐं
litundhira
ताकि आप डराऐं قَوْمًۭا एक क़ौम को qawman
एक क़ौम को مَّآ नहीं mā
नहीं أُنذِرَ डराए गए undhira
डराए गए ءَابَآؤُهُمْ आबा ओ अजदाद उनके ābāuhum
आबा ओ अजदाद उनके فَهُمْ पस वो fahum
पस वो غَـٰفِلُونَ ग़ाफिल हैं ghāfilūna
ग़ाफिल हैं ٦ (6)
(6)
ताकि आप डराऐं قَوْمًۭا एक क़ौम को qawman
एक क़ौम को مَّآ नहीं mā
नहीं أُنذِرَ डराए गए undhira
डराए गए ءَابَآؤُهُمْ आबा ओ अजदाद उनके ābāuhum
आबा ओ अजदाद उनके فَهُمْ पस वो fahum
पस वो غَـٰفِلُونَ ग़ाफिल हैं ghāfilūna
ग़ाफिल हैं ٦ (6)
(6)
ताकि आप उस जाति1 को डराएँ, जिनके बााप-दादा नहीं डराए गए थे। इसलिए वे ग़ाफ़िल हैं।
३६:७
لَقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
laqad
अलबत्ता तहक़ीक़ حَقَّ सच हो गई ḥaqqa
सच हो गई ٱلْقَوْلُ बात l-qawlu
बात عَلَىٰٓ upon ʿalā
upon أَكْثَرِهِمْ उनकी अक्सरियत पर aktharihim
उनकी अक्सरियत पर فَهُمْ पस वो fahum
पस वो لَا (do) not lā
(do) not يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाऐंगे yu'minūna
नहीं वो ईमान लाऐंगे ٧ (7)
(7)
अलबत्ता तहक़ीक़ حَقَّ सच हो गई ḥaqqa
सच हो गई ٱلْقَوْلُ बात l-qawlu
बात عَلَىٰٓ upon ʿalā
upon أَكْثَرِهِمْ उनकी अक्सरियत पर aktharihim
उनकी अक्सरियत पर فَهُمْ पस वो fahum
पस वो لَا (do) not lā
(do) not يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाऐंगे yu'minūna
नहीं वो ईमान लाऐंगे ٧ (7)
(7)
उनमें से अधिकतर लोगों पर बात1 सिद्ध हो चुकी है। अतः वे ईमान नहीं लाएँगे।
३६:८
إِنَّا
बेशक हम
innā
बेशक हम جَعَلْنَا डाल दिए हमने jaʿalnā
डाल दिए हमने فِىٓ on fī
on أَعْنَـٰقِهِمْ उनकी गर्दनों में aʿnāqihim
उनकी गर्दनों में أَغْلَـٰلًۭا तौक़ aghlālan
तौक़ فَهِىَ तो वो fahiya
तो वो إِلَى (are up) to ilā
(are up) to ٱلْأَذْقَانِ ठोड़ियों तक हैं l-adhqāni
ठोड़ियों तक हैं فَهُم तो वो fahum
तो वो مُّقْمَحُونَ सर उठाए हुए हैं muq'maḥūna
सर उठाए हुए हैं ٨ (8)
(8)
बेशक हम جَعَلْنَا डाल दिए हमने jaʿalnā
डाल दिए हमने فِىٓ on fī
on أَعْنَـٰقِهِمْ उनकी गर्दनों में aʿnāqihim
उनकी गर्दनों में أَغْلَـٰلًۭا तौक़ aghlālan
तौक़ فَهِىَ तो वो fahiya
तो वो إِلَى (are up) to ilā
(are up) to ٱلْأَذْقَانِ ठोड़ियों तक हैं l-adhqāni
ठोड़ियों तक हैं فَهُم तो वो fahum
तो वो مُّقْمَحُونَ सर उठाए हुए हैं muq'maḥūna
सर उठाए हुए हैं ٨ (8)
(8)
तथा हमने उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों से लगे हैं।1 इसलिए वे सिर ऊपर किए हुए हैं।
३६:९
وَجَعَلْنَا
और बना दी हमने
wajaʿalnā
और बना दी हमने مِنۢ from min
from بَيْنِ before/between bayni
before/between أَيْدِيهِمْ उनके सामने से aydīhim
उनके सामने से سَدًّۭا एक दीवार saddan
एक दीवार وَمِنْ and from wamin
and from خَلْفِهِمْ और उनके पीछे से khalfihim
और उनके पीछे से سَدًّۭا एक दीवार saddan
एक दीवार فَأَغْشَيْنَـٰهُمْ फिर ढाँप दिया हमने उन्हें fa-aghshaynāhum
फिर ढाँप दिया हमने उन्हें فَهُمْ पस वो fahum
पस वो لَا (do) not lā
(do) not يُبْصِرُونَ नहीं वो देख पाते yub'ṣirūna
नहीं वो देख पाते ٩ (9)
(9)
और बना दी हमने مِنۢ from min
from بَيْنِ before/between bayni
before/between أَيْدِيهِمْ उनके सामने से aydīhim
उनके सामने से سَدًّۭا एक दीवार saddan
एक दीवार وَمِنْ and from wamin
and from خَلْفِهِمْ और उनके पीछे से khalfihim
और उनके पीछे से سَدًّۭا एक दीवार saddan
एक दीवार فَأَغْشَيْنَـٰهُمْ फिर ढाँप दिया हमने उन्हें fa-aghshaynāhum
फिर ढाँप दिया हमने उन्हें فَهُمْ पस वो fahum
पस वो لَا (do) not lā
(do) not يُبْصِرُونَ नहीं वो देख पाते yub'ṣirūna
नहीं वो देख पाते ٩ (9)
(9)
तथा हमने उनके आगे एक आड़ बना दी है और उनके पीछे एक आड़। फिर हमने उनको ढाँक दिया है। अतः वे1 देख ही नहीं पाते।
३६:१०
وَسَوَآءٌ
और बराबर है
wasawāon
और बराबर है عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर ءَأَنذَرْتَهُمْ ख़्वाह डराऐं आप उन्हें a-andhartahum
ख़्वाह डराऐं आप उन्हें أَمْ या am
या لَمْ ना lam
ना تُنذِرْهُمْ आप डराऐं उन्हें tundhir'hum
आप डराऐं उन्हें لَا not lā
not يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाऐंगे yu'minūna
नहीं वो ईमान लाऐंगे ١٠ (10)
(10)
और बराबर है عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर ءَأَنذَرْتَهُمْ ख़्वाह डराऐं आप उन्हें a-andhartahum
ख़्वाह डराऐं आप उन्हें أَمْ या am
या لَمْ ना lam
ना تُنذِرْهُمْ आप डराऐं उन्हें tundhir'hum
आप डराऐं उन्हें لَا not lā
not يُؤْمِنُونَ नहीं वो ईमान लाऐंगे yu'minūna
नहीं वो ईमान लाऐंगे ١٠ (10)
(10)
और उनके लिए बराबर है, चाहे आप उन्हें डराएँ या न डराएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे।
३६:११
إِنَّمَا
बेशक
innamā
बेशक تُنذِرُ आप तो डरा सकते हैं tundhiru
आप तो डरा सकते हैं مَنِ उसे जो mani
उसे जो ٱتَّبَعَ पैरवी करे ittabaʿa
पैरवी करे ٱلذِّكْرَ नसीहत की l-dhik'ra
नसीहत की وَخَشِىَ और वो डरता हो wakhashiya
और वो डरता हो ٱلرَّحْمَـٰنَ रहमान से l-raḥmāna
रहमान से بِٱلْغَيْبِ ۖ ग़ाएबाना bil-ghaybi
ग़ाएबाना فَبَشِّرْهُ पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसे fabashir'hu
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसे بِمَغْفِرَةٍۢ बख़्शिश की bimaghfiratin
बख़्शिश की وَأَجْرٍۢ और अजर की wa-ajrin
और अजर की كَرِيمٍ इज़्ज़त वाले karīmin
इज़्ज़त वाले ١١ (11)
(11)
बेशक تُنذِرُ आप तो डरा सकते हैं tundhiru
आप तो डरा सकते हैं مَنِ उसे जो mani
उसे जो ٱتَّبَعَ पैरवी करे ittabaʿa
पैरवी करे ٱلذِّكْرَ नसीहत की l-dhik'ra
नसीहत की وَخَشِىَ और वो डरता हो wakhashiya
और वो डरता हो ٱلرَّحْمَـٰنَ रहमान से l-raḥmāna
रहमान से بِٱلْغَيْبِ ۖ ग़ाएबाना bil-ghaybi
ग़ाएबाना فَبَشِّرْهُ पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसे fabashir'hu
पस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसे بِمَغْفِرَةٍۢ बख़्शिश की bimaghfiratin
बख़्शिश की وَأَجْرٍۢ और अजर की wa-ajrin
और अजर की كَرِيمٍ इज़्ज़त वाले karīmin
इज़्ज़त वाले ١١ (11)
(11)
आप तो केवल उस व्यक्ति को डरा सकते हैं, जो इस ज़िक्र (क़ुरआन) का पालन करे, तथा बिन देखे रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) से डरे। तो आप उसे क्षमा तथा सम्मानजनक बदले की शुभ सूचना दे दें।
३६:१२
إِنَّا
बेशक हम
innā
बेशक हम نَحْنُ हम ही naḥnu
हम ही نُحْىِ हम ज़िन्दा करेंगे nuḥ'yī
हम ज़िन्दा करेंगे ٱلْمَوْتَىٰ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को وَنَكْتُبُ और हम लिख रहे हैं wanaktubu
और हम लिख रहे हैं مَا जो mā
जो قَدَّمُوا۟ उन्होंने आगे भेजा qaddamū
उन्होंने आगे भेजा وَءَاثَـٰرَهُمْ ۚ और उनके आसार को waāthārahum
और उनके आसार को وَكُلَّ और हर wakulla
और हर شَىْءٍ चीज़ को shayin
चीज़ को أَحْصَيْنَـٰهُ शुमार कर रखा है हमने उसे aḥṣaynāhu
शुमार कर रखा है हमने उसे فِىٓ in fī
in إِمَامٍۢ एक किताब में imāmin
एक किताब में مُّبِينٍۢ जो वाज़ेह है mubīnin
जो वाज़ेह है ١٢ (12)
(12)
बेशक हम نَحْنُ हम ही naḥnu
हम ही نُحْىِ हम ज़िन्दा करेंगे nuḥ'yī
हम ज़िन्दा करेंगे ٱلْمَوْتَىٰ मुर्दों को l-mawtā
मुर्दों को وَنَكْتُبُ और हम लिख रहे हैं wanaktubu
और हम लिख रहे हैं مَا जो mā
जो قَدَّمُوا۟ उन्होंने आगे भेजा qaddamū
उन्होंने आगे भेजा وَءَاثَـٰرَهُمْ ۚ और उनके आसार को waāthārahum
और उनके आसार को وَكُلَّ और हर wakulla
और हर شَىْءٍ चीज़ को shayin
चीज़ को أَحْصَيْنَـٰهُ शुमार कर रखा है हमने उसे aḥṣaynāhu
शुमार कर रखा है हमने उसे فِىٓ in fī
in إِمَامٍۢ एक किताब में imāmin
एक किताब में مُّبِينٍۢ जो वाज़ेह है mubīnin
जो वाज़ेह है ١٢ (12)
(12)
निःसंदेह हम ही मुर्दों को जीवित करेंगे। तथा हम उनके कर्मों और उनके पद्चिह्नों1 को लिख रहे हैं। तथा प्रत्येक वस्तु को हमने स्पष्ट पुस्तक में दर्ज कर रखा है।
३६:१३
وَٱضْرِبْ
और बयान करो
wa-iḍ'rib
और बयान करो لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए مَّثَلًا एक मिसाल mathalan
एक मिसाल أَصْحَـٰبَ (of the) companions aṣḥāba
(of the) companions ٱلْقَرْيَةِ बस्ती वालों की l-qaryati
बस्ती वालों की إِذْ जब idh
जब جَآءَهَا आए उनके पास jāahā
आए उनके पास ٱلْمُرْسَلُونَ रसूल l-mur'salūna
रसूल ١٣ (13)
(13)
और बयान करो لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए مَّثَلًا एक मिसाल mathalan
एक मिसाल أَصْحَـٰبَ (of the) companions aṣḥāba
(of the) companions ٱلْقَرْيَةِ बस्ती वालों की l-qaryati
बस्ती वालों की إِذْ जब idh
जब جَآءَهَا आए उनके पास jāahā
आए उनके पास ٱلْمُرْسَلُونَ रसूल l-mur'salūna
रसूल ١٣ (13)
(13)
तथा आप उन्हें1 बस्ती वालों का एक उदाहरण दीजिए। जब वहाँ (अल्लाह के) भेजे हुए रसूल आए।
३६:१४
إِذْ
जब
idh
जब أَرْسَلْنَآ भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने إِلَيْهِمُ तरफ़ उनके ilayhimu
तरफ़ उनके ٱثْنَيْنِ दो को ith'nayni
दो को فَكَذَّبُوهُمَا तो उन्होंने झुठला दिया उन दोनों को fakadhabūhumā
तो उन्होंने झुठला दिया उन दोनों को فَعَزَّزْنَا तो क़ुव्वत दी हमने faʿazzaznā
