४४

अद-दुख़ान

मक्की ५९ आयतें पारा २५
الدخان

सूरह अद-दुख़ान (الدخان) पवित्र क़ुरआन का ४४ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ५९ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
४४:१
حمٓح مhha-meem١
ह़ा, मीम।
४४:२
وَٱلْكِتَـٰبِBy the Bookwal-kitābiٱلْمُبِينِक़सम है वाज़ेह किताब कीl-mubīni٢
क़सम है स्पष्ट करने वाली पुस्तक की।
४४:३
إِنَّآबेशक हमinnāأَنزَلْنَـٰهُनाज़िल किया हमने उसेanzalnāhuفِىinلَيْلَةٍۢएक रात मेंlaylatinمُّبَـٰرَكَةٍ ۚबरकत वालीmubārakatinإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاहैं हमkunnāمُنذِرِينَडराने वालेmundhirīna٣
निःसंदेह हमने इसे1 एक बरकत वाली रात में उतारा है। निःसंदेह हम डराने वाले थे।
४४:४
فِيهَاउसमेंfīhāيُفْرَقُफ़ैसला किया जाता हैyuf'raquكُلُّहरkulluأَمْرٍकामamrinحَكِيمٍमोहकम काḥakīmin٤
इसी (रात) में प्रत्येक अटल मामले का निर्णय किया जाता है।
४४:५
أَمْرًۭاएक हुक्म काamranمِّنْfromminعِندِنَآ ۚहमारे पास सेʿindināإِنَّاबेशक हमinnāكُنَّاथे हमkunnāمُرْسِلِينَभेजने वालेmur'silīna٥
हमारी ओर से आदेश के कारण। निःसंदेह हम ही भेजने वाले थे।
४४:६
رَحْمَةًۭबतौर रहमतraḥmatanمِّنfromminرَّبِّكَ ۚआपके रब की तरफ़ सेrabbikaإِنَّهُۥबेशकinnahuهُوَवो ही हैhuwaٱلسَّمِيعُख़ूब सुनने वालाl-samīʿuٱلْعَلِيمُख़ूब इल्म वालाl-ʿalīmu٦
आपके पालनहार की दया के कारण। निश्चय वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
४४:७
رَبِّरब हैrabbiٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन काwal-arḍiوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَآ ۖदर्मियान है उन दोनों केbaynahumāإِنअगरinكُنتُمहो तुमkuntumمُّوقِنِينَयक़ीन करने वालेmūqinīna٧
जो आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का पालनहार है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
४४:८
لَآनहींإِلَـٰهَकोई इलाह (बरहक़)ilāhaإِلَّاमगरillāهُوَवो हीhuwaيُحْىِۦवो ज़िन्दा करता हैyuḥ'yīوَيُمِيتُ ۖऔर वो मौत देता हैwayumītuرَبُّكُمْरब तुम्हाराrabbukumوَرَبُّऔर रबwarabbuءَابَآئِكُمُतुम्हारे आबा ओ अजदाद काābāikumuٱلْأَوَّلِينَजो पहले थेl-awalīna٨
उसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवित करता और मारता है। तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादाओं का पालनहार है।
४४:९
بَلْबल्किbalهُمْवोhumفِى(are) inشَكٍّۢशक मेंshakkinيَلْعَبُونَवो खेल रहे हैंyalʿabūna٩
बल्कि वे संदेह में पड़े खेल रहे हैं।
४४:१०
فَٱرْتَقِبْपस इन्तज़ार कीजिएfa-ir'taqibيَوْمَजिस दिनyawmaتَأْتِىआएगाtatīٱلسَّمَآءُआसमानl-samāuبِدُخَانٍۢसाथ धुएँ केbidukhāninمُّبِينٍۢखुलेmubīnin١٠
