३६

यासीन

मक्की ८३ आयतें पारा २२
يس

सूरह यासीन (يس) पवित्र क़ुरआन का ३६ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ८३ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
३६:१
يسٓي سya-seen١
या, सीन।
३६:२
وَٱلْقُرْءَانِक़सम है क़ुरआनwal-qur'āniٱلْحَكِيمِहिकमत वाले कीl-ḥakīmi٢
क़सम है हिकमत वाले क़ुरआन की!
३६:३
إِنَّكَबेशक आपinnakaلَمِنَ(are) amonglaminaٱلْمُرْسَلِينَअलबत्ता रसूलों में से हैंl-mur'salīna٣
निःसंदेह आप रसूलों में से हैं।
३६:४
عَلَىٰऊपरʿalāصِرَٰطٍۢरास्तेṣirāṭinمُّسْتَقِيمٍۢसीधे केmus'taqīmin٤
सीधे रास्ते पर हैं।
३६:५
تَنزِيلَनाज़िल करदा हैtanzīlaٱلْعَزِيزِबहुत ज़बरदस्त काl-ʿazīziٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाले काl-raḥīmi٥
(यह) प्रभुत्वशाली, अति दयावान् (अल्लाह) का उतारा हुआ है।
३६:६
لِتُنذِرَताकि आप डराऐंlitundhiraقَوْمًۭاएक क़ौम कोqawmanمَّآनहींأُنذِرَडराए गएundhiraءَابَآؤُهُمْआबा ओ अजदाद उनकेābāuhumفَهُمْपस वोfahumغَـٰفِلُونَग़ाफिल हैंghāfilūna٦
ताकि आप उस जाति1 को डराएँ, जिनके बााप-दादा नहीं डराए गए थे। इसलिए वे ग़ाफ़िल हैं।
३६:७
لَقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadحَقَّसच हो गईḥaqqaٱلْقَوْلُबातl-qawluعَلَىٰٓuponʿalāأَكْثَرِهِمْउनकी अक्सरियत परaktharihimفَهُمْपस वोfahumلَا(do) notيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लाऐंगेyu'minūna٧
उनमें से अधिकतर लोगों पर बात1 सिद्ध हो चुकी है। अतः वे ईमान नहीं लाएँगे।
३६:८
إِنَّاबेशक हमinnāجَعَلْنَاडाल दिए हमनेjaʿalnāفِىٓonأَعْنَـٰقِهِمْउनकी गर्दनों मेंaʿnāqihimأَغْلَـٰلًۭاतौक़aghlālanفَهِىَतो वोfahiyaإِلَى(are up) toilāٱلْأَذْقَانِठोड़ियों तक हैंl-adhqāniفَهُمतो वोfahumمُّقْمَحُونَसर उठाए हुए हैंmuq'maḥūna٨
तथा हमने उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों से लगे हैं।1 इसलिए वे सिर ऊपर किए हुए हैं।
३६:९
وَجَعَلْنَاऔर बना दी हमनेwajaʿalnāمِنۢfromminبَيْنِbefore/betweenbayniأَيْدِيهِمْउनके सामने सेaydīhimسَدًّۭاएक दीवारsaddanوَمِنْand fromwaminخَلْفِهِمْऔर उनके पीछे सेkhalfihimسَدًّۭاएक दीवारsaddanفَأَغْشَيْنَـٰهُمْफिर ढाँप दिया हमने उन्हेंfa-aghshaynāhumفَهُمْपस वोfahumلَا(do) notيُبْصِرُونَनहीं वो देख पातेyub'ṣirūna٩
तथा हमने उनके आगे एक आड़ बना दी है और उनके पीछे एक आड़। फिर हमने उनको ढाँक दिया है। अतः वे1 देख ही नहीं पाते।
३६:१०
وَسَوَآءٌऔर बराबर हैwasawāonعَلَيْهِمْउन परʿalayhimءَأَنذَرْتَهُمْख़्वाह डराऐं आप उन्हेंa-andhartahumأَمْयाamلَمْनाlamتُنذِرْهُمْआप डराऐं उन्हेंtundhir'humلَاnotيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लाऐंगेyu'minūna١٠
और उनके लिए बराबर है, चाहे आप उन्हें डराएँ या न डराएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे।
३६:११
إِنَّمَاबेशकinnamāتُنذِرُआप तो डरा सकते हैंtundhiruمَنِउसे जोmaniٱتَّبَعَपैरवी करेittabaʿaٱلذِّكْرَनसीहत कीl-dhik'raوَخَشِىَऔर वो डरता होwakhashiyaٱلرَّحْمَـٰنَरहमान सेl-raḥmānaبِٱلْغَيْبِ ۖग़ाएबानाbil-ghaybiفَبَشِّرْهُपस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उसेfabashir'huبِمَغْفِرَةٍۢबख़्शिश कीbimaghfiratinوَأَجْرٍۢऔर अजर कीwa-ajrinكَرِيمٍइज़्ज़त वालेkarīmin١١
आप तो केवल उस व्यक्ति को डरा सकते हैं, जो इस ज़िक्र (क़ुरआन) का पालन करे, तथा बिन देखे रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) से डरे। तो आप उसे क्षमा तथा सम्मानजनक बदले की शुभ सूचना दे दें।
३६:१२
إِنَّاबेशक हमinnāنَحْنُहम हीnaḥnuنُحْىِहम ज़िन्दा करेंगेnuḥ'yīٱلْمَوْتَىٰमुर्दों कोl-mawtāوَنَكْتُبُऔर हम लिख रहे हैंwanaktubuمَاजोقَدَّمُوا۟उन्होंने आगे भेजाqaddamūوَءَاثَـٰرَهُمْ ۚऔर उनके आसार कोwaāthārahumوَكُلَّऔर हरwakullaشَىْءٍचीज़ कोshayinأَحْصَيْنَـٰهُशुमार कर रखा है हमने उसेaḥṣaynāhuفِىٓinإِمَامٍۢएक किताब मेंimāminمُّبِينٍۢजो वाज़ेह हैmubīnin١٢
निःसंदेह हम ही मुर्दों को जीवित करेंगे। तथा हम उनके कर्मों और उनके पद्चिह्नों1 को लिख रहे हैं। तथा प्रत्येक वस्तु को हमने स्पष्ट पुस्तक में दर्ज कर रखा है।
३६:१३
وَٱضْرِبْऔर बयान करोwa-iḍ'ribلَهُمउनके लिएlahumمَّثَلًاएक मिसालmathalanأَصْحَـٰبَ(of the) companionsaṣḥābaٱلْقَرْيَةِबस्ती वालों कीl-qaryatiإِذْजबidhجَآءَهَاआए उनके पासjāahāٱلْمُرْسَلُونَरसूलl-mur'salūna١٣