तो क़ुव्वत दी हमने بِثَالِثٍۢ साथ तीसरे के bithālithin
साथ तीसरे के فَقَالُوٓا۟ तो उन्होंने कहा faqālū
तो उन्होंने कहा إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम إِلَيْكُم तरफ़ तुम्हारे ilaykum
तरफ़ तुम्हारे مُّرْسَلُونَ भेजे हुए हैं mur'salūna
भेजे हुए हैं ١٤ (14)
(14)
जब أَرْسَلْنَآ भेजा हमने arsalnā
भेजा हमने إِلَيْهِمُ तरफ़ उनके ilayhimu
तरफ़ उनके ٱثْنَيْنِ दो को ith'nayni
दो को فَكَذَّبُوهُمَا तो उन्होंने झुठला दिया उन दोनों को fakadhabūhumā
तो उन्होंने झुठला दिया उन दोनों को فَعَزَّزْنَا तो क़ुव्वत दी हमने faʿazzaznā
तो क़ुव्वत दी हमने بِثَالِثٍۢ साथ तीसरे के bithālithin
साथ तीसरे के فَقَالُوٓا۟ तो उन्होंने कहा faqālū
तो उन्होंने कहा إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम إِلَيْكُم तरफ़ तुम्हारे ilaykum
तरफ़ तुम्हारे مُّرْسَلُونَ भेजे हुए हैं mur'salūna
भेजे हुए हैं ١٤ (14)
(14)
जब हमने उनकी ओर दो (रसूलों को) भेजा। तो उन्होंने उन दोनों को झुठला दिया। तब हमने तीसरे के द्वारा शक्ति पहुँचाई। तो तीनों ने कहा : निःसंदेह हम तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।
३६:१५
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
उन्होंने कहा مَآ नहीं हो mā
नहीं हो أَنتُمْ तुम antum
तुम إِلَّا मगर illā
मगर بَشَرٌۭ एक इन्सान basharun
एक इन्सान مِّثْلُنَا हमारी तरह mith'lunā
हमारी तरह وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं أَنزَلَ नाज़िल की anzala
नाज़िल की ٱلرَّحْمَـٰنُ रहमान ने l-raḥmānu
रहमान ने مِن any min
any شَىْءٍ कोई चीज़ shayin
कोई चीज़ إِنْ नहीं in
नहीं أَنتُمْ तुम antum
तुम إِلَّا मगर illā
मगर تَكْذِبُونَ तुम झूठ बोलते हो takdhibūna
तुम झूठ बोलते हो ١٥ (15)
(15)
उन्होंने कहा مَآ नहीं हो mā
नहीं हो أَنتُمْ तुम antum
तुम إِلَّا मगर illā
मगर بَشَرٌۭ एक इन्सान basharun
एक इन्सान مِّثْلُنَا हमारी तरह mith'lunā
हमारी तरह وَمَآ और नहीं wamā
और नहीं أَنزَلَ नाज़िल की anzala
नाज़िल की ٱلرَّحْمَـٰنُ रहमान ने l-raḥmānu
रहमान ने مِن any min
any شَىْءٍ कोई चीज़ shayin
कोई चीज़ إِنْ नहीं in
नहीं أَنتُمْ तुम antum
तुम إِلَّا मगर illā
मगर تَكْذِبُونَ तुम झूठ बोलते हो takdhibūna
तुम झूठ बोलते हो ١٥ (15)
(15)
उन्होंने कहा : तुम सब तो हमारे ही जैसे मनुष्य1 हो, और अत्यंत दयावान् (अल्लाह) ने कुछ भी नहीं उतारा है। तुम तो बस झूठ बोल रहे हो।
३६:१६
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
उन्होंने कहा رَبُّنَا रब हमारा rabbunā
रब हमारा يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम إِلَيْكُمْ तरफ़ तुम्हारे ilaykum
तरफ़ तुम्हारे لَمُرْسَلُونَ अलबत्ता भेजे हुए हैं lamur'salūna
अलबत्ता भेजे हुए हैं ١٦ (16)
(16)
उन्होंने कहा رَبُّنَا रब हमारा rabbunā
रब हमारा يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है إِنَّآ बेशक हम innā
बेशक हम إِلَيْكُمْ तरफ़ तुम्हारे ilaykum
तरफ़ तुम्हारे لَمُرْسَلُونَ अलबत्ता भेजे हुए हैं lamur'salūna
अलबत्ता भेजे हुए हैं ١٦ (16)
(16)
उन रसूलों ने कहा : हमारा पालनहार जानता है कि हम निश्चय ही तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजे गए हैं।
३६:१७
وَمَا
और नहीं
wamā
और नहीं عَلَيْنَآ हम पर ʿalaynā
हम पर إِلَّا मगर illā
मगर ٱلْبَلَـٰغُ पहुँचा देना l-balāghu
पहुँचा देना ٱلْمُبِينُ खुल्लम-खुल्ला l-mubīnu
खुल्लम-खुल्ला ١٧ (17)
(17)
और नहीं عَلَيْنَآ हम पर ʿalaynā
हम पर إِلَّا मगर illā
मगर ٱلْبَلَـٰغُ पहुँचा देना l-balāghu
पहुँचा देना ٱلْمُبِينُ खुल्लम-खुल्ला l-mubīnu
खुल्लम-खुल्ला ١٧ (17)
(17)
तथा हमारा दायित्व खुले तौर पर संदेश पहुँचा देने के सिवा और कुछ नहीं है।
३६:१८
قَالُوٓا۟
उन्होंने कहा
qālū
उन्होंने कहा إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम تَطَيَّرْنَا मनहूस समझा है हमने taṭayyarnā
मनहूस समझा है हमने بِكُمْ ۖ तुम्हें bikum
तुम्हें لَئِن अलबत्ता अगर la-in
अलबत्ता अगर لَّمْ ना lam
ना تَنتَهُوا۟ तुम बाज़ आए tantahū
तुम बाज़ आए لَنَرْجُمَنَّكُمْ अलबत्ता हम ज़रूर संगसार कर देंगे तुम्हें lanarjumannakum
अलबत्ता हम ज़रूर संगसार कर देंगे तुम्हें وَلَيَمَسَّنَّكُم और अलबत्ता ज़रूर छुएगा तुम्हें walayamassannakum
और अलबत्ता ज़रूर छुएगा तुम्हें مِّنَّا हमारी तरफ़ से minnā
हमारी तरफ़ से عَذَابٌ अज़ाब ʿadhābun
अज़ाब أَلِيمٌۭ दर्दनाक alīmun
दर्दनाक ١٨ (18)
(18)
उन्होंने कहा إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम تَطَيَّرْنَا मनहूस समझा है हमने taṭayyarnā
मनहूस समझा है हमने بِكُمْ ۖ तुम्हें bikum
तुम्हें لَئِن अलबत्ता अगर la-in
अलबत्ता अगर لَّمْ ना lam
ना تَنتَهُوا۟ तुम बाज़ आए tantahū
तुम बाज़ आए لَنَرْجُمَنَّكُمْ अलबत्ता हम ज़रूर संगसार कर देंगे तुम्हें lanarjumannakum
अलबत्ता हम ज़रूर संगसार कर देंगे तुम्हें وَلَيَمَسَّنَّكُم और अलबत्ता ज़रूर छुएगा तुम्हें walayamassannakum
और अलबत्ता ज़रूर छुएगा तुम्हें مِّنَّا हमारी तरफ़ से minnā
हमारी तरफ़ से عَذَابٌ अज़ाब ʿadhābun
अज़ाब أَلِيمٌۭ दर्दनाक alīmun
दर्दनाक ١٨ (18)
(18)
उन लोगों ने कहा : हम तुम्हें अशुभ (मनहूस) समझते हैं। यदि तुम बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें निश्चित रूप से पथराव करके मार डालेंगे और तुम्हें अवश्य ही हमारी ओर से दुःखदायी यातना पहुँचेगी।
३६:१९
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
उन्होंने कहा طَـٰٓئِرُكُم नहूसत तुम्हारी ṭāirukum
नहूसत तुम्हारी مَّعَكُمْ ۚ साथ है तुम्हारे maʿakum
साथ है तुम्हारे أَئِن क्या (इस लिए कि) a-in
क्या (इस लिए कि) ذُكِّرْتُم ۚ नसीहत किए गए तुम dhukkir'tum
नसीहत किए गए तुम بَلْ बल्कि bal
बल्कि أَنتُمْ तुम antum
तुम قَوْمٌۭ लोग हो qawmun
लोग हो مُّسْرِفُونَ हद से बढ़े हुए mus'rifūna
हद से बढ़े हुए ١٩ (19)
(19)
उन्होंने कहा طَـٰٓئِرُكُم नहूसत तुम्हारी ṭāirukum
नहूसत तुम्हारी مَّعَكُمْ ۚ साथ है तुम्हारे maʿakum
साथ है तुम्हारे أَئِن क्या (इस लिए कि) a-in
क्या (इस लिए कि) ذُكِّرْتُم ۚ नसीहत किए गए तुम dhukkir'tum
नसीहत किए गए तुम بَلْ बल्कि bal
बल्कि أَنتُمْ तुम antum
तुम قَوْمٌۭ लोग हो qawmun
लोग हो مُّسْرِفُونَ हद से बढ़े हुए mus'rifūna
हद से बढ़े हुए ١٩ (19)
(19)
उन लोगों ने कहा : तुम्हारा अपशकुन तुम्हारे ही साथ है। क्या इसलिए कि तुम्हें उपदेश दिया गया? बल्कि तुम उल्लंघनकारी लोग हो।
३६:२०
وَجَآءَ
और आया
wajāa
और आया مِنْ from min
from أَقْصَا परले किनारे से aqṣā
परले किनारे से ٱلْمَدِينَةِ शहर के l-madīnati
शहर के رَجُلٌۭ एक शख़्स rajulun
एक शख़्स يَسْعَىٰ दौड़ता हुआ yasʿā
दौड़ता हुआ قَالَ बोला qāla
बोला يَـٰقَوْمِ ऐ मेरी क़ौम yāqawmi
ऐ मेरी क़ौम ٱتَّبِعُوا۟ पैरवी करो ittabiʿū
पैरवी करो ٱلْمُرْسَلِينَ इन रसूलों की l-mur'salīna
इन रसूलों की ٢٠ (20)
(20)
और आया مِنْ from min
from أَقْصَا परले किनारे से aqṣā
परले किनारे से ٱلْمَدِينَةِ शहर के l-madīnati
शहर के رَجُلٌۭ एक शख़्स rajulun
एक शख़्स يَسْعَىٰ दौड़ता हुआ yasʿā
दौड़ता हुआ قَالَ बोला qāla
बोला يَـٰقَوْمِ ऐ मेरी क़ौम yāqawmi
ऐ मेरी क़ौम ٱتَّبِعُوا۟ पैरवी करो ittabiʿū
पैरवी करो ٱلْمُرْسَلِينَ इन रसूलों की l-mur'salīna
इन रसूलों की ٢٠ (20)
(20)
तथा नगर के अंतिम किनारे से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! रसूलों का कहा मानो।
३६:२१
ٱتَّبِعُوا۟
पैरवी करो
ittabiʿū
पैरवी करो مَن इनकी जो man
इनकी जो لَّا (do) not lā
(do) not يَسْـَٔلُكُمْ नहीं सवाल करते तुमसे yasalukum
नहीं सवाल करते तुमसे أَجْرًۭا किसी अजर का ajran
किसी अजर का وَهُم जब कि वो wahum
जब कि वो مُّهْتَدُونَ हिदायत याफ़्ता हैं muh'tadūna
हिदायत याफ़्ता हैं ٢١ (21)
(21)
पैरवी करो مَن इनकी जो man
इनकी जो لَّا (do) not lā
(do) not يَسْـَٔلُكُمْ नहीं सवाल करते तुमसे yasalukum
नहीं सवाल करते तुमसे أَجْرًۭا किसी अजर का ajran
किसी अजर का وَهُم जब कि वो wahum
जब कि वो مُّهْتَدُونَ हिदायत याफ़्ता हैं muh'tadūna
हिदायत याफ़्ता हैं ٢١ (21)
(21)
तुम उनका अनुसरण करो, जो तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगते तथा वे सीधे मार्ग पर हैं।
३६:२२
وَمَا
और क्या है
wamā
और क्या है لِىَ मुझे liya
मुझे لَآ (that) not lā
(that) not أَعْبُدُ कि ना मैं इबादत करूँ aʿbudu
कि ना मैं इबादत करूँ ٱلَّذِى उसकी जिसने alladhī
उसकी जिसने فَطَرَنِى पैदा किया मुझे faṭaranī
पैदा किया मुझे وَإِلَيْهِ और तरफ़ उसी के wa-ilayhi
और तरफ़ उसी के تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे ٢٢ (22)
(22)
और क्या है لِىَ मुझे liya
मुझे لَآ (that) not lā
(that) not أَعْبُدُ कि ना मैं इबादत करूँ aʿbudu
कि ना मैं इबादत करूँ ٱلَّذِى उसकी जिसने alladhī
उसकी जिसने فَطَرَنِى पैदा किया मुझे faṭaranī
पैदा किया मुझे وَإِلَيْهِ और तरफ़ उसी के wa-ilayhi
और तरफ़ उसी के تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे ٢٢ (22)
(22)
तथा मुझे क्या हुआ है कि मैं उसकी इबादत न करूँ, जिसने मुझे पैदा किया है और तुम (सब) उसी की ओर लौटाए जाओगे?