तो आप उस दिन की प्रतीक्षा करें, जब आकाश प्रत्यक्ष धुआँ1 लाएगा।
४४:११
يَغْشَىजो ढाँप लेगाyaghshāٱلنَّاسَ ۖलोगों कोl-nāsaهَـٰذَاये हैhādhāعَذَابٌअज़ाबʿadhābunأَلِيمٌۭदर्दनाकalīmun١١
जो लोगों को ढाँप लेगा। यह दुःखदायी यातना है।
४४:१२
رَّبَّنَاऐ हमारे रबrabbanāٱكْشِفْहटा देik'shifعَنَّاहम सेʿannāٱلْعَذَابَअज़ाब कोl-ʿadhābaإِنَّاबेशक हमinnāمُؤْمِنُونَईमान लाने वाले हैंmu'minūna١٢
ऐ हमारे पालनहार! हमसे यह यातना दूर कर दे। निःसंदेह हम ईमान लाने वाले हैं।
४४:१३
أَنَّىٰकहाँ से हैannāلَهُمُउनके लिएlahumuٱلذِّكْرَىٰनसीहतl-dhik'rāوَقَدْहालाँकि तहक़ीक़waqadجَآءَهُمْआ चुका उनके पासjāahumرَسُولٌۭएक रसूलrasūlunمُّبِينٌۭवाज़ेह करने वालाmubīnun١٣
उनके लिए नसीहत कहाँ? हालाँकि, निश्चित रूप से उनके पास स्पष्ट करने वाला रसूल आ चुका।
४४:१४
ثُمَّफिरthummaتَوَلَّوْا۟वो मुँह मोड़ गएtawallawعَنْهُउससेʿanhuوَقَالُوا۟और उन्होंने कहाwaqālūمُعَلَّمٌۭसिखाया पढ़ायाmuʿallamunمَّجْنُونٌदीवाना हैmajnūnun١٤
फिर उन्होंने उससे मुँह फेर लिया और उन्होंने कहा : यह तो सिखाया हुआ है, यह पागल है।
४४:१५
إِنَّاबेशक हमinnāكَاشِفُوا۟हटाने वाले हैंkāshifūٱلْعَذَابِअज़ाब कोl-ʿadhābiقَلِيلًا ۚथोड़ी देर के लिएqalīlanإِنَّكُمْबेशक तुमinnakumعَآئِدُونَलौटने वाले होʿāidūna١٥
निःसंदेह हम इस यातना को थोड़ी देर के लिए दूर करने वाले हैं। (परंतु) निःसंदेह तुम फिर वही कुछ करने वाले हो।
४४:१६
يَوْمَजिस दिनyawmaنَبْطِشُहम पकड़ेंगेnabṭishuٱلْبَطْشَةَपकड़l-baṭshataٱلْكُبْرَىٰٓबहुत बड़ीl-kub'rāإِنَّاबेशक हमinnāمُنتَقِمُونَइन्तक़ाम लेने वाले हैंmuntaqimūna١٦
जिस दिन हम बड़ी पकड़1 पकड़ेंगे, निःसंदेह हम बदला लेने वाले हैं।
४४:१७
۞ وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadفَتَنَّاआज़माया हमनेfatannāقَبْلَهُمْउनसे क़ब्लqablahumقَوْمَक़ौमेqawmaفِرْعَوْنَफ़िरऔन कोfir'ʿawnaوَجَآءَهُمْऔर आया उनके पासwajāahumرَسُولٌۭरसूलrasūlunكَرِيمٌमुअज़िज़karīmun١٧
तथा निःसंदेह हमने इनसे पूर्व फ़िरऔन की जाति की परीक्षा ली तथा उनके पास एक अति सम्मानित रसूल आया।
४४:१८
أَنْये किanأَدُّوٓا۟हवाले कर दोaddūإِلَىَّमेरी तरफ़ilayyaعِبَادَबन्दों कोʿibādaٱللَّهِ ۖअल्लाह केl-lahiإِنِّىबेशक मैंinnīلَكُمْतुम्हारे लिएlakumرَسُولٌएक रसूल हूँrasūlunأَمِينٌۭअमानतदारamīnun١٨
यह कि अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
४४:१९
وَأَنऔर ये किwa-anلَّا(do) notتَعْلُوا۟ना तुम सरकशी करोtaʿlūعَلَىagainstʿalāٱللَّهِ ۖअल्लाह (के मुक़ाबले) परl-lahiإِنِّىٓबेशक मैंinnīءَاتِيكُمलाया हूँ तुम्हारे पासātīkumبِسُلْطَـٰنٍۢदलीलbisul'ṭāninمُّبِينٍۢवाज़ेहmubīnin١٩