तथा आप उन्हें1 बस्ती वालों का एक उदाहरण दीजिए। जब वहाँ (अल्लाह के) भेजे हुए रसूल आए।
३६:१४
إِذْजबidhأَرْسَلْنَآभेजा हमनेarsalnāإِلَيْهِمُतरफ़ उनकेilayhimuٱثْنَيْنِदो कोith'nayniفَكَذَّبُوهُمَاतो उन्होंने झुठला दिया उन दोनों कोfakadhabūhumāفَعَزَّزْنَاतो क़ुव्वत दी हमनेfaʿazzaznāبِثَالِثٍۢसाथ तीसरे केbithālithinفَقَالُوٓا۟तो उन्होंने कहाfaqālūإِنَّآबेशक हमinnāإِلَيْكُمतरफ़ तुम्हारेilaykumمُّرْسَلُونَभेजे हुए हैंmur'salūna١٤
जब हमने उनकी ओर दो (रसूलों को) भेजा। तो उन्होंने उन दोनों को झुठला दिया। तब हमने तीसरे के द्वारा शक्ति पहुँचाई। तो तीनों ने कहा : निःसंदेह हम तुम्हारी ओर भेजे गए हैं।
३६:१५
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūمَآनहीं होأَنتُمْतुमantumإِلَّاमगरillāبَشَرٌۭएक इन्सानbasharunمِّثْلُنَاहमारी तरहmith'lunāوَمَآऔर नहींwamāأَنزَلَनाज़िल कीanzalaٱلرَّحْمَـٰنُरहमान नेl-raḥmānuمِنanyminشَىْءٍकोई चीज़shayinإِنْनहींinأَنتُمْतुमantumإِلَّاमगरillāتَكْذِبُونَतुम झूठ बोलते होtakdhibūna١٥
उन्होंने कहा : तुम सब तो हमारे ही जैसे मनुष्य1 हो, और अत्यंत दयावान् (अल्लाह) ने कुछ भी नहीं उतारा है। तुम तो बस झूठ बोल रहे हो।
३६:१६
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūرَبُّنَاरब हमाराrabbunāيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuإِنَّآबेशक हमinnāإِلَيْكُمْतरफ़ तुम्हारेilaykumلَمُرْسَلُونَअलबत्ता भेजे हुए हैंlamur'salūna١٦
उन रसूलों ने कहा : हमारा पालनहार जानता है कि हम निश्चय ही तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजे गए हैं।
३६:१७
وَمَاऔर नहींwamāعَلَيْنَآहम परʿalaynāإِلَّاमगरillāٱلْبَلَـٰغُपहुँचा देनाl-balāghuٱلْمُبِينُखुल्लम-खुल्लाl-mubīnu١٧
तथा हमारा दायित्व खुले तौर पर संदेश पहुँचा देने के सिवा और कुछ नहीं है।
३६:१८
قَالُوٓا۟उन्होंने कहाqālūإِنَّاबेशक हमinnāتَطَيَّرْنَاमनहूस समझा है हमनेtaṭayyarnāبِكُمْ ۖतुम्हेंbikumلَئِنअलबत्ता अगरla-inلَّمْनाlamتَنتَهُوا۟तुम बाज़ आएtantahūلَنَرْجُمَنَّكُمْअलबत्ता हम ज़रूर संगसार कर देंगे तुम्हेंlanarjumannakumوَلَيَمَسَّنَّكُمऔर अलबत्ता ज़रूर छुएगा तुम्हेंwalayamassannakumمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāعَذَابٌअज़ाबʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun١٨
उन लोगों ने कहा : हम तुम्हें अशुभ (मनहूस) समझते हैं। यदि तुम बाज़ नहीं आए, तो हम तुम्हें निश्चित रूप से पथराव करके मार डालेंगे और तुम्हें अवश्य ही हमारी ओर से दुःखदायी यातना पहुँचेगी।
३६:१९
قَالُوا۟उन्होंने कहाqālūطَـٰٓئِرُكُمनहूसत तुम्हारीṭāirukumمَّعَكُمْ ۚसाथ है तुम्हारेmaʿakumأَئِنक्या (इस लिए कि)a-inذُكِّرْتُم ۚनसीहत किए गए तुमdhukkir'tumبَلْबल्किbalأَنتُمْतुमantumقَوْمٌۭलोग होqawmunمُّسْرِفُونَहद से बढ़े हुएmus'rifūna١٩
उन लोगों ने कहा : तुम्हारा अपशकुन तुम्हारे ही साथ है। क्या इसलिए कि तुम्हें उपदेश दिया गया? बल्कि तुम उल्लंघनकारी लोग हो।
३६:२०
وَجَآءَऔर आयाwajāaمِنْfromminأَقْصَاपरले किनारे सेaqṣāٱلْمَدِينَةِशहर केl-madīnatiرَجُلٌۭएक शख़्सrajulunيَسْعَىٰदौड़ता हुआyasʿāقَالَबोलाqālaيَـٰقَوْمِऐ मेरी क़ौमyāqawmiٱتَّبِعُوا۟पैरवी करोittabiʿūٱلْمُرْسَلِينَइन रसूलों कीl-mur'salīna٢٠
तथा नगर के अंतिम किनारे से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! रसूलों का कहा मानो।
३६:२१
ٱتَّبِعُوا۟पैरवी करोittabiʿūمَنइनकी जोmanلَّا(do) notيَسْـَٔلُكُمْनहीं सवाल करते तुमसेyasalukumأَجْرًۭاकिसी अजर काajranوَهُمजब कि वोwahumمُّهْتَدُونَहिदायत याफ़्ता हैंmuh'tadūna٢١
तुम उनका अनुसरण करो, जो तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगते तथा वे सीधे मार्ग पर हैं।
३६:२२
وَمَاऔर क्या हैwamāلِىَमुझेliyaلَآ(that) notأَعْبُدُकि ना मैं इबादत करूँaʿbuduٱلَّذِىउसकी जिसनेalladhīفَطَرَنِىपैदा किया मुझेfaṭaranīوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसी केwa-ilayhiتُرْجَعُونَतुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna٢٢
तथा मुझे क्या हुआ है कि मैं उसकी इबादत न करूँ, जिसने मुझे पैदा किया है और तुम (सब) उसी की ओर लौटाए जाओगे?