३६:२३
ءَأَتَّخِذُ
क्या मैं बना लूँ
a-attakhidhu
क्या मैं बना लूँ مِن besides Him min
besides Him دُونِهِۦٓ उसके सिवा से dūnihi
उसके सिवा से ءَالِهَةً कुछ इलाह ālihatan
कुछ इलाह إِن अगर in
अगर يُرِدْنِ इरादा करे मेरे साथ yurid'ni
इरादा करे मेरे साथ ٱلرَّحْمَـٰنُ रहमान l-raḥmānu
रहमान بِضُرٍّۢ किसी नुक़सान का biḍurrin
किसी नुक़सान का لَّا not lā
not تُغْنِ ना काम आएगी tugh'ni
ना काम आएगी عَنِّى मुझे ʿannī
मुझे شَفَـٰعَتُهُمْ शफ़ाअत उनकी shafāʿatuhum
शफ़ाअत उनकी شَيْـًۭٔا कुछ भी shayan
कुछ भी وَلَا और ना walā
और ना يُنقِذُونِ वो बचा सकेंगे मुझे yunqidhūni
वो बचा सकेंगे मुझे ٢٣ (23)
(23)
क्या मैं बना लूँ مِن besides Him min
besides Him دُونِهِۦٓ उसके सिवा से dūnihi
उसके सिवा से ءَالِهَةً कुछ इलाह ālihatan
कुछ इलाह إِن अगर in
अगर يُرِدْنِ इरादा करे मेरे साथ yurid'ni
इरादा करे मेरे साथ ٱلرَّحْمَـٰنُ रहमान l-raḥmānu
रहमान بِضُرٍّۢ किसी नुक़सान का biḍurrin
किसी नुक़सान का لَّا not lā
not تُغْنِ ना काम आएगी tugh'ni
ना काम आएगी عَنِّى मुझे ʿannī
मुझे شَفَـٰعَتُهُمْ शफ़ाअत उनकी shafāʿatuhum
शफ़ाअत उनकी شَيْـًۭٔا कुछ भी shayan
कुछ भी وَلَا और ना walā
और ना يُنقِذُونِ वो बचा सकेंगे मुझे yunqidhūni
वो बचा सकेंगे मुझे ٢٣ (23)
(23)
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरे पूज्य बना लूँ? यदि रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो उनकी सिफ़ारिश मुझे कुछ लाभ नहीं पहुँचा सकेगी और न वे मुझे बचा सकेंगे।
३६:२४
إِنِّىٓ
बेशक मैं
innī
बेशक मैं إِذًۭا तब idhan
तब لَّفِى surely would be in lafī
surely would be in ضَلَـٰلٍۢ अलबत्ता गुमराही में हूँगा ḍalālin
अलबत्ता गुमराही में हूँगा مُّبِينٍ खुली-खुली mubīnin
खुली-खुली ٢٤ (24)
(24)
बेशक मैं إِذًۭا तब idhan
तब لَّفِى surely would be in lafī
surely would be in ضَلَـٰلٍۢ अलबत्ता गुमराही में हूँगा ḍalālin
अलबत्ता गुमराही में हूँगा مُّبِينٍ खुली-खुली mubīnin
खुली-खुली ٢٤ (24)
(24)
निःसंदेह मैं उस समय खुली गुमराही में हूँगा।
३६:२५
إِنِّىٓ
बेशक मैं
innī
बेशक मैं ءَامَنتُ ईमान लाया मैं āmantu
ईमान लाया मैं بِرَبِّكُمْ तुम्हारे रब पर birabbikum
तुम्हारे रब पर فَٱسْمَعُونِ पस सुनो मुझे fa-is'maʿūni
पस सुनो मुझे ٢٥ (25)
(25)
बेशक मैं ءَامَنتُ ईमान लाया मैं āmantu
ईमान लाया मैं بِرَبِّكُمْ तुम्हारे रब पर birabbikum
तुम्हारे रब पर فَٱسْمَعُونِ पस सुनो मुझे fa-is'maʿūni
पस सुनो मुझे ٢٥ (25)
(25)
निःसंदेह मैं तुम्हारे पालनहार पर ईमान ले आया। अतः मेरी बात सुनो।
३६:२६
قِيلَ
कहा गया
qīla
कहा गया ٱدْخُلِ दाख़िल हो जाओ ud'khuli
दाख़िल हो जाओ ٱلْجَنَّةَ ۖ जन्नत में l-janata
जन्नत में قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा يَـٰلَيْتَ ऐ काश yālayta
ऐ काश قَوْمِى मेरी क़ौम (के लोग) qawmī
मेरी क़ौम (के लोग) يَعْلَمُونَ वो जान लेते yaʿlamūna
वो जान लेते ٢٦ (26)
(26)
कहा गया ٱدْخُلِ दाख़िल हो जाओ ud'khuli
दाख़िल हो जाओ ٱلْجَنَّةَ ۖ जन्नत में l-janata
जन्नत में قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा يَـٰلَيْتَ ऐ काश yālayta
ऐ काश قَوْمِى मेरी क़ौम (के लोग) qawmī
मेरी क़ौम (के लोग) يَعْلَمُونَ वो जान लेते yaʿlamūna
वो जान लेते ٢٦ (26)
(26)
(उससे) कहा गया : जन्नत में प्रवेश कर जा। उसने कहा : काश मेरी जाति भी जान लेती!
३६:२७
بِمَا
बवजह उसके जो
bimā
बवजह उसके जो غَفَرَ has forgiven ghafara
has forgiven لِى बख़्श दिया मुझे lī
बख़्श दिया मुझे رَبِّى मेरे रब ने rabbī
मेरे रब ने وَجَعَلَنِى और उसने बना दिया मुझे wajaʿalanī
और उसने बना दिया मुझे مِنَ among mina
among ٱلْمُكْرَمِينَ बाइज़्ज़त लोगों में से l-muk'ramīna
बाइज़्ज़त लोगों में से ٢٧ (27)
(27)
बवजह उसके जो غَفَرَ has forgiven ghafara
has forgiven لِى बख़्श दिया मुझे lī
बख़्श दिया मुझे رَبِّى मेरे रब ने rabbī
मेरे रब ने وَجَعَلَنِى और उसने बना दिया मुझे wajaʿalanī
और उसने बना दिया मुझे مِنَ among mina
among ٱلْمُكْرَمِينَ बाइज़्ज़त लोगों में से l-muk'ramīna
बाइज़्ज़त लोगों में से ٢٧ (27)
(27)
कि मेरे पालनहार ने मुझे क्षमा1 कर दिया और मुझे सम्मानित लोगों में शामिल कर दिया।
३६:२८
۞ وَمَآ
और नहीं
wamā
और नहीं أَنزَلْنَا उतारा हमने anzalnā
उतारा हमने عَلَىٰ upon ʿalā
upon قَوْمِهِۦ उसकी क़ौम पर qawmihi
उसकी क़ौम पर مِنۢ after him min
after him بَعْدِهِۦ उसके बाद baʿdihi
उसके बाद مِن any min
any جُندٍۢ कोई लश्कर jundin
कोई लश्कर مِّنَ from mina
from ٱلسَّمَآءِ आसमान से l-samāi
आसमान से وَمَا और ना wamā
और ना كُنَّا थे हम kunnā
थे हम مُنزِلِينَ उतारने वाले munzilīna
उतारने वाले ٢٨ (28)
(28)
और नहीं أَنزَلْنَا उतारा हमने anzalnā
उतारा हमने عَلَىٰ upon ʿalā
upon قَوْمِهِۦ उसकी क़ौम पर qawmihi
उसकी क़ौम पर مِنۢ after him min
after him بَعْدِهِۦ उसके बाद baʿdihi
उसके बाद مِن any min
any جُندٍۢ कोई लश्कर jundin
कोई लश्कर مِّنَ from mina
from ٱلسَّمَآءِ आसमान से l-samāi
आसमान से وَمَا और ना wamā
और ना كُنَّا थे हम kunnā
थे हम مُنزِلِينَ उतारने वाले munzilīna
उतारने वाले ٢٨ (28)
(28)
तथा हमने उसके पश्चात् उसकी जाति पर आकाश से कोई सेना नहीं उतारी और न हम उतारने वाले थे।1
३६:२९
إِن
ना
in
ना كَانَتْ थी वो kānat
थी वो إِلَّا मगर illā
मगर صَيْحَةًۭ चिंघाड़ ṣayḥatan
चिंघाड़ وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُمْ वो hum
वो خَـٰمِدُونَ सब बुझ कर रह गए khāmidūna
सब बुझ कर रह गए ٢٩ (29)
(29)
ना كَانَتْ थी वो kānat
थी वो إِلَّا मगर illā
मगर صَيْحَةًۭ चिंघाड़ ṣayḥatan
चिंघाड़ وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُمْ वो hum
वो خَـٰمِدُونَ सब बुझ कर रह गए khāmidūna
सब बुझ कर रह गए ٢٩ (29)
(29)
वह तो मात्र एक तेज़ आवाज़ (चिंघाड़) थी। फिर एकाएक वे बुझे हुए थे।1
३६:३०
يَـٰحَسْرَةً
हाय अफ़सोस
yāḥasratan
हाय अफ़सोस عَلَى for ʿalā
for ٱلْعِبَادِ ۚ बन्दों पर l-ʿibādi
बन्दों पर مَا नहीं mā
नहीं يَأْتِيهِم आया उनके पास yatīhim
आया उनके पास مِّن any min
any رَّسُولٍ कोई रसूल rasūlin
कोई रसूल إِلَّا मगर illā
मगर كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो بِهِۦ उसका bihi
उसका يَسْتَهْزِءُونَ वो मज़ाक़ उड़ाते yastahziūna
वो मज़ाक़ उड़ाते ٣٠ (30)
(30)
हाय अफ़सोस عَلَى for ʿalā
for ٱلْعِبَادِ ۚ बन्दों पर l-ʿibādi
बन्दों पर مَا नहीं mā
नहीं يَأْتِيهِم आया उनके पास yatīhim
आया उनके पास مِّن any min
any رَّسُولٍ कोई रसूल rasūlin
कोई रसूल إِلَّا मगर illā
मगर كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो بِهِۦ उसका bihi
उसका يَسْتَهْزِءُونَ वो मज़ाक़ उड़ाते yastahziūna
वो मज़ाक़ उड़ाते ٣٠ (30)
(30)
हाय अफसोस है1 बंदों पर! उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका उपहास किया करते थे।
३६:३१
أَلَمْ
क्या नहीं
alam
क्या नहीं يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा كَمْ कितने ही kam
कितने ही أَهْلَكْنَا हलाक कर दिए हमने ahlaknā
हलाक कर दिए हमने قَبْلَهُم उनसे पहले qablahum
उनसे पहले مِّنَ of mina
of ٱلْقُرُونِ उम्मतों में से(लोग) l-qurūni
उम्मतों में से(लोग) أَنَّهُمْ बेशक वो annahum
बेशक वो إِلَيْهِمْ तरफ़ उनके ilayhim
तरफ़ उनके لَا will not return lā
will not return يَرْجِعُونَ नहीं वो लौटेंगे yarjiʿūna
नहीं वो लौटेंगे ٣١ (31)
(31)
क्या नहीं يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा كَمْ कितने ही kam
कितने ही أَهْلَكْنَا हलाक कर दिए हमने ahlaknā
हलाक कर दिए हमने قَبْلَهُم उनसे पहले qablahum
उनसे पहले مِّنَ of mina
of ٱلْقُرُونِ उम्मतों में से(लोग) l-qurūni
उम्मतों में से(लोग) أَنَّهُمْ बेशक वो annahum
बेशक वो إِلَيْهِمْ तरफ़ उनके ilayhim
तरफ़ उनके لَا will not return lā
will not return يَرْجِعُونَ नहीं वो लौटेंगे yarjiʿūna
नहीं वो लौटेंगे ٣١ (31)
(31)
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया कि वे उनकी ओर लौटकर नहीं आएँगे।
३६:३२
وَإِن
और नहीं
wa-in
और नहीं كُلٌّۭ वो सब kullun
वो सब لَّمَّا मगर lammā
मगर جَمِيعٌۭ सब के सब jamīʿun
सब के सब لَّدَيْنَا हमारे ही पास ladaynā
हमारे ही पास مُحْضَرُونَ हाज़िर किए जाऐंगे muḥ'ḍarūna
हाज़िर किए जाऐंगे ٣٢ (32)
(32)
और नहीं كُلٌّۭ वो सब kullun
वो सब لَّمَّا मगर lammā
मगर جَمِيعٌۭ सब के सब jamīʿun
सब के सब لَّدَيْنَا हमारे ही पास ladaynā
हमारे ही पास مُحْضَرُونَ हाज़िर किए जाऐंगे muḥ'ḍarūna
हाज़िर किए जाऐंगे ٣٢ (32)
(32)
तथा वे जितने भी हैं सबके सब हमारे सामने उपस्थित किए जाएँगे।1
३६:३३
وَءَايَةٌۭ
और एक निशानी है
waāyatun
और एक निशानी है لَّهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन ٱلْمَيْتَةُ मुर्दा l-maytatu
मुर्दा أَحْيَيْنَـٰهَا ज़िन्दा किया हमने उसे aḥyaynāhā
ज़िन्दा किया हमने उसे وَأَخْرَجْنَا और निकाला हमने wa-akhrajnā
और निकाला हमने مِنْهَا उससे min'hā
उससे حَبًّۭا ग़ल्ला ḥabban
ग़ल्ला فَمِنْهُ तो उससे famin'hu
तो उससे يَأْكُلُونَ वो खाते हैं yakulūna
वो खाते हैं ٣٣ (33)
(33)
और एक निशानी है لَّهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन ٱلْمَيْتَةُ मुर्दा l-maytatu
मुर्दा أَحْيَيْنَـٰهَا ज़िन्दा किया हमने उसे aḥyaynāhā
ज़िन्दा किया हमने उसे وَأَخْرَجْنَا और निकाला हमने wa-akhrajnā
और निकाला हमने مِنْهَا उससे min'hā
उससे حَبًّۭا ग़ल्ला ḥabban
ग़ल्ला فَمِنْهُ तो उससे famin'hu
तो उससे يَأْكُلُونَ वो खाते हैं yakulūna
वो खाते हैं ٣٣ (33)
(33)
तथा उनके1 लिए एक बड़ी निशानी मृत भूमि है। हमने उसे जीवित किया और उससे अन्न निकाला। तो वे उसी में से खाते हैं।
३६:३४
وَجَعَلْنَا
और बनाए हमने
wajaʿalnā
और बनाए हमने فِيهَا उसमें fīhā
उसमें جَنَّـٰتٍۢ बाग़ात jannātin
बाग़ात مِّن of min
of نَّخِيلٍۢ खजूरों के nakhīlin
खजूरों के وَأَعْنَـٰبٍۢ और अंगूरों के wa-aʿnābin
और अंगूरों के وَفَجَّرْنَا और जारी किए हमने wafajjarnā
और जारी किए हमने فِيهَا उसमें fīhā
उसमें مِنَ of mina
of ٱلْعُيُونِ चश्मे l-ʿuyūni
चश्मे ٣٤ (34)
(34)
और बनाए हमने فِيهَا उसमें fīhā
उसमें جَنَّـٰتٍۢ बाग़ात jannātin
बाग़ात مِّن of min
of نَّخِيلٍۢ खजूरों के nakhīlin
खजूरों के وَأَعْنَـٰبٍۢ और अंगूरों के wa-aʿnābin
और अंगूरों के وَفَجَّرْنَا और जारी किए हमने wafajjarnā
और जारी किए हमने فِيهَا उसमें fīhā
उसमें مِنَ of mina
of ٱلْعُيُونِ चश्मे l-ʿuyūni
चश्मे ٣٤ (34)
(34)
तथा हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के कई बाग बनाए और उनमें कई जल स्रोत प्रवाहित कर दिए।
३६:३५
لِيَأْكُلُوا۟
ताकि वो खाऐं
liyakulū
ताकि वो खाऐं مِن of min
of ثَمَرِهِۦ उसके फल से thamarihi
उसके फल से وَمَا हालाँकि नहीं wamā
हालाँकि नहीं عَمِلَتْهُ बनाया उसे ʿamilathu
बनाया उसे أَيْدِيهِمْ ۖ उनके हाथों ने aydīhim
उनके हाथों ने أَفَلَا क्या फिर नहीं afalā
क्या फिर नहीं يَشْكُرُونَ वो शुक्र अदा करते yashkurūna
वो शुक्र अदा करते ٣٥ (35)
(35)
ताकि वो खाऐं مِن of min
of ثَمَرِهِۦ उसके फल से thamarihi
उसके फल से وَمَا हालाँकि नहीं wamā
हालाँकि नहीं عَمِلَتْهُ बनाया उसे ʿamilathu
बनाया उसे أَيْدِيهِمْ ۖ उनके हाथों ने aydīhim
उनके हाथों ने أَفَلَا क्या फिर नहीं afalā
क्या फिर नहीं يَشْكُرُونَ वो शुक्र अदा करते yashkurūna
वो शुक्र अदा करते ٣٥ (35)
(35)
ताकि वे उसके फल खाएँ, हालाँकि उसे उनके हाथों ने नहीं बनाया है। तो क्या वे आभार प्रकट नहीं करते?