तथा यह कि अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, निःसंदेह मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाने वाला हूँ।
४४:२०
وَإِنِّىऔर बेशक मैंwa-innīعُذْتُपनाह ले चुका मैंʿudh'tuبِرَبِّىअपने रब कीbirabbīوَرَبِّكُمْऔर तुम्हारे रब कीwarabbikumأَنकिanتَرْجُمُونِतुम संगसार करो मुझेtarjumūni٢٠
तथा निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की इससे शरण ली है कि तुम मुझपर पथराव कर मेरी जान ले लो।
४४:२१
وَإِنऔर अगरwa-inلَّمْनहींlamتُؤْمِنُوا۟तुम ईमान लातेtu'minūلِىमुझ परفَٱعْتَزِلُونِतो अलग हो जाओ मुझसेfa-iʿ'tazilūni٢١
और अगर तुम मेरी बात नहीं मानते, तो मुझसे दूर रहो।
४४:२२
فَدَعَاतो उसने पुकाराfadaʿāرَبَّهُۥٓअपने रब कोrabbahuأَنَّबेशकannaهَـٰٓؤُلَآءِयेhāulāiقَوْمٌۭलोगqawmunمُّجْرِمُونَमुजरिम हैंmuj'rimūna٢٢
अंततः उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह ये अपराधी लोग हैं।
४४:२३
فَأَسْرِतो ले चलोfa-asriبِعِبَادِىमेरे बन्दों कोbiʿibādīلَيْلًاरातों रातlaylanإِنَّكُمबेशक तुमinnakumمُّتَّبَعُونَपीछा किए जाने वाले होmuttabaʿūna٢٣
अतः तुम मेरे बंदों को लेकर रातों-रात चले जाओ। निःसंदेह तुम्हारा पीछा किया जाएगा।
४४:२४
وَٱتْرُكِऔर छोड़ दोwa-ut'rukiٱلْبَحْرَसमुन्दर कोl-baḥraرَهْوًا ۖसाकिनrahwanإِنَّهُمْबेशक वोinnahumجُندٌۭलश्कर हैंjundunمُّغْرَقُونَग़र्क़ किए जाने वालेmugh'raqūna٢٤
तथा सागर को अपनी दशा पर ठहरा हुआ छोड़ दे। निःसंदेह वे एक ऐसी सेना हैं, जो डुबोए जाने वाले हैं।
४४:२५
كَمْकितने हीkamتَرَكُوا۟वो छोड़ गएtarakūمِنofminجَنَّـٰتٍۢबाग़ातjannātinوَعُيُونٍۢऔर चश्मेwaʿuyūnin٢٥
वे कितने ही बाग़ और जल स्रोत छोड़ गए।
४४:२६
وَزُرُوعٍۢऔर खेतियाँwazurūʿinوَمَقَامٍۢऔर मक़ामwamaqāminكَرِيمٍۢउमदाkarīmin٢٦
तथा खेतियाँ और बढ़िया स्थान।
४४:२७
وَنَعْمَةٍۢऔर राहत व आसाइशwanaʿmatinكَانُوا۟थे वोkānūفِيهَاजिसमेंfīhāفَـٰكِهِينَऐश करने वालेfākihīna٢٧
तथा सुख-सामग्री, जिनमें वे आनंद ले रहे थे।
४४:२८
كَذَٰلِكَ ۖइसी तरहkadhālikaوَأَوْرَثْنَـٰهَاऔर वारिस बना दिया हमने उनकाwa-awrathnāhāقَوْمًاक़ौमqawmanءَاخَرِينَदूसरीākharīna٢٨
ऐसा ही हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी दूसरे1 लोगों को बना दिया।
४४:२९
فَمَاतो नाfamāبَكَتْरोएbakatعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلسَّمَآءُआसमानl-samāuوَٱلْأَرْضُऔर ज़मीनwal-arḍuوَمَاऔर नाwamāكَانُوا۟थे वोkānūمُنظَرِينَमोहलत दिए जाने वालेmunẓarīna٢٩
फिर न उनपर आकाश और धरती रोए और न वे मोहलत पाने वाले हुए।
४४:३०