३६:२३
ءَأَتَّخِذُक्या मैं बना लूँa-attakhidhuمِنbesides Himminدُونِهِۦٓउसके सिवा सेdūnihiءَالِهَةًकुछ इलाहālihatanإِنअगरinيُرِدْنِइरादा करे मेरे साथyurid'niٱلرَّحْمَـٰنُरहमानl-raḥmānuبِضُرٍّۢकिसी नुक़सान काbiḍurrinلَّاnotتُغْنِना काम आएगीtugh'niعَنِّىमुझेʿannīشَفَـٰعَتُهُمْशफ़ाअत उनकीshafāʿatuhumشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَاऔर नाwalāيُنقِذُونِवो बचा सकेंगे मुझेyunqidhūni٢٣
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरे पूज्य बना लूँ? यदि रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो उनकी सिफ़ारिश मुझे कुछ लाभ नहीं पहुँचा सकेगी और न वे मुझे बचा सकेंगे।
३६:२४
إِنِّىٓबेशक मैंinnīإِذًۭاतबidhanلَّفِىsurely would be inlafīضَلَـٰلٍۢअलबत्ता गुमराही में हूँगाḍalālinمُّبِينٍखुली-खुलीmubīnin٢٤
निःसंदेह मैं उस समय खुली गुमराही में हूँगा।
३६:२५
إِنِّىٓबेशक मैंinnīءَامَنتُईमान लाया मैंāmantuبِرَبِّكُمْतुम्हारे रब परbirabbikumفَٱسْمَعُونِपस सुनो मुझेfa-is'maʿūni٢٥
निःसंदेह मैं तुम्हारे पालनहार पर ईमान ले आया। अतः मेरी बात सुनो।
३६:२६
قِيلَकहा गयाqīlaٱدْخُلِदाख़िल हो जाओud'khuliٱلْجَنَّةَ ۖजन्नत मेंl-janataقَالَउसने कहाqālaيَـٰلَيْتَऐ काशyālaytaقَوْمِىमेरी क़ौम (के लोग)qawmīيَعْلَمُونَवो जान लेतेyaʿlamūna٢٦
(उससे) कहा गया : जन्नत में प्रवेश कर जा। उसने कहा : काश मेरी जाति भी जान लेती!
३६:२७
بِمَاबवजह उसके जोbimāغَفَرَhas forgivenghafaraلِىबख़्श दिया मुझेرَبِّىमेरे रब नेrabbīوَجَعَلَنِىऔर उसने बना दिया मुझेwajaʿalanīمِنَamongminaٱلْمُكْرَمِينَबाइज़्ज़त लोगों में सेl-muk'ramīna٢٧
कि मेरे पालनहार ने मुझे क्षमा1 कर दिया और मुझे सम्मानित लोगों में शामिल कर दिया।
३६:२८
۞ وَمَآऔर नहींwamāأَنزَلْنَاउतारा हमनेanzalnāعَلَىٰuponʿalāقَوْمِهِۦउसकी क़ौम परqawmihiمِنۢafter himminبَعْدِهِۦउसके बादbaʿdihiمِنanyminجُندٍۢकोई लश्करjundinمِّنَfromminaٱلسَّمَآءِआसमान सेl-samāiوَمَاऔर नाwamāكُنَّاथे हमkunnāمُنزِلِينَउतारने वालेmunzilīna٢٨
तथा हमने उसके पश्चात् उसकी जाति पर आकाश से कोई सेना नहीं उतारी और न हम उतारने वाले थे।1
३६:२९
إِنनाinكَانَتْथी वोkānatإِلَّاमगरillāصَيْحَةًۭचिंघाड़ṣayḥatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُمْवोhumخَـٰمِدُونَसब बुझ कर रह गएkhāmidūna٢٩
वह तो मात्र एक तेज़ आवाज़ (चिंघाड़) थी। फिर एकाएक वे बुझे हुए थे।1
३६:३०
يَـٰحَسْرَةًहाय अफ़सोसyāḥasratanعَلَىforʿalāٱلْعِبَادِ ۚबन्दों परl-ʿibādiمَاनहींيَأْتِيهِمआया उनके पासyatīhimمِّنanyminرَّسُولٍकोई रसूलrasūlinإِلَّاमगरillāكَانُوا۟थे वोkānūبِهِۦउसकाbihiيَسْتَهْزِءُونَवो मज़ाक़ उड़ातेyastahziūna٣٠
हाय अफसोस है1 बंदों पर! उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका उपहास किया करते थे।
३६:३१
أَلَمْक्या नहींalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawكَمْकितने हीkamأَهْلَكْنَاहलाक कर दिए हमनेahlaknāقَبْلَهُمउनसे पहलेqablahumمِّنَofminaٱلْقُرُونِउम्मतों में से(लोग)l-qurūniأَنَّهُمْबेशक वोannahumإِلَيْهِمْतरफ़ उनकेilayhimلَاwill not returnيَرْجِعُونَनहीं वो लौटेंगेyarjiʿūna٣١
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया कि वे उनकी ओर लौटकर नहीं आएँगे।
३६:३२
وَإِنऔर नहींwa-inكُلٌّۭवो सबkullunلَّمَّاमगरlammāجَمِيعٌۭसब के सबjamīʿunلَّدَيْنَاहमारे ही पासladaynāمُحْضَرُونَहाज़िर किए जाऐंगेmuḥ'ḍarūna٣٢
तथा वे जितने भी हैं सबके सब हमारे सामने उपस्थित किए जाएँगे।1
३६:३३
وَءَايَةٌۭऔर एक निशानी हैwaāyatunلَّهُمُउनके लिएlahumuٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuٱلْمَيْتَةُमुर्दाl-maytatuأَحْيَيْنَـٰهَاज़िन्दा किया हमने उसेaḥyaynāhāوَأَخْرَجْنَاऔर निकाला हमनेwa-akhrajnāمِنْهَاउससेmin'hāحَبًّۭاग़ल्लाḥabbanفَمِنْهُतो उससेfamin'huيَأْكُلُونَवो खाते हैंyakulūna٣٣
तथा उनके1 लिए एक बड़ी निशानी मृत भूमि है। हमने उसे जीवित किया और उससे अन्न निकाला। तो वे उसी में से खाते हैं।
३६:३४
وَجَعَلْنَاऔर बनाए हमनेwajaʿalnāفِيهَاउसमेंfīhāجَنَّـٰتٍۢबाग़ातjannātinمِّنofminنَّخِيلٍۢखजूरों केnakhīlinوَأَعْنَـٰبٍۢऔर अंगूरों केwa-aʿnābinوَفَجَّرْنَاऔर जारी किए हमनेwafajjarnāفِيهَاउसमेंfīhāمِنَofminaٱلْعُيُونِचश्मेl-ʿuyūni٣٤
तथा हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के कई बाग बनाए और उनमें कई जल स्रोत प्रवाहित कर दिए।
३६:३५
لِيَأْكُلُوا۟ताकि वो खाऐंliyakulūمِنofminثَمَرِهِۦउसके फल सेthamarihiوَمَاहालाँकि नहींwamāعَمِلَتْهُबनाया उसेʿamilathuأَيْدِيهِمْ ۖउनके हाथों नेaydīhimأَفَلَاक्या फिर नहींafalāيَشْكُرُونَवो शुक्र अदा करतेyashkurūna٣٥
ताकि वे उसके फल खाएँ, हालाँकि उसे उनके हाथों ने नहीं बनाया है। तो क्या वे आभार प्रकट नहीं करते?