३६:३६
سُبْحَـٰنَ
पाक है
sub'ḥāna
पाक है ٱلَّذِى वो जिसने alladhī
वो जिसने خَلَقَ पैदा किए khalaqa
पैदा किए ٱلْأَزْوَٰجَ जोड़े l-azwāja
जोड़े كُلَّهَا सब के सब kullahā
सब के सब مِمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो تُنۢبِتُ उगाती है tunbitu
उगाती है ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन وَمِنْ and of wamin
and of أَنفُسِهِمْ और उनके अपने नफ़्सों में से anfusihim
और उनके अपने नफ़्सों में से وَمِمَّا और उसमें से जो wamimmā
और उसमें से जो لَا not lā
not يَعْلَمُونَ नहीं वो जानते yaʿlamūna
नहीं वो जानते ٣٦ (36)
(36)
पाक है ٱلَّذِى वो जिसने alladhī
वो जिसने خَلَقَ पैदा किए khalaqa
पैदा किए ٱلْأَزْوَٰجَ जोड़े l-azwāja
जोड़े كُلَّهَا सब के सब kullahā
सब के सब مِمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो تُنۢبِتُ उगाती है tunbitu
उगाती है ٱلْأَرْضُ ज़मीन l-arḍu
ज़मीन وَمِنْ and of wamin
and of أَنفُسِهِمْ और उनके अपने नफ़्सों में से anfusihim
और उनके अपने नफ़्सों में से وَمِمَّا और उसमें से जो wamimmā
और उसमें से जो لَا not lā
not يَعْلَمُونَ नहीं वो जानते yaʿlamūna
नहीं वो जानते ٣٦ (36)
(36)
पवित्र है वह अस्तित्व जिसने सभी जोड़े पैदा किए, उन चीज़ों के भी जिन्हें धरती उगाती है, और स्वयं उन (मनुष्यों) के अपने भी, और उनके भी जिन्हें वे नहीं जानते।
३६:३७
وَءَايَةٌۭ
और एक निशानी
waāyatun
और एक निशानी لَّهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए ٱلَّيْلُ रात है al-laylu
रात है نَسْلَخُ हम खींच लेते हैं naslakhu
हम खींच लेते हैं مِنْهُ उससे min'hu
उससे ٱلنَّهَارَ दिन को l-nahāra
दिन को فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُم वो hum
वो مُّظْلِمُونَ अंधेरे में हो जाते हैं muẓ'limūna
अंधेरे में हो जाते हैं ٣٧ (37)
(37)
और एक निशानी لَّهُمُ उनके लिए lahumu
उनके लिए ٱلَّيْلُ रात है al-laylu
रात है نَسْلَخُ हम खींच लेते हैं naslakhu
हम खींच लेते हैं مِنْهُ उससे min'hu
उससे ٱلنَّهَارَ दिन को l-nahāra
दिन को فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُم वो hum
वो مُّظْلِمُونَ अंधेरे में हो जाते हैं muẓ'limūna
अंधेरे में हो जाते हैं ٣٧ (37)
(37)
तथा एक निशानी उनके लिए रात है। जिससे हम दिन को खींच लेते हैं, तो एकाएक वे अंधेरे में हो जाते हैं।
३६:३८
وَٱلشَّمْسُ
और सूरज
wal-shamsu
और सूरज تَجْرِى वो चल रहा है tajrī
वो चल रहा है لِمُسْتَقَرٍّۢ ठिकाने के लिए limus'taqarrin
ठिकाने के लिए لَّهَا ۚ अपने lahā
अपने ذَٰلِكَ ये dhālika
ये تَقْدِيرُ अंदाज़ा है taqdīru
अंदाज़ा है ٱلْعَزِيزِ बहुत ज़बरदस्त का l-ʿazīzi
बहुत ज़बरदस्त का ٱلْعَلِيمِ ख़ूब इल्म वाले का l-ʿalīmi
ख़ूब इल्म वाले का ٣٨ (38)
(38)
और सूरज تَجْرِى वो चल रहा है tajrī
वो चल रहा है لِمُسْتَقَرٍّۢ ठिकाने के लिए limus'taqarrin
ठिकाने के लिए لَّهَا ۚ अपने lahā
अपने ذَٰلِكَ ये dhālika
ये تَقْدِيرُ अंदाज़ा है taqdīru
अंदाज़ा है ٱلْعَزِيزِ बहुत ज़बरदस्त का l-ʿazīzi
बहुत ज़बरदस्त का ٱلْعَلِيمِ ख़ूब इल्म वाले का l-ʿalīmi
ख़ूब इल्म वाले का ٣٨ (38)
(38)
तथा सूर्य अपने नियत ठिकाने की ओर चला जा रहा है। यह प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) का निर्धारित किया हुआ है।
३६:३९
وَٱلْقَمَرَ
और चाँद
wal-qamara
और चाँद قَدَّرْنَـٰهُ मुक़र्रर कीं हमने उसकी qaddarnāhu
मुक़र्रर कीं हमने उसकी مَنَازِلَ मंज़िलें manāzila
मंज़िलें حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि عَادَ वो दोबारा हो जाता है ʿāda
वो दोबारा हो जाता है كَٱلْعُرْجُونِ खजूर की सूखी शाख़ की तरह kal-ʿur'jūni
खजूर की सूखी शाख़ की तरह ٱلْقَدِيمِ जो पुरानी हो l-qadīmi
जो पुरानी हो ٣٩ (39)
(39)
और चाँद قَدَّرْنَـٰهُ मुक़र्रर कीं हमने उसकी qaddarnāhu
मुक़र्रर कीं हमने उसकी مَنَازِلَ मंज़िलें manāzila
मंज़िलें حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि عَادَ वो दोबारा हो जाता है ʿāda
वो दोबारा हो जाता है كَٱلْعُرْجُونِ खजूर की सूखी शाख़ की तरह kal-ʿur'jūni
खजूर की सूखी शाख़ की तरह ٱلْقَدِيمِ जो पुरानी हो l-qadīmi
जो पुरानी हो ٣٩ (39)
(39)
तथा चाँद की हमने मंज़िलें निर्धारित कर दी हैं। यहाँ तक कि वह फिर खजूर की पुरानी सूखी टेढ़ी टहनी के समान हो जाता है।
३६:४०
لَا
Not
lā
Not ٱلشَّمْسُ ना सूरज l-shamsu
ना सूरज يَنۢبَغِى लायक़ है yanbaghī
लायक़ है لَهَآ उसके लिए lahā
उसके लिए أَن कि an
कि تُدْرِكَ वो जा पकड़े tud'rika
वो जा पकड़े ٱلْقَمَرَ चाँद को l-qamara
चाँद को وَلَا और ना walā
और ना ٱلَّيْلُ रात al-laylu
रात سَابِقُ सबक़त ले जाने वाली हैं sābiqu
सबक़त ले जाने वाली हैं ٱلنَّهَارِ ۚ दिन से l-nahāri
दिन से وَكُلٌّۭ और सब के सब wakullun
और सब के सब فِى in fī
in فَلَكٍۢ एक मदार में falakin
एक मदार में يَسْبَحُونَ वो तैर रहे हैं yasbaḥūna
वो तैर रहे हैं ٤٠ (40)
(40)
Not ٱلشَّمْسُ ना सूरज l-shamsu
ना सूरज يَنۢبَغِى लायक़ है yanbaghī
लायक़ है لَهَآ उसके लिए lahā
उसके लिए أَن कि an
कि تُدْرِكَ वो जा पकड़े tud'rika
वो जा पकड़े ٱلْقَمَرَ चाँद को l-qamara
चाँद को وَلَا और ना walā
और ना ٱلَّيْلُ रात al-laylu
रात سَابِقُ सबक़त ले जाने वाली हैं sābiqu
सबक़त ले जाने वाली हैं ٱلنَّهَارِ ۚ दिन से l-nahāri
दिन से وَكُلٌّۭ और सब के सब wakullun
और सब के सब فِى in fī
in فَلَكٍۢ एक मदार में falakin
एक मदार में يَسْبَحُونَ वो तैर रहे हैं yasbaḥūna
वो तैर रहे हैं ٤٠ (40)
(40)
न तो सूर्य ही से हो सकता है कि चाँद को जा पकड़े और न रात ही दिन से पहले आने वाली है। और सब एक-एक कक्षा में तैर रहे हैं।
३६:४१
وَءَايَةٌۭ
और एक निशानी है
waāyatun
और एक निशानी है لَّهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम حَمَلْنَا सवार किया हमने ḥamalnā
सवार किया हमने ذُرِّيَّتَهُمْ उनकी औलाद को dhurriyyatahum
उनकी औलाद को فِى in fī
in ٱلْفُلْكِ कश्ती में l-ful'ki
कश्ती में ٱلْمَشْحُونِ भरी हुई l-mashḥūni
भरी हुई ٤١ (41)
(41)
और एक निशानी है لَّهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम حَمَلْنَا सवार किया हमने ḥamalnā
सवार किया हमने ذُرِّيَّتَهُمْ उनकी औलाद को dhurriyyatahum
उनकी औलाद को فِى in fī
in ٱلْفُلْكِ कश्ती में l-ful'ki
कश्ती में ٱلْمَشْحُونِ भरी हुई l-mashḥūni
भरी हुई ٤١ (41)
(41)
तथा उनके लिए एक निशानी (यह भी) है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई नाव में सवार किया।
३६:४२
وَخَلَقْنَا
और पैदा कीं हमने
wakhalaqnā
और पैदा कीं हमने لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए مِّن from min
from مِّثْلِهِۦ उस जैसी (चीज़ों ) से mith'lihi
उस जैसी (चीज़ों ) से مَا जिन पर mā
जिन पर يَرْكَبُونَ वो सवार होते हैं yarkabūna
वो सवार होते हैं ٤٢ (42)
(42)
और पैदा कीं हमने لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए مِّن from min
from مِّثْلِهِۦ उस जैसी (चीज़ों ) से mith'lihi
उस जैसी (चीज़ों ) से مَا जिन पर mā
जिन पर يَرْكَبُونَ वो सवार होते हैं yarkabūna
वो सवार होते हैं ٤٢ (42)
(42)
तथा हमने उनके लिए उस (नाव) जैसी कई और चीज़ें बनाईं, जिनपर वे सवार होते हैं।
३६:४३
وَإِن
और अगर
wa-in
और अगर نَّشَأْ हम चाहें nasha
हम चाहें نُغْرِقْهُمْ हम ग़र्क़ कर दें उन्हें nugh'riq'hum
हम ग़र्क़ कर दें उन्हें فَلَا तो नहीं falā
तो नहीं صَرِيخَ कोई फ़रियाद रस ṣarīkha
कोई फ़रियाद रस لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए وَلَا और ना walā
और ना هُمْ वो hum
वो يُنقَذُونَ वो बचाए जा सकेंगे yunqadhūna
वो बचाए जा सकेंगे ٤٣ (43)
(43)
और अगर نَّشَأْ हम चाहें nasha
हम चाहें نُغْرِقْهُمْ हम ग़र्क़ कर दें उन्हें nugh'riq'hum
हम ग़र्क़ कर दें उन्हें فَلَا तो नहीं falā
तो नहीं صَرِيخَ कोई फ़रियाद रस ṣarīkha
कोई फ़रियाद रस لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए وَلَا और ना walā
और ना هُمْ वो hum
वो يُنقَذُونَ वो बचाए जा सकेंगे yunqadhūna
वो बचाए जा सकेंगे ٤٣ (43)
(43)
और यदि हम चाहें, तो उन्हें डुबो दें। फिर न कोई उनकी फ़र्याद को पहुँचने वाला हो और न वे बचाए जाएँ।
३६:४४
إِلَّا
सिवाए
illā
सिवाए رَحْمَةًۭ रहमत के raḥmatan
रहमत के مِّنَّا हमारी तरफ़ से minnā
हमारी तरफ़ से وَمَتَـٰعًا और फ़ायदा देना wamatāʿan
और फ़ायदा देना إِلَىٰ for ilā
for حِينٍۢ एक मुद्दत तक ḥīnin
एक मुद्दत तक ٤٤ (44)
(44)
सिवाए رَحْمَةًۭ रहमत के raḥmatan
रहमत के مِّنَّا हमारी तरफ़ से minnā