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadنَجَّيْنَاनिजात दी हमनेnajjaynāبَنِىٓ(the) Children of Israelbanīإِسْرَٰٓءِيلَबनी इस्राईल कोis'rāīlaمِنَfromminaٱلْعَذَابِअज़ाब सेl-ʿadhābiٱلْمُهِينِज़िल्लत केl-muhīni٣٠
तथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को अपमानकारी यातना से बचा लिया।
४४:३१
مِنFromminفِرْعَوْنَ ۚफ़िरऔन सेfir'ʿawnaإِنَّهُۥबेशक वोinnahuكَانَथा वोkānaعَالِيًۭاसरकशʿāliyanمِّنَamongminaٱلْمُسْرِفِينَहद से बढ़ने वालों में सेl-mus'rifīna٣١
फ़िरऔन से। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों में से एक सरकश व्यक्ति था।
४४:३२
وَلَقَدِऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadiٱخْتَرْنَـٰهُمْमुन्तख़ब कर लिया हमने उन्हेंikh'tarnāhumعَلَىٰbyʿalāعِلْمٍइल्म की बिना परʿil'minعَلَىoverʿalāٱلْعَـٰلَمِينَतमाम जहानों परl-ʿālamīna٣٢
तथा निःसंदेह हमने उन्हें ज्ञान के आधार पर संसार वासियों पर चुन लिया।
४४:३३
وَءَاتَيْنَـٰهُمऔर दीं हमने उन्हेंwaātaynāhumمِّنَofminaٱلْـَٔايَـٰتِनिशानियाँl-āyātiمَاजोفِيهِउनमेंfīhiبَلَـٰٓؤٌۭا۟आज़माइश थीbalāonمُّبِينٌवाज़ेहmubīnun٣٣
तथा हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ प्रदान कीं, जिनमें खुली परीछा थी।
४४:३४
إِنَّबेशकinnaهَـٰٓؤُلَآءِये लोगhāulāiلَيَقُولُونَअलबत्ता वो कहते हैंlayaqūlūna٣٤
निःसंदेह ये1 लोग निश्चय कहते हैं।
४४:३५
إِنْनहींinهِىَयेhiyaإِلَّاमगरillāمَوْتَتُنَاमौत हमारीmawtatunāٱلْأُولَىٰपहलीl-ūlāوَمَاऔर नहींwamāنَحْنُहमnaḥnuبِمُنشَرِينَउठाए जाने वालेbimunsharīna٣٥
कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।
४४:३६
فَأْتُوا۟पस ले आओfatūبِـَٔابَآئِنَآहमारे आबा ओ अजदाद कोbiābāināإِنअगरinكُنتُمْहो तुमkuntumصَـٰدِقِينَसच्चेṣādiqīna٣٦
तो तुम हमारे बाप-दादा को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो?
४४:३७
أَهُمْक्या वोahumخَيْرٌबेहतर हैंkhayrunأَمْयाamقَوْمُक़ौमqawmuتُبَّعٍۢतुब्बअ कीtubbaʿinوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaمِنbefore themminقَبْلِهِمْ ۚउनसे पहले थेqablihimأَهْلَكْنَـٰهُمْ ۖहलाक कर दिया हमने उन्हेंahlaknāhumإِنَّهُمْबेशक वोinnahumكَانُوا۟थे वोkānūمُجْرِمِينَमुजरिमmuj'rimīna٣٧
क्या ये लोग बेहतर हैं, अथवा तुब्बा' की जाति1 तथा वे लोग जो उनसे पूर्व थे? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह वे अपराधी थे।
४४:३८
وَمَاऔर नहींwamāخَلَقْنَاपैदा किया हमनेkhalaqnāٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानोंl-samāwātiوَٱلْأَرْضَऔर ज़मीन कोwal-arḍaوَمَاऔर जोwamāبَيْنَهُمَاदर्मियान है उन दोनों केbaynahumāلَـٰعِبِينَखेलते हुएlāʿibīna٣٨
और हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया है।