३६:३६
سُبْحَـٰنَपाक हैsub'ḥānaٱلَّذِىवो जिसनेalladhīخَلَقَपैदा किएkhalaqaٱلْأَزْوَٰجَजोड़ेl-azwājaكُلَّهَاसब के सबkullahāمِمَّاउसमें से जोmimmāتُنۢبِتُउगाती हैtunbituٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuوَمِنْand ofwaminأَنفُسِهِمْऔर उनके अपने नफ़्सों में सेanfusihimوَمِمَّاऔर उसमें से जोwamimmāلَاnotيَعْلَمُونَनहीं वो जानतेyaʿlamūna٣٦
पवित्र है वह अस्तित्व जिसने सभी जोड़े पैदा किए, उन चीज़ों के भी जिन्हें धरती उगाती है, और स्वयं उन (मनुष्यों) के अपने भी, और उनके भी जिन्हें वे नहीं जानते।
३६:३७
وَءَايَةٌۭऔर एक निशानीwaāyatunلَّهُمُउनके लिएlahumuٱلَّيْلُरात हैal-layluنَسْلَخُहम खींच लेते हैंnaslakhuمِنْهُउससेmin'huٱلنَّهَارَदिन कोl-nahāraفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُمवोhumمُّظْلِمُونَअंधेरे में हो जाते हैंmuẓ'limūna٣٧
तथा एक निशानी उनके लिए रात है। जिससे हम दिन को खींच लेते हैं, तो एकाएक वे अंधेरे में हो जाते हैं।
३६:३८
وَٱلشَّمْسُऔर सूरजwal-shamsuتَجْرِىवो चल रहा हैtajrīلِمُسْتَقَرٍّۢठिकाने के लिएlimus'taqarrinلَّهَا ۚअपनेlahāذَٰلِكَयेdhālikaتَقْدِيرُअंदाज़ा हैtaqdīruٱلْعَزِيزِबहुत ज़बरदस्त काl-ʿazīziٱلْعَلِيمِख़ूब इल्म वाले काl-ʿalīmi٣٨
तथा सूर्य अपने नियत ठिकाने की ओर चला जा रहा है। यह प्रभुत्वशाली, सब कुछ जानने वाले (अल्लाह) का निर्धारित किया हुआ है।
३६:३९
وَٱلْقَمَرَऔर चाँदwal-qamaraقَدَّرْنَـٰهُमुक़र्रर कीं हमने उसकीqaddarnāhuمَنَازِلَमंज़िलेंmanāzilaحَتَّىٰयहाँ तक किḥattāعَادَवो दोबारा हो जाता हैʿādaكَٱلْعُرْجُونِखजूर की सूखी शाख़ की तरहkal-ʿur'jūniٱلْقَدِيمِजो पुरानी होl-qadīmi٣٩
तथा चाँद की हमने मंज़िलें निर्धारित कर दी हैं। यहाँ तक कि वह फिर खजूर की पुरानी सूखी टेढ़ी टहनी के समान हो जाता है।
३६:४०
لَاNotٱلشَّمْسُना सूरजl-shamsuيَنۢبَغِىलायक़ हैyanbaghīلَهَآउसके लिएlahāأَنकिanتُدْرِكَवो जा पकड़ेtud'rikaٱلْقَمَرَचाँद कोl-qamaraوَلَاऔर नाwalāٱلَّيْلُरातal-layluسَابِقُसबक़त ले जाने वाली हैंsābiquٱلنَّهَارِ ۚदिन सेl-nahāriوَكُلٌّۭऔर सब के सबwakullunفِىinفَلَكٍۢएक मदार मेंfalakinيَسْبَحُونَवो तैर रहे हैंyasbaḥūna٤٠
न तो सूर्य ही से हो सकता है कि चाँद को जा पकड़े और न रात ही दिन से पहले आने वाली है। और सब एक-एक कक्षा में तैर रहे हैं।
३६:४१
وَءَايَةٌۭऔर एक निशानी हैwaāyatunلَّهُمْउनके लिएlahumأَنَّاबेशक हमannāحَمَلْنَاसवार किया हमनेḥamalnāذُرِّيَّتَهُمْउनकी औलाद कोdhurriyyatahumفِىinٱلْفُلْكِकश्ती मेंl-ful'kiٱلْمَشْحُونِभरी हुईl-mashḥūni٤١
तथा उनके लिए एक निशानी (यह भी) है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई नाव में सवार किया।
३६:४२
وَخَلَقْنَاऔर पैदा कीं हमनेwakhalaqnāلَهُمउनके लिएlahumمِّنfromminمِّثْلِهِۦउस जैसी (चीज़ों ) सेmith'lihiمَاजिन परيَرْكَبُونَवो सवार होते हैंyarkabūna٤٢
तथा हमने उनके लिए उस (नाव) जैसी कई और चीज़ें बनाईं, जिनपर वे सवार होते हैं।
३६:४३
وَإِنऔर अगरwa-inنَّشَأْहम चाहेंnashaنُغْرِقْهُمْहम ग़र्क़ कर दें उन्हेंnugh'riq'humفَلَاतो नहींfalāصَرِيخَकोई फ़रियाद रसṣarīkhaلَهُمْउनके लिएlahumوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيُنقَذُونَवो बचाए जा सकेंगेyunqadhūna٤٣
और यदि हम चाहें, तो उन्हें डुबो दें। फिर न कोई उनकी फ़र्याद को पहुँचने वाला हो और न वे बचाए जाएँ।
३६:४४
إِلَّاसिवाएillāرَحْمَةًۭरहमत केraḥmatanمِّنَّاहमारी तरफ़ सेminnāوَمَتَـٰعًاऔर फ़ायदा देनाwamatāʿanإِلَىٰforilāحِينٍۢएक मुद्दत तकḥīnin٤٤