हमारी तरफ़ से وَمَتَـٰعًا और फ़ायदा देना wamatāʿan
और फ़ायदा देना إِلَىٰ for ilā
for حِينٍۢ एक मुद्दत तक ḥīnin
एक मुद्दत तक ٤٤ (44)
(44)
परंतु हमारी ओर से दया और एक समय तक लाभ पहुँचाने की वजह से।
३६:४५
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
और जब قِيلَ कहा जाता है qīla
कहा जाता है لَهُمُ उन्हें lahumu
उन्हें ٱتَّقُوا۟ डरो ittaqū
डरो مَا उससे जो mā
उससे जो بَيْنَ (is) before you bayna
(is) before you أَيْدِيكُمْ तुम्हारे सामने है aydīkum
तुम्हारे सामने है وَمَا और जो wamā
और जो خَلْفَكُمْ तुम्हारे पीछे है khalfakum
तुम्हारे पीछे है لَعَلَّكُمْ ताकि तुम laʿallakum
ताकि तुम تُرْحَمُونَ तुम रहम किए जाओ tur'ḥamūna
तुम रहम किए जाओ ٤٥ (45)
(45)
और जब قِيلَ कहा जाता है qīla
कहा जाता है لَهُمُ उन्हें lahumu
उन्हें ٱتَّقُوا۟ डरो ittaqū
डरो مَا उससे जो mā
उससे जो بَيْنَ (is) before you bayna
(is) before you أَيْدِيكُمْ तुम्हारे सामने है aydīkum
तुम्हारे सामने है وَمَا और जो wamā
और जो خَلْفَكُمْ तुम्हारे पीछे है khalfakum
तुम्हारे पीछे है لَعَلَّكُمْ ताकि तुम laʿallakum
ताकि तुम تُرْحَمُونَ तुम रहम किए जाओ tur'ḥamūna
तुम रहम किए जाओ ٤٥ (45)
(45)
और1 जब उनसे कहा जाता है कि उस (यातना) से डरो, जो तुम्हारे आगे है और जो तुम्हारे पीछे है, ताकि तुमपर दया की जाए।
३६:४६
وَمَا
और नहीं
wamā
और नहीं تَأْتِيهِم आती उनके पास tatīhim
आती उनके पास مِّنْ of min
of ءَايَةٍۢ कोई निशानी āyatin
कोई निशानी مِّنْ from min
from ءَايَـٰتِ निशानियों में से āyāti
निशानियों में से رَبِّهِمْ उनके रब की rabbihim
उनके रब की إِلَّا मगर illā
मगर كَانُوا۟ होते हैं वो kānū
होते हैं वो عَنْهَا उससे ʿanhā
उससे مُعْرِضِينَ ऐराज़ करने वाले muʿ'riḍīna
ऐराज़ करने वाले ٤٦ (46)
(46)
और नहीं تَأْتِيهِم आती उनके पास tatīhim
आती उनके पास مِّنْ of min
of ءَايَةٍۢ कोई निशानी āyatin
कोई निशानी مِّنْ from min
from ءَايَـٰتِ निशानियों में से āyāti
निशानियों में से رَبِّهِمْ उनके रब की rabbihim
उनके रब की إِلَّا मगर illā
मगर كَانُوا۟ होते हैं वो kānū
होते हैं वो عَنْهَا उससे ʿanhā
उससे مُعْرِضِينَ ऐराज़ करने वाले muʿ'riḍīna
ऐराज़ करने वाले ٤٦ (46)
(46)
और उनके पास उनके पालनहार की निशानियों में से कोई निशानी नहीं आती परंतु वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।
३६:४७
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
और जब قِيلَ कहा जाता है qīla
कहा जाता है لَهُمْ उन्हें lahum
उन्हें أَنفِقُوا۟ ख़र्च करो anfiqū
ख़र्च करो مِمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो رَزَقَكُمُ रिज़्क़ दिया तुम्हें razaqakumu
रिज़्क़ दिया तुम्हें ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने قَالَ कहते हैं qāla
कहते हैं ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया لِلَّذِينَ उनसे जो lilladhīna
उनसे जो ءَامَنُوٓا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए أَنُطْعِمُ क्या हम खिलाऐं anuṭ'ʿimu
क्या हम खिलाऐं مَن उसको जिसे man
उसको जिसे لَّوْ अगर law
अगर يَشَآءُ चाहता yashāu
चाहता ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह أَطْعَمَهُۥٓ वो खिला देता उसे aṭʿamahu
वो खिला देता उसे إِنْ नहीं in
नहीं أَنتُمْ तुम antum
तुम إِلَّا मगर illā
मगर فِى in fī
in ضَلَـٰلٍۢ गुमराही में ḍalālin
गुमराही में مُّبِينٍۢ खुली-खुली mubīnin
खुली-खुली ٤٧ (47)
(47)
और जब قِيلَ कहा जाता है qīla
कहा जाता है لَهُمْ उन्हें lahum
उन्हें أَنفِقُوا۟ ख़र्च करो anfiqū
ख़र्च करो مِمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो رَزَقَكُمُ रिज़्क़ दिया तुम्हें razaqakumu
रिज़्क़ दिया तुम्हें ٱللَّهُ अल्लाह ने l-lahu
अल्लाह ने قَالَ कहते हैं qāla
कहते हैं ٱلَّذِينَ वो जिन्होंने alladhīna
वो जिन्होंने كَفَرُوا۟ कुफ़्र किया kafarū
कुफ़्र किया لِلَّذِينَ उनसे जो lilladhīna
उनसे जो ءَامَنُوٓا۟ ईमान लाए āmanū
ईमान लाए أَنُطْعِمُ क्या हम खिलाऐं anuṭ'ʿimu
क्या हम खिलाऐं مَن उसको जिसे man
उसको जिसे لَّوْ अगर law
अगर يَشَآءُ चाहता yashāu
चाहता ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह أَطْعَمَهُۥٓ वो खिला देता उसे aṭʿamahu
वो खिला देता उसे إِنْ नहीं in
नहीं أَنتُمْ तुम antum
तुम إِلَّا मगर illā
मगर فِى in fī
in ضَلَـٰلٍۢ गुमराही में ḍalālin
गुमराही में مُّبِينٍۢ खुली-खुली mubīnin
खुली-खुली ٤٧ (47)
(47)
तथा जब उनसे कहा जाता है कि उस धन में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है, तो काफ़िर लोग ईमान वालों से कहते हैं : क्या हम उसे खाना खिलाएँ, जिसे यदि अल्लाह चाहता, तो खिला देता? तुम तो खुली गुमराही में हो।
३६:४८
وَيَقُولُونَ
और वो कहते हैं
wayaqūlūna
और वो कहते हैं مَتَىٰ कब होगा matā
कब होगा هَـٰذَا ये hādhā
ये ٱلْوَعْدُ वादा l-waʿdu
वादा إِن अगर in
अगर كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम صَـٰدِقِينَ सच्चे ṣādiqīna
सच्चे ٤٨ (48)
(48)
और वो कहते हैं مَتَىٰ कब होगा matā
कब होगा هَـٰذَا ये hādhā
ये ٱلْوَعْدُ वादा l-waʿdu
वादा إِن अगर in
अगर كُنتُمْ हो तुम kuntum
हो तुम صَـٰدِقِينَ सच्चे ṣādiqīna
सच्चे ٤٨ (48)
(48)
तथा वे कहते हैं : यह (क़ियामत का) वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
३६:४९
مَا
नहीं
mā
नहीं يَنظُرُونَ वो इन्तिज़ार कर रहे yanẓurūna
वो इन्तिज़ार कर रहे إِلَّا मगर illā
मगर صَيْحَةًۭ चिंघाड़ का ṣayḥatan
चिंघाड़ का وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही تَأْخُذُهُمْ वो पकड़ लेगी उन्हें takhudhuhum
वो पकड़ लेगी उन्हें وَهُمْ जब कि वो wahum
जब कि वो يَخِصِّمُونَ वो झगड़ रहे होंगे yakhiṣṣimūna
वो झगड़ रहे होंगे ٤٩ (49)
(49)
नहीं يَنظُرُونَ वो इन्तिज़ार कर रहे yanẓurūna
वो इन्तिज़ार कर रहे إِلَّا मगर illā
मगर صَيْحَةًۭ चिंघाड़ का ṣayḥatan
चिंघाड़ का وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही تَأْخُذُهُمْ वो पकड़ लेगी उन्हें takhudhuhum
वो पकड़ लेगी उन्हें وَهُمْ जब कि वो wahum
जब कि वो يَخِصِّمُونَ वो झगड़ रहे होंगे yakhiṣṣimūna
वो झगड़ रहे होंगे ٤٩ (49)
(49)
वे केवल एक चिंघाड़1 की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उन्हें आ पकड़ेगी, जबकि वे (आपस में) झगड़ रहे होंगे।
३६:५०
فَلَا
पस ना
falā
पस ना يَسْتَطِيعُونَ वो इस्तिताअत रखते होंगे yastaṭīʿūna
वो इस्तिताअत रखते होंगे تَوْصِيَةًۭ वसीयत करने की tawṣiyatan
वसीयत करने की وَلَآ और ना walā
और ना إِلَىٰٓ to ilā
to أَهْلِهِمْ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihim
तरफ़ अपने घर वालों के يَرْجِعُونَ वो पलट सकेंगे yarjiʿūna
वो पलट सकेंगे ٥٠ (50)
(50)
पस ना يَسْتَطِيعُونَ वो इस्तिताअत रखते होंगे yastaṭīʿūna
वो इस्तिताअत रखते होंगे تَوْصِيَةًۭ वसीयत करने की tawṣiyatan
वसीयत करने की وَلَآ और ना walā
और ना إِلَىٰٓ to ilā
to أَهْلِهِمْ तरफ़ अपने घर वालों के ahlihim
तरफ़ अपने घर वालों के يَرْجِعُونَ वो पलट सकेंगे yarjiʿūna
वो पलट सकेंगे ٥٠ (50)
(50)
फिर वे न कोई वसीयत कर सकेंगे और न अपने परिजनों की ओर वापस आ सकेंगे।
३६:५१
وَنُفِخَ
और फूँका जाएगा
wanufikha
और फूँका जाएगा فِى [in] fī
[in] ٱلصُّورِ सूर में l-ṣūri
सूर में فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُم वो hum
वो مِّنَ from mina
from ٱلْأَجْدَاثِ क़ब्रों से l-ajdāthi
क़ब्रों से إِلَىٰ to ilā
to رَبِّهِمْ तरफ़ अपने रब के rabbihim
तरफ़ अपने रब के يَنسِلُونَ वो तेज़ी से चल रहे होंगे yansilūna
वो तेज़ी से चल रहे होंगे ٥١ (51)
(51)
और फूँका जाएगा فِى [in] fī
[in] ٱلصُّورِ सूर में l-ṣūri
सूर में فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُم वो hum
वो مِّنَ from mina
from ٱلْأَجْدَاثِ क़ब्रों से l-ajdāthi
क़ब्रों से إِلَىٰ to ilā
to رَبِّهِمْ तरफ़ अपने रब के rabbihim
तरफ़ अपने रब के يَنسِلُونَ वो तेज़ी से चल रहे होंगे yansilūna
वो तेज़ी से चल रहे होंगे ٥١ (51)
(51)
तथा सूर (नरसिंघा) में फूँक1 मारी जाएगी, तो एकाएक वे क़ब्रों से (निकलकर) अपने पालनहार की ओर दौड़ रहे होंगे।
३६:५२
قَالُوا۟
वो कहेंगे
qālū
वो कहेंगे يَـٰوَيْلَنَا हाय अफ़सोस हम पर yāwaylanā
हाय अफ़सोस हम पर مَنۢ किसने man
किसने بَعَثَنَا उठा दिया हमें baʿathanā
उठा दिया हमें مِن from min
from مَّرْقَدِنَا ۜ ۗ हमारी ख़्वाबगाहों से marqadinā
हमारी ख़्वाबगाहों से هَـٰذَا ये है hādhā
ये है مَا वो जो mā
वो जो وَعَدَ वादा किया था waʿada
वादा किया था ٱلرَّحْمَـٰنُ रहमान ने l-raḥmānu
रहमान ने وَصَدَقَ और सच कहा था waṣadaqa
और सच कहा था ٱلْمُرْسَلُونَ रसूलों ने l-mur'salūna
रसूलों ने ٥٢ (52)
(52)
वो कहेंगे يَـٰوَيْلَنَا हाय अफ़सोस हम पर yāwaylanā
हाय अफ़सोस हम पर مَنۢ किसने man
किसने بَعَثَنَا उठा दिया हमें baʿathanā
उठा दिया हमें مِن from min
from مَّرْقَدِنَا ۜ ۗ हमारी ख़्वाबगाहों से marqadinā
हमारी ख़्वाबगाहों से هَـٰذَا ये है hādhā
ये है مَا वो जो mā
वो जो وَعَدَ वादा किया था waʿada
वादा किया था ٱلرَّحْمَـٰنُ रहमान ने l-raḥmānu
रहमान ने وَصَدَقَ और सच कहा था waṣadaqa
और सच कहा था ٱلْمُرْسَلُونَ रसूलों ने l-mur'salūna
रसूलों ने ٥٢ (52)
(52)
वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! किसने हमें हमारी क़ब्रों से उठा दिया? यही है जो रहमान ने वादा किया था और रसूलों ने सच कहा था।
३६:५३
إِن
ना
in
ना كَانَتْ होगी वो kānat
होगी वो إِلَّا मगर illā
मगर صَيْحَةًۭ चिंघाड़ ṣayḥatan
चिंघाड़ وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُمْ वो hum
वो جَمِيعٌۭ सब के सब jamīʿun
सब के सब لَّدَيْنَا हमारे पास ladaynā
हमारे पास مُحْضَرُونَ हाज़िर किए जाऐंगे muḥ'ḍarūna
हाज़िर किए जाऐंगे ٥٣ (53)
(53)
ना كَانَتْ होगी वो kānat
होगी वो إِلَّا मगर illā
मगर صَيْحَةًۭ चिंघाड़ ṣayḥatan
चिंघाड़ وَٰحِدَةًۭ एक ही wāḥidatan
एक ही فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُمْ वो hum
वो جَمِيعٌۭ सब के सब jamīʿun
सब के सब لَّدَيْنَا हमारे पास ladaynā
हमारे पास مُحْضَرُونَ हाज़िर किए जाऐंगे muḥ'ḍarūna
हाज़िर किए जाऐंगे ٥٣ (53)
(53)
वह तो बस एक चिंघाड़ होगी, तो अचानक वे सब हमारे पास उपस्थित किए हुए होंगे।
३६:५४
فَٱلْيَوْمَ
तो आज के दिन
fal-yawma
तो आज के दिन لَا not lā
not تُظْلَمُ ना ज़ुल्म किया जाएगा tuẓ'lamu
ना ज़ुल्म किया जाएगा نَفْسٌۭ किसी नफ़्स पर nafsun
किसी नफ़्स पर شَيْـًۭٔا कुछ भी shayan
कुछ भी وَلَا और ना walā
और ना تُجْزَوْنَ तुम बदला दिए जाओगे tuj'zawna
तुम बदला दिए जाओगे إِلَّا मगर illā
मगर مَا जो mā
जो كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम تَعْمَلُونَ तुम अमल करते taʿmalūna
तुम अमल करते ٥٤ (54)
(54)
तो आज के दिन لَا not lā
not تُظْلَمُ ना ज़ुल्म किया जाएगा tuẓ'lamu
ना ज़ुल्म किया जाएगा نَفْسٌۭ किसी नफ़्स पर nafsun
किसी नफ़्स पर شَيْـًۭٔا कुछ भी shayan
कुछ भी وَلَا और ना walā
और ना تُجْزَوْنَ तुम बदला दिए जाओगे tuj'zawna
तुम बदला दिए जाओगे إِلَّا मगर illā
मगर مَا जो mā
जो كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम تَعْمَلُونَ तुम अमल करते taʿmalūna
तुम अमल करते ٥٤ (54)
(54)
तो आज किसी प्राणी पर कुछ भी अत्याचार नहीं किया जाएगा और तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
३६:५५
إِنَّ
बेशक
inna
बेशक أَصْحَـٰبَ (the) companions aṣḥāba
(the) companions ٱلْجَنَّةِ जन्नत वाले l-janati
जन्नत वाले ٱلْيَوْمَ आज के दिन l-yawma
आज के दिन فِى [in] fī
[in] شُغُلٍۢ मश्ग़लों में shughulin
मश्ग़लों में فَـٰكِهُونَ ख़ुश हो रहे होंगे fākihūna
ख़ुश हो रहे होंगे ٥٥ (55)
(55)
बेशक أَصْحَـٰبَ (the) companions aṣḥāba
(the) companions ٱلْجَنَّةِ जन्नत वाले l-janati
जन्नत वाले ٱلْيَوْمَ आज के दिन l-yawma
आज के दिन فِى [in] fī
[in] شُغُلٍۢ मश्ग़लों में shughulin
मश्ग़लों में فَـٰكِهُونَ ख़ुश हो रहे होंगे fākihūna
ख़ुश हो रहे होंगे ٥٥ (55)
(55)
निःसंदेह जन्नती लोग आज (नेमतों) का आनंद लेने में व्यस्त हैं।
३६:५६
هُمْ
वो
hum
वो وَأَزْوَٰجُهُمْ और बीवियाँ उनकी wa-azwājuhum
और बीवियाँ उनकी فِى in fī
in ظِلَـٰلٍ सायों में ẓilālin
सायों में عَلَى on ʿalā
on ٱلْأَرَآئِكِ तख़्तों पर l-arāiki
तख़्तों पर مُتَّكِـُٔونَ तकिया लगाए हुए होंगे muttakiūna
तकिया लगाए हुए होंगे ٥٦ (56)
(56)
वो وَأَزْوَٰجُهُمْ और बीवियाँ उनकी wa-azwājuhum
और बीवियाँ उनकी فِى in fī
in ظِلَـٰلٍ सायों में ẓilālin
सायों में عَلَى on ʿalā
on ٱلْأَرَآئِكِ तख़्तों पर l-arāiki
तख़्तों पर مُتَّكِـُٔونَ तकिया लगाए हुए होंगे muttakiūna
तकिया लगाए हुए होंगे ٥٦ (56)
(56)
वे तथा उनकी पत्नियाँ छायों में मस्नदों पर तकिया लगाए हुए हैं।
३६:५७
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
उनके लिए فِيهَا उसमें fīhā
उसमें فَـٰكِهَةٌۭ फल होंगे fākihatun
फल होंगे وَلَهُم और उनके लिए होगा walahum
और उनके लिए होगा مَّا जो mā
जो يَدَّعُونَ वो तलब करेंगे yaddaʿūna
वो तलब करेंगे ٥٧ (57)
(57)
उनके लिए فِيهَا उसमें fīhā
उसमें فَـٰكِهَةٌۭ फल होंगे fākihatun
फल होंगे وَلَهُم और उनके लिए होगा walahum
और उनके लिए होगा مَّا जो mā
जो يَدَّعُونَ वो तलब करेंगे yaddaʿūna
वो तलब करेंगे ٥٧ (57)
(57)
उनके लिए उसमें बहुत सारा फल है तथा उनके लिए वह कुछ है, जो वे माँग करेंगे।
३६:५८
سَلَـٰمٌۭ
सलाम
salāmun
सलाम قَوْلًۭا क़ौल होगा qawlan
क़ौल होगा مِّن from min
from رَّبٍّۢ रब की तरफ़ से rabbin
रब की तरफ़ से رَّحِيمٍۢ जो निहायत रहम करने वाला है raḥīmin
जो निहायत रहम करने वाला है ٥٨ (58)
(58)
सलाम قَوْلًۭا क़ौल होगा qawlan
क़ौल होगा مِّن from min
from رَّبٍّۢ रब की तरफ़ से rabbin
रब की तरफ़ से رَّحِيمٍۢ जो निहायत रहम करने वाला है raḥīmin
जो निहायत रहम करने वाला है ٥٨ (58)
(58)
सलाम हो। उस पालनहार की ओर से कहा जाएगा, जो अत्यंत दयावान् है।
३६:५९
وَٱمْتَـٰزُوا۟
और अलग हो जाओ
wa-im'tāzū
और अलग हो जाओ ٱلْيَوْمَ आज के दिन l-yawma
आज के दिन أَيُّهَا ऐ ayyuhā
ऐ ٱلْمُجْرِمُونَ मुजरिमो l-muj'rimūna
मुजरिमो ٥٩ (59)
(59)
और अलग हो जाओ ٱلْيَوْمَ आज के दिन l-yawma
आज के दिन أَيُّهَا ऐ ayyuhā
ऐ ٱلْمُجْرِمُونَ मुजरिमो l-muj'rimūna
मुजरिमो ٥٩ (59)
(59)
तथा ऐ अपराधियो! आज तुम अलग1 हो जाओ।
३६:६०
۞ أَلَمْ
क्या नहीं
alam
क्या नहीं أَعْهَدْ मैं ने ताकीद की थी aʿhad
मैं ने ताकीद की थी إِلَيْكُمْ तुम्हें ilaykum
तुम्हें يَـٰبَنِىٓ ऐ बनी yābanī
ऐ बनी ءَادَمَ आदम ādama
आदम أَن कि an
कि لَّا (do) not lā
(do) not تَعْبُدُوا۟ ना तुम इबादत करना taʿbudū
ना तुम इबादत करना ٱلشَّيْطَـٰنَ ۖ शैतान की l-shayṭāna
शैतान की إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो لَكُمْ तुम्हारा lakum
तुम्हारा عَدُوٌّۭ दुश्मन है ʿaduwwun
दुश्मन है مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला ٦٠ (60)
(60)
क्या नहीं أَعْهَدْ मैं ने ताकीद की थी aʿhad
मैं ने ताकीद की थी إِلَيْكُمْ तुम्हें ilaykum
तुम्हें يَـٰبَنِىٓ ऐ बनी yābanī
ऐ बनी ءَادَمَ आदम ādama
आदम أَن कि an
कि لَّا (do) not lā
(do) not تَعْبُدُوا۟ ना तुम इबादत करना taʿbudū
ना तुम इबादत करना ٱلشَّيْطَـٰنَ ۖ शैतान की l-shayṭāna
शैतान की إِنَّهُۥ बेशक वो innahu
बेशक वो لَكُمْ तुम्हारा lakum
तुम्हारा عَدُوٌّۭ दुश्मन है ʿaduwwun
दुश्मन है مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला ٦٠ (60)
(60)
ऐ आदम की संतान! क्या मैंने तुम्हें ताकीद1 नहीं की थी कि शैतान की उपासना न करना? निश्चय वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
३६:६१
وَأَنِ
और ये कि
wa-ani
और ये कि ٱعْبُدُونِى ۚ इबादत करो मेरी uʿ'budūnī
इबादत करो मेरी هَـٰذَا ये hādhā
ये صِرَٰطٌۭ रास्ता है ṣirāṭun
रास्ता है مُّسْتَقِيمٌۭ सीधा mus'taqīmun
सीधा ٦١ (61)
(61)
और ये कि ٱعْبُدُونِى ۚ इबादत करो मेरी uʿ'budūnī
इबादत करो मेरी هَـٰذَا ये hādhā
ये صِرَٰطٌۭ रास्ता है ṣirāṭun
रास्ता है مُّسْتَقِيمٌۭ सीधा mus'taqīmun
सीधा ٦١ (61)
(61)
तथा यह कि तुम मेरी ही इबादत करो। यही सीधा मार्ग है।
३६:६२
وَلَقَدْ
और अलबत्ता तहक़ीक़
walaqad
और अलबत्ता तहक़ीक़ أَضَلَّ उसने गुमराह कर दिया aḍalla
उसने गुमराह कर दिया مِنكُمْ तुम में से minkum
तुम में से جِبِلًّۭا मख़्लूक़ को jibillan
मख़्लूक़ को كَثِيرًا ۖ बहुत सी kathīran
बहुत सी أَفَلَمْ क्या फिर नहीं afalam
क्या फिर नहीं تَكُونُوا۟ थे तुम takūnū
थे तुम تَعْقِلُونَ तुम अक़्ल से काम लेते taʿqilūna
तुम अक़्ल से काम लेते ٦٢ (62)
(62)
और अलबत्ता तहक़ीक़ أَضَلَّ उसने गुमराह कर दिया aḍalla
उसने गुमराह कर दिया مِنكُمْ तुम में से minkum
तुम में से جِبِلًّۭا मख़्लूक़ को jibillan
मख़्लूक़ को كَثِيرًا ۖ बहुत सी kathīran
बहुत सी أَفَلَمْ क्या फिर नहीं afalam
क्या फिर नहीं تَكُونُوا۟ थे तुम takūnū
थे तुम تَعْقِلُونَ तुम अक़्ल से काम लेते taʿqilūna
तुम अक़्ल से काम लेते ٦٢ (62)
(62)
तथा उसने तुममें से बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तो क्या तुम समझते नहीं थे?