परंतु हमारी ओर से दया और एक समय तक लाभ पहुँचाने की वजह से।
३६:४५
وَإِذَاऔर जबwa-idhāقِيلَकहा जाता हैqīlaلَهُمُउन्हेंlahumuٱتَّقُوا۟डरोittaqūمَاउससे जोبَيْنَ(is) before youbaynaأَيْدِيكُمْतुम्हारे सामने हैaydīkumوَمَاऔर जोwamāخَلْفَكُمْतुम्हारे पीछे हैkhalfakumلَعَلَّكُمْताकि तुमlaʿallakumتُرْحَمُونَतुम रहम किए जाओtur'ḥamūna٤٥
और1 जब उनसे कहा जाता है कि उस (यातना) से डरो, जो तुम्हारे आगे है और जो तुम्हारे पीछे है, ताकि तुमपर दया की जाए।
३६:४६
وَمَاऔर नहींwamāتَأْتِيهِمआती उनके पासtatīhimمِّنْofminءَايَةٍۢकोई निशानीāyatinمِّنْfromminءَايَـٰتِनिशानियों में सेāyātiرَبِّهِمْउनके रब कीrabbihimإِلَّاमगरillāكَانُوا۟होते हैं वोkānūعَنْهَاउससेʿanhāمُعْرِضِينَऐराज़ करने वालेmuʿ'riḍīna٤٦
और उनके पास उनके पालनहार की निशानियों में से कोई निशानी नहीं आती परंतु वे उससे मुँह फेरने वाले होते हैं।
३६:४७
وَإِذَاऔर जबwa-idhāقِيلَकहा जाता हैqīlaلَهُمْउन्हेंlahumأَنفِقُوا۟ख़र्च करोanfiqūمِمَّاउसमें से जोmimmāرَزَقَكُمُरिज़्क़ दिया तुम्हेंrazaqakumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuقَالَकहते हैंqālaٱلَّذِينَवो जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūلِلَّذِينَउनसे जोlilladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाएāmanūأَنُطْعِمُक्या हम खिलाऐंanuṭ'ʿimuمَنउसको जिसेmanلَّوْअगरlawيَشَآءُचाहताyashāuٱللَّهُअल्लाहl-lahuأَطْعَمَهُۥٓवो खिला देता उसेaṭʿamahuإِنْनहींinأَنتُمْतुमantumإِلَّاमगरillāفِىinضَلَـٰلٍۢगुमराही मेंḍalālinمُّبِينٍۢखुली-खुलीmubīnin٤٧
तथा जब उनसे कहा जाता है कि उस धन में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है, तो काफ़िर लोग ईमान वालों से कहते हैं : क्या हम उसे खाना खिलाएँ, जिसे यदि अल्लाह चाहता, तो खिला देता? तुम तो खुली गुमराही में हो।
३६:४८
وَيَقُولُونَऔर वो कहते हैंwayaqūlūnaمَتَىٰकब होगाmatāهَـٰذَاयेhādhāٱلْوَعْدُवादाl-waʿduإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٤٨
तथा वे कहते हैं : यह (क़ियामत का) वादा कब पूरा होगा, यदि तुम सच्चे हो?
३६:४९
مَاनहींيَنظُرُونَवो इन्तिज़ार कर रहेyanẓurūnaإِلَّاमगरillāصَيْحَةًۭचिंघाड़ काṣayḥatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanتَأْخُذُهُمْवो पकड़ लेगी उन्हेंtakhudhuhumوَهُمْजब कि वोwahumيَخِصِّمُونَवो झगड़ रहे होंगेyakhiṣṣimūna٤٩
वे केवल एक चिंघाड़1 की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उन्हें आ पकड़ेगी, जबकि वे (आपस में) झगड़ रहे होंगे।
३६:५०
فَلَاपस नाfalāيَسْتَطِيعُونَवो इस्तिताअत रखते होंगेyastaṭīʿūnaتَوْصِيَةًۭवसीयत करने कीtawṣiyatanوَلَآऔर नाwalāإِلَىٰٓtoilāأَهْلِهِمْतरफ़ अपने घर वालों केahlihimيَرْجِعُونَवो पलट सकेंगेyarjiʿūna٥٠
फिर वे न कोई वसीयत कर सकेंगे और न अपने परिजनों की ओर वापस आ सकेंगे।
३६:५१
وَنُفِخَऔर फूँका जाएगाwanufikhaفِى[in]ٱلصُّورِसूर मेंl-ṣūriفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُمवोhumمِّنَfromminaٱلْأَجْدَاثِक़ब्रों सेl-ajdāthiإِلَىٰtoilāرَبِّهِمْतरफ़ अपने रब केrabbihimيَنسِلُونَवो तेज़ी से चल रहे होंगेyansilūna٥١
तथा सूर (नरसिंघा) में फूँक1 मारी जाएगी, तो एकाएक वे क़ब्रों से (निकलकर) अपने पालनहार की ओर दौड़ रहे होंगे।
३६:५२
قَالُوا۟वो कहेंगेqālūيَـٰوَيْلَنَاहाय अफ़सोस हम परyāwaylanāمَنۢकिसनेmanبَعَثَنَاउठा दिया हमेंbaʿathanāمِنfromminمَّرْقَدِنَا ۜ ۗहमारी ख़्वाबगाहों सेmarqadināهَـٰذَاये हैhādhāمَاवो जोوَعَدَवादा किया थाwaʿadaٱلرَّحْمَـٰنُरहमान नेl-raḥmānuوَصَدَقَऔर सच कहा थाwaṣadaqaٱلْمُرْسَلُونَरसूलों नेl-mur'salūna٥٢
वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! किसने हमें हमारी क़ब्रों से उठा दिया? यही है जो रहमान ने वादा किया था और रसूलों ने सच कहा था।
३६:५३
إِنनाinكَانَتْहोगी वोkānatإِلَّاमगरillāصَيْحَةًۭचिंघाड़ṣayḥatanوَٰحِدَةًۭएक हीwāḥidatanفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُمْवोhumجَمِيعٌۭसब के सबjamīʿunلَّدَيْنَاहमारे पासladaynāمُحْضَرُونَहाज़िर किए जाऐंगेmuḥ'ḍarūna٥٣
वह तो बस एक चिंघाड़ होगी, तो अचानक वे सब हमारे पास उपस्थित किए हुए होंगे।
३६:५४
فَٱلْيَوْمَतो आज के दिनfal-yawmaلَاnotتُظْلَمُना ज़ुल्म किया जाएगाtuẓ'lamuنَفْسٌۭकिसी नफ़्स परnafsunشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَاऔर नाwalāتُجْزَوْنَतुम बदला दिए जाओगेtuj'zawnaإِلَّاमगरillāمَاजोكُنتُمْथे तुमkuntumتَعْمَلُونَतुम अमल करतेtaʿmalūna٥٤
तो आज किसी प्राणी पर कुछ भी अत्याचार नहीं किया जाएगा और तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
३६:५५
إِنَّबेशकinnaأَصْحَـٰبَ(the) companionsaṣḥābaٱلْجَنَّةِजन्नत वालेl-janatiٱلْيَوْمَआज के दिनl-yawmaفِى[in]شُغُلٍۢमश्ग़लों मेंshughulinفَـٰكِهُونَख़ुश हो रहे होंगेfākihūna٥٥
निःसंदेह जन्नती लोग आज (नेमतों) का आनंद लेने में व्यस्त हैं।
३६:५६
هُمْवोhumوَأَزْوَٰجُهُمْऔर बीवियाँ उनकीwa-azwājuhumفِىinظِلَـٰلٍसायों मेंẓilālinعَلَىonʿalāٱلْأَرَآئِكِतख़्तों परl-arāikiمُتَّكِـُٔونَतकिया लगाए हुए होंगेmuttakiūna٥٦
वे तथा उनकी पत्नियाँ छायों में मस्नदों पर तकिया लगाए हुए हैं।
३६:५७
لَهُمْउनके लिएlahumفِيهَاउसमेंfīhāفَـٰكِهَةٌۭफल होंगेfākihatunوَلَهُمऔर उनके लिए होगाwalahumمَّاजोيَدَّعُونَवो तलब करेंगेyaddaʿūna٥٧
उनके लिए उसमें बहुत सारा फल है तथा उनके लिए वह कुछ है, जो वे माँग करेंगे।
३६:५८
سَلَـٰمٌۭसलामsalāmunقَوْلًۭاक़ौल होगाqawlanمِّنfromminرَّبٍّۢरब की तरफ़ सेrabbinرَّحِيمٍۢजो निहायत रहम करने वाला हैraḥīmin٥٨
सलाम हो। उस पालनहार की ओर से कहा जाएगा, जो अत्यंत दयावान् है।
३६:५९
وَٱمْتَـٰزُوا۟और अलग हो जाओwa-im'tāzūٱلْيَوْمَआज के दिनl-yawmaأَيُّهَاayyuhāٱلْمُجْرِمُونَमुजरिमोl-muj'rimūna٥٩
तथा ऐ अपराधियो! आज तुम अलग1 हो जाओ।
३६:६०
۞ أَلَمْक्या नहींalamأَعْهَدْमैं ने ताकीद की थीaʿhadإِلَيْكُمْतुम्हेंilaykumيَـٰبَنِىٓऐ बनीyābanīءَادَمَआदमādamaأَنकिanلَّا(do) notتَعْبُدُوا۟ना तुम इबादत करनाtaʿbudūٱلشَّيْطَـٰنَ ۖशैतान कीl-shayṭānaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuلَكُمْतुम्हाराlakumعَدُوٌّۭदुश्मन हैʿaduwwunمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun٦٠
ऐ आदम की संतान! क्या मैंने तुम्हें ताकीद1 नहीं की थी कि शैतान की उपासना न करना? निश्चय वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
३६:६१
وَأَنِऔर ये किwa-aniٱعْبُدُونِى ۚइबादत करो मेरीuʿ'budūnīهَـٰذَاयेhādhāصِرَٰطٌۭरास्ता हैṣirāṭunمُّسْتَقِيمٌۭसीधाmus'taqīmun٦١
तथा यह कि तुम मेरी ही इबादत करो। यही सीधा मार्ग है।
३६:६२
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadأَضَلَّउसने गुमराह कर दियाaḍallaمِنكُمْतुम में सेminkumجِبِلًّۭاमख़्लूक़ कोjibillanكَثِيرًا ۖबहुत सीkathīranأَفَلَمْक्या फिर नहींafalamتَكُونُوا۟थे तुमtakūnūتَعْقِلُونَतुम अक़्ल से काम लेतेtaʿqilūna٦٢
तथा उसने तुममें से बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तो क्या तुम समझते नहीं थे?