३६:६३
هَـٰذِهِۦ
ये है
hādhihi
ये है جَهَنَّمُ जहन्नम jahannamu
जहन्नम ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम تُوعَدُونَ तुम वादा किए जाते tūʿadūna
तुम वादा किए जाते ٦٣ (63)
(63)
ये है جَهَنَّمُ जहन्नम jahannamu
जहन्नम ٱلَّتِى वो जो allatī
वो जो كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम تُوعَدُونَ तुम वादा किए जाते tūʿadūna
तुम वादा किए जाते ٦٣ (63)
(63)
यही वह जहन्नम है, जिसका तुमसे वादा किया जाता था।
३६:६४
ٱصْلَوْهَا
दाख़िल हो जाओ इसमें
iṣ'lawhā
दाख़िल हो जाओ इसमें ٱلْيَوْمَ आज के दिन l-yawma
आज के दिन بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम تَكْفُرُونَ तुम कुफ़्र करते takfurūna
तुम कुफ़्र करते ٦٤ (64)
(64)
दाख़िल हो जाओ इसमें ٱلْيَوْمَ आज के दिन l-yawma
आज के दिन بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो كُنتُمْ थे तुम kuntum
थे तुम تَكْفُرُونَ तुम कुफ़्र करते takfurūna
तुम कुफ़्र करते ٦٤ (64)
(64)
आज उसमें प्रवेश कर जाओ, उस कुफ़्र के बदले जो तुम किया करते थे।
३६:६५
ٱلْيَوْمَ
आज
al-yawma
आज نَخْتِمُ हम मोहर लगा देंगे nakhtimu
हम मोहर लगा देंगे عَلَىٰٓ [on] ʿalā
[on] أَفْوَٰهِهِمْ उनके मुँहों पर afwāhihim
उनके मुँहों पर وَتُكَلِّمُنَآ और कलाम करेंगे हमसे watukallimunā
और कलाम करेंगे हमसे أَيْدِيهِمْ हाथ उनके aydīhim
हाथ उनके وَتَشْهَدُ और गवाही देंगे watashhadu
और गवाही देंगे أَرْجُلُهُم पाँव उनके arjuluhum
पाँव उनके بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो يَكْسِبُونَ वो कमाई करते yaksibūna
वो कमाई करते ٦٥ (65)
(65)
आज نَخْتِمُ हम मोहर लगा देंगे nakhtimu
हम मोहर लगा देंगे عَلَىٰٓ [on] ʿalā
[on] أَفْوَٰهِهِمْ उनके मुँहों पर afwāhihim
उनके मुँहों पर وَتُكَلِّمُنَآ और कलाम करेंगे हमसे watukallimunā
और कलाम करेंगे हमसे أَيْدِيهِمْ हाथ उनके aydīhim
हाथ उनके وَتَشْهَدُ और गवाही देंगे watashhadu
और गवाही देंगे أَرْجُلُهُم पाँव उनके arjuluhum
पाँव उनके بِمَا बवजह उसके जो bimā
बवजह उसके जो كَانُوا۟ थे वो kānū
थे वो يَكْسِبُونَ वो कमाई करते yaksibūna
वो कमाई करते ٦٥ (65)
(65)
आज हम उनके मुँहों पर मुहर लगा देंगे और उनके हाथ हमसे बात करेंगे तथा उनके पैर उन कर्मों की गवाही देंगे, जो वे किया करते थे।1
३६:६६
وَلَوْ
और अगर
walaw
और अगर نَشَآءُ हम चाहें nashāu
हम चाहें لَطَمَسْنَا अलबत्ता हम मिटा दें laṭamasnā
अलबत्ता हम मिटा दें عَلَىٰٓ [over] ʿalā
[over] أَعْيُنِهِمْ उनकी आँखों को aʿyunihim
उनकी आँखों को فَٱسْتَبَقُوا۟ पस वो दौड़ें fa-is'tabaqū
पस वो दौड़ें ٱلصِّرَٰطَ रास्ते (की तरफ़) l-ṣirāṭa
रास्ते (की तरफ़) فَأَنَّىٰ तो कैसे fa-annā
तो कैसे يُبْصِرُونَ वो देख सकेंगे yub'ṣirūna
वो देख सकेंगे ٦٦ (66)
(66)
और अगर نَشَآءُ हम चाहें nashāu
हम चाहें لَطَمَسْنَا अलबत्ता हम मिटा दें laṭamasnā
अलबत्ता हम मिटा दें عَلَىٰٓ [over] ʿalā
[over] أَعْيُنِهِمْ उनकी आँखों को aʿyunihim
उनकी आँखों को فَٱسْتَبَقُوا۟ पस वो दौड़ें fa-is'tabaqū
पस वो दौड़ें ٱلصِّرَٰطَ रास्ते (की तरफ़) l-ṣirāṭa
रास्ते (की तरफ़) فَأَنَّىٰ तो कैसे fa-annā
तो कैसे يُبْصِرُونَ वो देख सकेंगे yub'ṣirūna
वो देख सकेंगे ٦٦ (66)
(66)
और यदि हम चाहें, तो निश्चय उनकी आँखें मिटा दें। फिर वे रास्ते की ओर दौड़ें, तो कैसे देखेंगे?
३६:६७
وَلَوْ
और अगर
walaw
और अगर نَشَآءُ हम चाहें nashāu
हम चाहें لَمَسَخْنَـٰهُمْ अलबत्ता मसख़ कर दें हम उन्हें lamasakhnāhum
अलबत्ता मसख़ कर दें हम उन्हें عَلَىٰ in ʿalā
in مَكَانَتِهِمْ उनकी जगहों पर makānatihim
उनकी जगहों पर فَمَا तो ना famā
तो ना ٱسْتَطَـٰعُوا۟ वो इस्तिताअत रखते होंगे is'taṭāʿū
वो इस्तिताअत रखते होंगे مُضِيًّۭا चलने की muḍiyyan
चलने की وَلَا और ना walā
और ना يَرْجِعُونَ वो पलट सकेंगे yarjiʿūna
वो पलट सकेंगे ٦٧ (67)
(67)
और अगर نَشَآءُ हम चाहें nashāu
हम चाहें لَمَسَخْنَـٰهُمْ अलबत्ता मसख़ कर दें हम उन्हें lamasakhnāhum
अलबत्ता मसख़ कर दें हम उन्हें عَلَىٰ in ʿalā
in مَكَانَتِهِمْ उनकी जगहों पर makānatihim
उनकी जगहों पर فَمَا तो ना famā
तो ना ٱسْتَطَـٰعُوا۟ वो इस्तिताअत रखते होंगे is'taṭāʿū
वो इस्तिताअत रखते होंगे مُضِيًّۭا चलने की muḍiyyan
चलने की وَلَا और ना walā
और ना يَرْجِعُونَ वो पलट सकेंगे yarjiʿūna
वो पलट सकेंगे ٦٧ (67)
(67)
और यदि हम चाहें, तो उनके स्थान ही पर उनके रूप को परिवर्तित कर दें, फिर वे न आगे जा सकें और न पीछे लौट सकें।
३६:६८
وَمَن
और वो जो
waman
और वो जो نُّعَمِّرْهُ हम उमर देते हैं उसे nuʿammir'hu
हम उमर देते हैं उसे نُنَكِّسْهُ हम उलटा देते हैं उसे nunakkis'hu
हम उलटा देते हैं उसे فِى in fī
in ٱلْخَلْقِ ۖ साख़्त में l-khalqi
साख़्त में أَفَلَا क्या भला नहीं afalā
क्या भला नहीं يَعْقِلُونَ वो अक़्ल रखते yaʿqilūna
वो अक़्ल रखते ٦٨ (68)
(68)
और वो जो نُّعَمِّرْهُ हम उमर देते हैं उसे nuʿammir'hu
हम उमर देते हैं उसे نُنَكِّسْهُ हम उलटा देते हैं उसे nunakkis'hu
हम उलटा देते हैं उसे فِى in fī
in ٱلْخَلْقِ ۖ साख़्त में l-khalqi
साख़्त में أَفَلَا क्या भला नहीं afalā
क्या भला नहीं يَعْقِلُونَ वो अक़्ल रखते yaʿqilūna
वो अक़्ल रखते ٦٨ (68)
(68)
तथा जिसे हम दीर्घायु प्रदान करते हैं, उसे उसकी संरचना में उल्टा1 फेर देते हैं। तो क्या ये नहीं समझते?
३६:६९
وَمَا
और नहीं
wamā
और नहीं عَلَّمْنَـٰهُ सिखाया हमने उसे ʿallamnāhu
सिखाया हमने उसे ٱلشِّعْرَ शेअर l-shiʿ'ra
शेअर وَمَا और नहीं wamā
और नहीं يَنۢبَغِى वो ज़ेब देता yanbaghī
वो ज़ेब देता لَهُۥٓ ۚ उसे lahu
उसे إِنْ नहीं है in
नहीं है هُوَ वो huwa
वो إِلَّا मगर illā
मगर ذِكْرٌۭ एक नसीहत dhik'run
एक नसीहत وَقُرْءَانٌۭ और क़ुरआन waqur'ānun
और क़ुरआन مُّبِينٌۭ वाज़ेह mubīnun
वाज़ेह ٦٩ (69)
(69)
और नहीं عَلَّمْنَـٰهُ सिखाया हमने उसे ʿallamnāhu
सिखाया हमने उसे ٱلشِّعْرَ शेअर l-shiʿ'ra
शेअर وَمَا और नहीं wamā
और नहीं يَنۢبَغِى वो ज़ेब देता yanbaghī
वो ज़ेब देता لَهُۥٓ ۚ उसे lahu
उसे إِنْ नहीं है in
नहीं है هُوَ वो huwa
वो إِلَّا मगर illā
मगर ذِكْرٌۭ एक नसीहत dhik'run
एक नसीहत وَقُرْءَانٌۭ और क़ुरआन waqur'ānun
और क़ुरआन مُّبِينٌۭ वाज़ेह mubīnun
वाज़ेह ٦٩ (69)
(69)
और हमने न उन्हें शे'र (काव्य)1 सिखाया है और न वह उनके योग्य है। वह तो सर्वथा उपदेश तथा स्पष्ट क़ुरआन के सिवा कुछ नहीं।
३६:७०
لِّيُنذِرَ
ताकि वो डराए
liyundhira
ताकि वो डराए مَن उसे जो man
उसे जो كَانَ है kāna
है حَيًّۭا ज़िन्दा ḥayyan
ज़िन्दा وَيَحِقَّ और साबित हो जाए wayaḥiqqa
और साबित हो जाए ٱلْقَوْلُ बात l-qawlu
बात عَلَى against ʿalā
against ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों पर l-kāfirīna
काफ़िरों पर ٧٠ (70)
(70)
ताकि वो डराए مَن उसे जो man
उसे जो كَانَ है kāna
है حَيًّۭا ज़िन्दा ḥayyan
ज़िन्दा وَيَحِقَّ और साबित हो जाए wayaḥiqqa
और साबित हो जाए ٱلْقَوْلُ बात l-qawlu
बात عَلَى against ʿalā
against ٱلْكَـٰفِرِينَ काफ़िरों पर l-kāfirīna
काफ़िरों पर ٧٠ (70)
(70)
ताकि वह उसे डराए, जो जीवित हो1 तथा काफ़िरों पर (यातना की) बात सिद्ध हो जाए।
३६:७१
أَوَلَمْ
क्या भला नहीं
awalam
क्या भला नहीं يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम خَلَقْنَا पैदा किया हमने khalaqnā
पैदा किया हमने لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए مِّمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो عَمِلَتْ बनाया ʿamilat
बनाया أَيْدِينَآ हमारे हाथों ने aydīnā
हमारे हाथों ने أَنْعَـٰمًۭا मवेशियों को anʿāman
मवेशियों को فَهُمْ तो वो fahum
तो वो لَهَا उनके lahā
उनके مَـٰلِكُونَ मालिक हैं mālikūna
मालिक हैं ٧١ (71)
(71)
क्या भला नहीं يَرَوْا۟ उन्होंने देखा yaraw
उन्होंने देखा أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम خَلَقْنَا पैदा किया हमने khalaqnā
पैदा किया हमने لَهُم उनके लिए lahum
उनके लिए مِّمَّا उसमें से जो mimmā
उसमें से जो عَمِلَتْ बनाया ʿamilat
बनाया أَيْدِينَآ हमारे हाथों ने aydīnā
हमारे हाथों ने أَنْعَـٰمًۭا मवेशियों को anʿāman
मवेशियों को فَهُمْ तो वो fahum
तो वो لَهَا उनके lahā
उनके مَـٰلِكُونَ मालिक हैं mālikūna
मालिक हैं ٧١ (71)
(71)
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने अपने हाथों से बनाई हुई चीज़ों में से उनके लिए चौपाए पैदा किए, तो वे उनके मालिक हैं?
३६:७२
وَذَلَّلْنَـٰهَا
और मुतीअ कर दिया हमने उन्हें
wadhallalnāhā
और मुतीअ कर दिया हमने उन्हें لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए فَمِنْهَا तो उनमें से कुछ famin'hā
तो उनमें से कुछ رَكُوبُهُمْ सवारियाँ हैं उनकी rakūbuhum
सवारियाँ हैं उनकी وَمِنْهَا और उनमें से कुछ wamin'hā
और उनमें से कुछ يَأْكُلُونَ वो खाते हैं yakulūna
वो खाते हैं ٧٢ (72)
(72)
और मुतीअ कर दिया हमने उन्हें لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए فَمِنْهَا तो उनमें से कुछ famin'hā
तो उनमें से कुछ رَكُوبُهُمْ सवारियाँ हैं उनकी rakūbuhum
सवारियाँ हैं उनकी وَمِنْهَا और उनमें से कुछ wamin'hā
और उनमें से कुछ يَأْكُلُونَ वो खाते हैं yakulūna
वो खाते हैं ٧٢ (72)
(72)
तथा हमने उन्हें उनके वश में कर दिया, तो उनमें से कुछ उनकी सवारी हैं और उनमें से कुछ को वे खाते हैं।
३६:७३
وَلَهُمْ
और उनके लिए
walahum
और उनके लिए فِيهَا उनमें fīhā
उनमें مَنَـٰفِعُ कई फ़ायदे हैं manāfiʿu
कई फ़ायदे हैं وَمَشَارِبُ ۖ और पीने की चीज़ें हैं wamashāribu
और पीने की चीज़ें हैं أَفَلَا क्या फिर नहीं afalā
क्या फिर नहीं يَشْكُرُونَ वो शुक्र करते yashkurūna
वो शुक्र करते ٧٣ (73)
(73)
और उनके लिए فِيهَا उनमें fīhā
उनमें مَنَـٰفِعُ कई फ़ायदे हैं manāfiʿu
कई फ़ायदे हैं وَمَشَارِبُ ۖ और पीने की चीज़ें हैं wamashāribu
और पीने की चीज़ें हैं أَفَلَا क्या फिर नहीं afalā
क्या फिर नहीं يَشْكُرُونَ वो शुक्र करते yashkurūna
वो शुक्र करते ٧٣ (73)
(73)
तथा उनके लिए उन (चौपायों) में कई लाभ और पीने की चीज़ें हैं। तो क्या (फिर भी) वे आभार प्रकट नहीं करते?
३६:७४
وَٱتَّخَذُوا۟
और उन्होंने बना लिए
wa-ittakhadhū
और उन्होंने बना लिए مِن besides min
besides دُونِ सिवाए dūni
सिवाए ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ءَالِهَةًۭ कई इलाह ālihatan
कई इलाह لَّعَلَّهُمْ ताकि वो laʿallahum
ताकि वो يُنصَرُونَ वो मदद किए जाऐं yunṣarūna
वो मदद किए जाऐं ٧٤ (74)
(74)
और उन्होंने बना लिए مِن besides min
besides دُونِ सिवाए dūni
सिवाए ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के ءَالِهَةًۭ कई इलाह ālihatan
कई इलाह لَّعَلَّهُمْ ताकि वो laʿallahum
ताकि वो يُنصَرُونَ वो मदद किए जाऐं yunṣarūna
वो मदद किए जाऐं ٧٤ (74)
(74)
और उन्होंने अल्लाह के सिवा कई पूज्य बना लिए, ताकि उनकी सहायता की जाए।
३६:७५
لَا
Not
lā
Not يَسْتَطِيعُونَ नहीं वो इस्तिताअत रखते yastaṭīʿūna
नहीं वो इस्तिताअत रखते نَصْرَهُمْ उनकी मदद की naṣrahum
उनकी मदद की وَهُمْ बल्कि वो ख़ुद wahum
बल्कि वो ख़ुद لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए جُندٌۭ लश्कर हैं jundun
लश्कर हैं مُّحْضَرُونَ हाज़िर किए गए muḥ'ḍarūna
हाज़िर किए गए ٧٥ (75)
(75)
Not يَسْتَطِيعُونَ नहीं वो इस्तिताअत रखते yastaṭīʿūna
नहीं वो इस्तिताअत रखते نَصْرَهُمْ उनकी मदद की naṣrahum
उनकी मदद की وَهُمْ बल्कि वो ख़ुद wahum
बल्कि वो ख़ुद لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए جُندٌۭ लश्कर हैं jundun
लश्कर हैं مُّحْضَرُونَ हाज़िर किए गए muḥ'ḍarūna
हाज़िर किए गए ٧٥ (75)
(75)
वे उनकी सहायता करने का सामर्थ्य नहीं रखते, तथा ये उनकी सेना हैं, जो उपस्थित1 किए हुए हैं।
३६:७६
فَلَا
पस ना
falā
पस ना يَحْزُنكَ ग़मगीन करे आपको yaḥzunka
ग़मगीन करे आपको قَوْلُهُمْ ۘ बात उनकी qawluhum
बात उनकी إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम نَعْلَمُ हम जानते हैं naʿlamu
हम जानते हैं مَا जो कुछ mā
जो कुछ يُسِرُّونَ वो छुपाते हैं yusirrūna
वो छुपाते हैं وَمَا और जो कुछ wamā
और जो कुछ يُعْلِنُونَ वो ज़ाहिर करते हैं yuʿ'linūna
वो ज़ाहिर करते हैं ٧٦ (76)
(76)
पस ना يَحْزُنكَ ग़मगीन करे आपको yaḥzunka
ग़मगीन करे आपको قَوْلُهُمْ ۘ बात उनकी qawluhum
बात उनकी إِنَّا बेशक हम innā
बेशक हम نَعْلَمُ हम जानते हैं naʿlamu
हम जानते हैं مَا जो कुछ mā
जो कुछ يُسِرُّونَ वो छुपाते हैं yusirrūna
वो छुपाते हैं وَمَا और जो कुछ wamā
और जो कुछ يُعْلِنُونَ वो ज़ाहिर करते हैं yuʿ'linūna
वो ज़ाहिर करते हैं ٧٦ (76)
(76)
अतः उनकी बात आपको शोकग्रस्त न करे। निःसंदेह हम जानते हैं जो वे छिपाते हैं और जो वे प्रकट करते हैं।
३६:७७
أَوَلَمْ
क्या भला नहीं
awalam
क्या भला नहीं يَرَ देखा yara
देखा ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान ने l-insānu
इन्सान ने أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम خَلَقْنَـٰهُ पैदा किया हमने उसे khalaqnāhu
पैदा किया हमने उसे مِن from min
from نُّطْفَةٍۢ नुत्फ़े से nuṭ'fatin
नुत्फ़े से فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُوَ वो huwa
वो خَصِيمٌۭ झगड़ालू है khaṣīmun
झगड़ालू है مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला ٧٧ (77)
(77)
क्या भला नहीं يَرَ देखा yara
देखा ٱلْإِنسَـٰنُ इन्सान ने l-insānu
इन्सान ने أَنَّا बेशक हम annā
बेशक हम خَلَقْنَـٰهُ पैदा किया हमने उसे khalaqnāhu
पैदा किया हमने उसे مِن from min
from نُّطْفَةٍۢ नुत्फ़े से nuṭ'fatin
नुत्फ़े से فَإِذَا तो यकायक fa-idhā
तो यकायक هُوَ वो huwa
वो خَصِيمٌۭ झगड़ालू है khaṣīmun
झगड़ालू है مُّبِينٌۭ खुल्लम-खुल्ला mubīnun
खुल्लम-खुल्ला ٧٧ (77)
(77)
क्या मनुष्य ने नहीं देखा कि हमने उसे वीर्य से पैदा किया? फिर अचानक वह खुला झगड़ालू बन बैठा।
३६:७८
وَضَرَبَ
और उसने बयान की
waḍaraba
और उसने बयान की لَنَا हमारे लिए lanā
हमारे लिए مَثَلًۭا मिसाल mathalan
मिसाल وَنَسِىَ और वो भूल गया wanasiya
और वो भूल गया خَلْقَهُۥ ۖ अपनी पैदाइश को khalqahu
अपनी पैदाइश को قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा مَن कौन man
कौन يُحْىِ ज़िन्दा करेगा yuḥ'yī
ज़िन्दा करेगा ٱلْعِظَـٰمَ हड्डियों को l-ʿiẓāma
हड्डियों को وَهِىَ जबकि वो wahiya
जबकि वो رَمِيمٌۭ बोसीदा हो चुकी होंगी ramīmun
बोसीदा हो चुकी होंगी ٧٨ (78)
(78)
और उसने बयान की لَنَا हमारे लिए lanā
हमारे लिए مَثَلًۭا मिसाल mathalan
मिसाल وَنَسِىَ और वो भूल गया wanasiya
और वो भूल गया خَلْقَهُۥ ۖ अपनी पैदाइश को khalqahu
अपनी पैदाइश को قَالَ उसने कहा qāla
उसने कहा مَن कौन man
कौन يُحْىِ ज़िन्दा करेगा yuḥ'yī
ज़िन्दा करेगा ٱلْعِظَـٰمَ हड्डियों को l-ʿiẓāma
हड्डियों को وَهِىَ जबकि वो wahiya
जबकि वो رَمِيمٌۭ बोसीदा हो चुकी होंगी ramīmun
बोसीदा हो चुकी होंगी ٧٨ (78)
(78)
और उसने हमारे लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया, और अपनी रचना को भूल गया। उसने कहा : इन अस्थियों को कौन जीवित करेगा, जबकि वे जीर्ण-शीर्ण हो चुकी होंगी?
३६:७९
قُلْ
कह दीजिए
qul
कह दीजिए يُحْيِيهَا ज़िन्दा करेगा उन्हें yuḥ'yīhā
ज़िन्दा करेगा उन्हें ٱلَّذِىٓ वो जिसने alladhī
वो जिसने أَنشَأَهَآ पैदा किया उन्हें ansha-ahā
पैदा किया उन्हें أَوَّلَ पहली awwala
पहली مَرَّةٍۢ ۖ बार marratin
बार وَهُوَ और वो wahuwa
और वो بِكُلِّ हर bikulli
हर خَلْقٍ पैदाइश को khalqin
पैदाइश को عَلِيمٌ ख़ूब जानने वाला है ʿalīmun
ख़ूब जानने वाला है ٧٩ (79)
(79)
कह दीजिए يُحْيِيهَا ज़िन्दा करेगा उन्हें yuḥ'yīhā
ज़िन्दा करेगा उन्हें ٱلَّذِىٓ वो जिसने alladhī
वो जिसने أَنشَأَهَآ पैदा किया उन्हें ansha-ahā
पैदा किया उन्हें أَوَّلَ पहली awwala
पहली مَرَّةٍۢ ۖ बार marratin
बार وَهُوَ और वो wahuwa
और वो بِكُلِّ हर bikulli
हर خَلْقٍ पैदाइश को khalqin
पैदाइश को عَلِيمٌ ख़ूब जानने वाला है ʿalīmun
ख़ूब जानने वाला है ٧٩ (79)
(79)
आप कह दें : उन्हें वही (अल्लाह) जीवित करेगा, जिसने उन्हें प्रथम बार पैदा किया और वह प्रत्येक उत्पत्ति को भली-भाँति जानने वाला है।
३६:८०
ٱلَّذِى
वो जिसने
alladhī
वो जिसने جَعَلَ बनाया jaʿala
बनाया لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए مِّنَ from mina
from ٱلشَّجَرِ the tree l-shajari
the tree ٱلْأَخْضَرِ सरसबज़ दरख़्त से l-akhḍari
सरसबज़ दरख़्त से نَارًۭا आग को nāran
आग को فَإِذَآ तो यकायक fa-idhā
तो यकायक أَنتُم तुम antum
तुम مِّنْهُ उससे min'hu
उससे تُوقِدُونَ तुम आग जलाते हो tūqidūna
तुम आग जलाते हो ٨٠ (80)
(80)
वो जिसने جَعَلَ बनाया jaʿala
बनाया لَكُم तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए مِّنَ from mina
from ٱلشَّجَرِ the tree l-shajari
the tree ٱلْأَخْضَرِ सरसबज़ दरख़्त से l-akhḍari
सरसबज़ दरख़्त से نَارًۭا आग को nāran
आग को فَإِذَآ तो यकायक fa-idhā
तो यकायक أَنتُم तुम antum
तुम مِّنْهُ उससे min'hu
उससे تُوقِدُونَ तुम आग जलाते हो tūqidūna
तुम आग जलाते हो ٨٠ (80)
(80)
वह जिसने तुम्हारे लिए हरे वृक्ष से आग पैदा कर दी, फिर तुम उससे आग1 सुलगाते हो।
३६:८१
أَوَلَيْسَ
क्या भला नहीं है
awalaysa
क्या भला नहीं है ٱلَّذِى वो जिसने alladhī
वो जिसने خَلَقَ पैदा किया khalaqa
पैदा किया ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों وَٱلْأَرْضَ और ज़मीन को wal-arḍa
और ज़मीन को بِقَـٰدِرٍ क़ादिर biqādirin
क़ादिर عَلَىٰٓ इस (बात) पर ʿalā
इस (बात) पर أَن कि an
कि يَخْلُقَ वो पैदा करे yakhluqa
वो पैदा करे مِثْلَهُم ۚ उनकी मानिन्द mith'lahum
उनकी मानिन्द بَلَىٰ क्यों नहीं balā
क्यों नहीं وَهُوَ और वो wahuwa
और वो ٱلْخَلَّـٰقُ सब कुछ पैदा करने वाला हैं l-khalāqu
सब कुछ पैदा करने वाला हैं ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला है l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला है ٨١ (81)
(81)
क्या भला नहीं है ٱلَّذِى वो जिसने alladhī
वो जिसने خَلَقَ पैदा किया khalaqa
पैदा किया ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों وَٱلْأَرْضَ और ज़मीन को wal-arḍa
और ज़मीन को بِقَـٰدِرٍ क़ादिर biqādirin
क़ादिर عَلَىٰٓ इस (बात) पर ʿalā
इस (बात) पर أَن कि an
कि يَخْلُقَ वो पैदा करे yakhluqa
वो पैदा करे مِثْلَهُم ۚ उनकी मानिन्द mith'lahum
उनकी मानिन्द بَلَىٰ क्यों नहीं balā
क्यों नहीं وَهُوَ और वो wahuwa
और वो ٱلْخَلَّـٰقُ सब कुछ पैदा करने वाला हैं l-khalāqu
सब कुछ पैदा करने वाला हैं ٱلْعَلِيمُ ख़ूब जानने वाला है l-ʿalīmu
ख़ूब जानने वाला है ٨١ (81)
(81)
तथा क्या वह (अल्लाह) जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया, इस बात का सामर्थ्य नहीं रखता कि उन जैसे और पैदा कर दे? क्यों नहीं, और वही सब कुछ पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है?
३६:८२
إِنَّمَآ
बेशक
innamā
बेशक أَمْرُهُۥٓ काम उसका amruhu
काम उसका إِذَآ जब idhā
जब أَرَادَ वो इरादा करता है arāda
वो इरादा करता है شَيْـًٔا किसी चीज़ का shayan
किसी चीज़ का أَن ये कि an
ये कि يَقُولَ वो कहता है yaqūla
वो कहता है لَهُۥ उसे lahu
उसे كُن हो जा kun
हो जा فَيَكُونُ तो वो हो जाती है fayakūnu
तो वो हो जाती है ٨٢ (82)
(82)
बेशक أَمْرُهُۥٓ काम उसका amruhu
काम उसका إِذَآ जब idhā
जब أَرَادَ वो इरादा करता है arāda
वो इरादा करता है شَيْـًٔا किसी चीज़ का shayan
किसी चीज़ का أَن ये कि an
ये कि يَقُولَ वो कहता है yaqūla
वो कहता है لَهُۥ उसे lahu
उसे كُن हो जा kun
हो जा فَيَكُونُ तो वो हो जाती है fayakūnu
तो वो हो जाती है ٨٢ (82)
(82)
उसका आदेश, जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो केवल यह होता है कि उससे कहता है "हो जा", तो वह हो जाती है।
३६:८३
فَسُبْحَـٰنَ
पस पाक है
fasub'ḥāna
पस पाक है ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो بِيَدِهِۦ हाथ में जिसके biyadihi
हाथ में जिसके مَلَكُوتُ बादशाहत है malakūtu
बादशाहत है كُلِّ हर kulli
हर شَىْءٍۢ चीज़ की shayin
चीज़ की وَإِلَيْهِ और तरफ़ उसीके wa-ilayhi
और तरफ़ उसीके تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे ٨٣ (83)
(83)
पस पाक है ٱلَّذِى वो जो alladhī
वो जो بِيَدِهِۦ हाथ में जिसके biyadihi
हाथ में जिसके مَلَكُوتُ बादशाहत है malakūtu
बादशाहत है كُلِّ हर kulli
हर شَىْءٍۢ चीज़ की shayin
चीज़ की وَإِلَيْهِ और तरफ़ उसीके wa-ilayhi
और तरफ़ उसीके تُرْجَعُونَ तुम लौटाए जाओगे tur'jaʿūna
तुम लौटाए जाओगे ٨٣ (83)
(83)
अतः पवित्र है वह (अल्लाह), जिसके हाथ में प्रत्येक चीज़ का राज्य (पूर्ण अधिकार) है और तुम सब उसी की ओर लौटाए1 जाओगे।