३६:६३
هَـٰذِهِۦये हैhādhihiجَهَنَّمُजहन्नमjahannamuٱلَّتِىवो जोallatīكُنتُمْथे तुमkuntumتُوعَدُونَतुम वादा किए जातेtūʿadūna٦٣
यही वह जहन्नम है, जिसका तुमसे वादा किया जाता था।
३६:६४
ٱصْلَوْهَاदाख़िल हो जाओ इसमेंiṣ'lawhāٱلْيَوْمَआज के दिनl-yawmaبِمَاबवजह उसके जोbimāكُنتُمْथे तुमkuntumتَكْفُرُونَतुम कुफ़्र करतेtakfurūna٦٤
आज उसमें प्रवेश कर जाओ, उस कुफ़्र के बदले जो तुम किया करते थे।
३६:६५
ٱلْيَوْمَआजal-yawmaنَخْتِمُहम मोहर लगा देंगेnakhtimuعَلَىٰٓ[on]ʿalāأَفْوَٰهِهِمْउनके मुँहों परafwāhihimوَتُكَلِّمُنَآऔर कलाम करेंगे हमसेwatukallimunāأَيْدِيهِمْहाथ उनकेaydīhimوَتَشْهَدُऔर गवाही देंगेwatashhaduأَرْجُلُهُمपाँव उनकेarjuluhumبِمَاबवजह उसके जोbimāكَانُوا۟थे वोkānūيَكْسِبُونَवो कमाई करतेyaksibūna٦٥
आज हम उनके मुँहों पर मुहर लगा देंगे और उनके हाथ हमसे बात करेंगे तथा उनके पैर उन कर्मों की गवाही देंगे, जो वे किया करते थे।1
३६:६६
وَلَوْऔर अगरwalawنَشَآءُहम चाहेंnashāuلَطَمَسْنَاअलबत्ता हम मिटा देंlaṭamasnāعَلَىٰٓ[over]ʿalāأَعْيُنِهِمْउनकी आँखों कोaʿyunihimفَٱسْتَبَقُوا۟पस वो दौड़ेंfa-is'tabaqūٱلصِّرَٰطَरास्ते (की तरफ़)l-ṣirāṭaفَأَنَّىٰतो कैसेfa-annāيُبْصِرُونَवो देख सकेंगेyub'ṣirūna٦٦
और यदि हम चाहें, तो निश्चय उनकी आँखें मिटा दें। फिर वे रास्ते की ओर दौड़ें, तो कैसे देखेंगे?
३६:६७
وَلَوْऔर अगरwalawنَشَآءُहम चाहेंnashāuلَمَسَخْنَـٰهُمْअलबत्ता मसख़ कर दें हम उन्हेंlamasakhnāhumعَلَىٰinʿalāمَكَانَتِهِمْउनकी जगहों परmakānatihimفَمَاतो नाfamāٱسْتَطَـٰعُوا۟वो इस्तिताअत रखते होंगेis'taṭāʿūمُضِيًّۭاचलने कीmuḍiyyanوَلَاऔर नाwalāيَرْجِعُونَवो पलट सकेंगेyarjiʿūna٦٧
और यदि हम चाहें, तो उनके स्थान ही पर उनके रूप को परिवर्तित कर दें, फिर वे न आगे जा सकें और न पीछे लौट सकें।
३६:६८
وَمَنऔर वो जोwamanنُّعَمِّرْهُहम उमर देते हैं उसेnuʿammir'huنُنَكِّسْهُहम उलटा देते हैं उसेnunakkis'huفِىinٱلْخَلْقِ ۖसाख़्त मेंl-khalqiأَفَلَاक्या भला नहींafalāيَعْقِلُونَवो अक़्ल रखतेyaʿqilūna٦٨
तथा जिसे हम दीर्घायु प्रदान करते हैं, उसे उसकी संरचना में उल्टा1 फेर देते हैं। तो क्या ये नहीं समझते?
३६:६९
وَمَاऔर नहींwamāعَلَّمْنَـٰهُसिखाया हमने उसेʿallamnāhuٱلشِّعْرَशेअरl-shiʿ'raوَمَاऔर नहींwamāيَنۢبَغِىवो ज़ेब देताyanbaghīلَهُۥٓ ۚउसेlahuإِنْनहीं हैinهُوَवोhuwaإِلَّاमगरillāذِكْرٌۭएक नसीहतdhik'runوَقُرْءَانٌۭऔर क़ुरआनwaqur'ānunمُّبِينٌۭवाज़ेहmubīnun٦٩
और हमने न उन्हें शे'र (काव्य)1 सिखाया है और न वह उनके योग्य है। वह तो सर्वथा उपदेश तथा स्पष्ट क़ुरआन के सिवा कुछ नहीं।
३६:७०
لِّيُنذِرَताकि वो डराएliyundhiraمَنउसे जोmanكَانَहैkānaحَيًّۭاज़िन्दाḥayyanوَيَحِقَّऔर साबित हो जाएwayaḥiqqaٱلْقَوْلُबातl-qawluعَلَىagainstʿalāٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों परl-kāfirīna٧٠
ताकि वह उसे डराए, जो जीवित हो1 तथा काफ़िरों पर (यातना की) बात सिद्ध हो जाए।
३६:७१
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَوْا۟उन्होंने देखाyarawأَنَّاबेशक हमannāخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāلَهُمउनके लिएlahumمِّمَّاउसमें से जोmimmāعَمِلَتْबनायाʿamilatأَيْدِينَآहमारे हाथों नेaydīnāأَنْعَـٰمًۭاमवेशियों कोanʿāmanفَهُمْतो वोfahumلَهَاउनकेlahāمَـٰلِكُونَमालिक हैंmālikūna٧١
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने अपने हाथों से बनाई हुई चीज़ों में से उनके लिए चौपाए पैदा किए, तो वे उनके मालिक हैं?
३६:७२
وَذَلَّلْنَـٰهَاऔर मुतीअ कर दिया हमने उन्हेंwadhallalnāhāلَهُمْउनके लिएlahumفَمِنْهَاतो उनमें से कुछfamin'hāرَكُوبُهُمْसवारियाँ हैं उनकीrakūbuhumوَمِنْهَاऔर उनमें से कुछwamin'hāيَأْكُلُونَवो खाते हैंyakulūna٧٢
तथा हमने उन्हें उनके वश में कर दिया, तो उनमें से कुछ उनकी सवारी हैं और उनमें से कुछ को वे खाते हैं।
३६:७३
وَلَهُمْऔर उनके लिएwalahumفِيهَاउनमेंfīhāمَنَـٰفِعُकई फ़ायदे हैंmanāfiʿuوَمَشَارِبُ ۖऔर पीने की चीज़ें हैंwamashāribuأَفَلَاक्या फिर नहींafalāيَشْكُرُونَवो शुक्र करतेyashkurūna٧٣
तथा उनके लिए उन (चौपायों) में कई लाभ और पीने की चीज़ें हैं। तो क्या (फिर भी) वे आभार प्रकट नहीं करते?
३६:७४
وَٱتَّخَذُوا۟और उन्होंने बना लिएwa-ittakhadhūمِنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiءَالِهَةًۭकई इलाहālihatanلَّعَلَّهُمْताकि वोlaʿallahumيُنصَرُونَवो मदद किए जाऐंyunṣarūna٧٤
और उन्होंने अल्लाह के सिवा कई पूज्य बना लिए, ताकि उनकी सहायता की जाए।
३६:७५
لَاNotيَسْتَطِيعُونَनहीं वो इस्तिताअत रखतेyastaṭīʿūnaنَصْرَهُمْउनकी मदद कीnaṣrahumوَهُمْबल्कि वो ख़ुदwahumلَهُمْउनके लिएlahumجُندٌۭलश्कर हैंjundunمُّحْضَرُونَहाज़िर किए गएmuḥ'ḍarūna٧٥
वे उनकी सहायता करने का सामर्थ्य नहीं रखते, तथा ये उनकी सेना हैं, जो उपस्थित1 किए हुए हैं।
३६:७६
فَلَاपस नाfalāيَحْزُنكَग़मगीन करे आपकोyaḥzunkaقَوْلُهُمْ ۘबात उनकीqawluhumإِنَّاबेशक हमinnāنَعْلَمُहम जानते हैंnaʿlamuمَاजो कुछيُسِرُّونَवो छुपाते हैंyusirrūnaوَمَاऔर जो कुछwamāيُعْلِنُونَवो ज़ाहिर करते हैंyuʿ'linūna٧٦
अतः उनकी बात आपको शोकग्रस्त न करे। निःसंदेह हम जानते हैं जो वे छिपाते हैं और जो वे प्रकट करते हैं।
३६:७७
أَوَلَمْक्या भला नहींawalamيَرَदेखाyaraٱلْإِنسَـٰنُइन्सान नेl-insānuأَنَّاबेशक हमannāخَلَقْنَـٰهُपैदा किया हमने उसेkhalaqnāhuمِنfromminنُّطْفَةٍۢनुत्फ़े सेnuṭ'fatinفَإِذَاतो यकायकfa-idhāهُوَवोhuwaخَصِيمٌۭझगड़ालू हैkhaṣīmunمُّبِينٌۭखुल्लम-खुल्लाmubīnun٧٧
क्या मनुष्य ने नहीं देखा कि हमने उसे वीर्य से पैदा किया? फिर अचानक वह खुला झगड़ालू बन बैठा।
३६:७८
وَضَرَبَऔर उसने बयान कीwaḍarabaلَنَاहमारे लिएlanāمَثَلًۭاमिसालmathalanوَنَسِىَऔर वो भूल गयाwanasiyaخَلْقَهُۥ ۖअपनी पैदाइश कोkhalqahuقَالَउसने कहाqālaمَنकौनmanيُحْىِज़िन्दा करेगाyuḥ'yīٱلْعِظَـٰمَहड्डियों कोl-ʿiẓāmaوَهِىَजबकि वोwahiyaرَمِيمٌۭबोसीदा हो चुकी होंगीramīmun٧٨
और उसने हमारे लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया, और अपनी रचना को भूल गया। उसने कहा : इन अस्थियों को कौन जीवित करेगा, जबकि वे जीर्ण-शीर्ण हो चुकी होंगी?
३६:७९
قُلْकह दीजिएqulيُحْيِيهَاज़िन्दा करेगा उन्हेंyuḥ'yīhāٱلَّذِىٓवो जिसनेalladhīأَنشَأَهَآपैदा किया उन्हेंansha-ahāأَوَّلَपहलीawwalaمَرَّةٍۢ ۖबारmarratinوَهُوَऔर वोwahuwaبِكُلِّहरbikulliخَلْقٍपैदाइश कोkhalqinعَلِيمٌख़ूब जानने वाला हैʿalīmun٧٩
आप कह दें : उन्हें वही (अल्लाह) जीवित करेगा, जिसने उन्हें प्रथम बार पैदा किया और वह प्रत्येक उत्पत्ति को भली-भाँति जानने वाला है।
३६:८०
ٱلَّذِىवो जिसनेalladhīجَعَلَबनायाjaʿalaلَكُمतुम्हारे लिएlakumمِّنَfromminaٱلشَّجَرِthe treel-shajariٱلْأَخْضَرِसरसबज़ दरख़्त सेl-akhḍariنَارًۭاआग कोnāranفَإِذَآतो यकायकfa-idhāأَنتُمतुमantumمِّنْهُउससेmin'huتُوقِدُونَतुम आग जलाते होtūqidūna٨٠
वह जिसने तुम्हारे लिए हरे वृक्ष से आग पैदा कर दी, फिर तुम उससे आग1 सुलगाते हो।
३६:८१
أَوَلَيْسَक्या भला नहीं हैawalaysaٱلَّذِىवो जिसनेalladhīخَلَقَपैदा कियाkhalaqaٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaبِقَـٰدِرٍक़ादिरbiqādirinعَلَىٰٓइस (बात) परʿalāأَنकिanيَخْلُقَवो पैदा करेyakhluqaمِثْلَهُم ۚउनकी मानिन्दmith'lahumبَلَىٰक्यों नहींbalāوَهُوَऔर वोwahuwaٱلْخَلَّـٰقُसब कुछ पैदा करने वाला हैंl-khalāquٱلْعَلِيمُख़ूब जानने वाला हैl-ʿalīmu٨١
तथा क्या वह (अल्लाह) जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया, इस बात का सामर्थ्य नहीं रखता कि उन जैसे और पैदा कर दे? क्यों नहीं, और वही सब कुछ पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है?
३६:८२
إِنَّمَآबेशकinnamāأَمْرُهُۥٓकाम उसकाamruhuإِذَآजबidhāأَرَادَवो इरादा करता हैarādaشَيْـًٔاकिसी चीज़ काshayanأَنये किanيَقُولَवो कहता हैyaqūlaلَهُۥउसेlahuكُنहो जाkunفَيَكُونُतो वो हो जाती हैfayakūnu٨٢
उसका आदेश, जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो केवल यह होता है कि उससे कहता है "हो जा", तो वह हो जाती है।
३६:८३
فَسُبْحَـٰنَपस पाक हैfasub'ḥānaٱلَّذِىवो जोalladhīبِيَدِهِۦहाथ में जिसकेbiyadihiمَلَكُوتُबादशाहत हैmalakūtuكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ कीshayinوَإِلَيْهِऔर तरफ़ उसीकेwa-ilayhiتُرْجَعُونَतुम लौटाए जाओगेtur'jaʿūna٨٣
अतः पवित्र है वह (अल्लाह), जिसके हाथ में प्रत्येक चीज़ का राज्य (पूर्ण अधिकार) है और तुम सब उसी की ओर लौटाए1 जाओगे।