४४:३९
مَاनहींخَلَقْنَـٰهُمَآपैदा किया हमने उन दोनों कोkhalaqnāhumāإِلَّاमगरillāبِٱلْحَقِّसाथ हक़ केbil-ḥaqiوَلَـٰكِنَّऔर लेकिनwalākinnaأَكْثَرَهُمْअक्सर उनकेaktharahumلَا(do) notيَعْلَمُونَनहीं वो इल्म रखतेyaʿlamūna٣٩
हमने उन दोनों को सत्य ही के साथ पैदा किया है, किंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।
४४:४०
إِنَّबेशकinnaيَوْمَदिनyawmaٱلْفَصْلِफ़ैसले काl-faṣliمِيقَـٰتُهُمْवक़्त मुक़र्रर है उनकाmīqātuhumأَجْمَعِينَसब के सब काajmaʿīna٤٠
निश्चय फ़ैसले1 का दिन उन सब का नियत समय है।
४४:४१
يَوْمَजिस दिनyawmaلَاnotيُغْنِىना काम आएगाyugh'nīمَوْلًىकोई दोस्तmawlanعَنforʿanمَّوْلًۭىकिसी दोस्त केmawlanشَيْـًۭٔاकुछ भीshayanوَلَاऔर नाwalāهُمْवोhumيُنصَرُونَवो मदद किए जाऐंगेyunṣarūna٤١
जिस दिन कोई साथी किसी साथी के कुछ काम न आएगा और न उनकी सहायता की जाएगी।
४४:४२
إِلَّاमगरillāمَنजिस परmanرَّحِمَरहम फ़रमायraḥimaٱللَّهُ ۚअल्लाहl-lahuإِنَّهُۥयक़ीननinnahuهُوَवो ही हैhuwaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلرَّحِيمُनिहायत रहम करने वालाl-raḥīmu٤٢
किंतु जिसपर अल्लाह ने दया की, निःसंदेह वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।
४४:४३
إِنَّबेशकinnaشَجَرَتَदरख़्तshajarataٱلزَّقُّومِजक़्क़ूम काl-zaqūmi٤٣
निःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का वृक्ष।
४४:४४
طَعَامُखाना हैṭaʿāmuٱلْأَثِيمِगुनहगार काl-athīmi٤٤
पापी का भोजन है।
४४:४५
كَٱلْمُهْلِपिघले हुए ताँबे की तरहkal-muh'liيَغْلِىजोश खाएगाyaghlīفِىinٱلْبُطُونِपेटों मेंl-buṭūni٤٥
पिघले हुए ताँबे (या तलछट) की तरह, पेटों में खौलता है।
४४:४६
كَغَلْىِमानिन्द जोश खानेkaghalyiٱلْحَمِيمِखौलते पानी केl-ḥamīmi٤٦
गर्म पानी के खौलने की तरह।
४४:४७
خُذُوهُ(कहा जाएगा) पकड़ो उसेkhudhūhuفَٱعْتِلُوهُपस घसीटो उसेfa-iʿ'tilūhuإِلَىٰतरफ़ilāسَوَآءِदर्मियानsawāiٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi٤٧
इसे पकड़ो, फिर इसे धधकती आग के बीच तक घसीटकर ले जाओ।
४४:४८
ثُمَّफिरthummaصُبُّوا۟उन्डेल दोṣubbūفَوْقَऊपरfawqaرَأْسِهِۦउसके सिर केrasihiمِنْofminعَذَابِअज़ाब सेʿadhābiٱلْحَمِيمِखौलते पानी केl-ḥamīmi٤٨
फिर खौलते हुए पानी की कुछ यातना उसके सिर पर उँडेल दो।1
४४:४९
ذُقْ(कहा जाऐगा) चखोdhuqإِنَّكَबेशक तुमinnakaأَنتَतुम हीantaٱلْعَزِيزُबहुत ज़बरदस्तl-ʿazīzuٱلْكَرِيمُइज़्ज़त वाले थेl-karīmu٤٩
चख, निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है जो बड़ा बलशाली और सम्माननीय है।
४४:५०
إِنَّबेशकinnaهَـٰذَاये हैhādhāمَاवो जोكُنتُمथे तुमkuntumبِهِۦउसमेंbihiتَمْتَرُونَतुम शक करते थेtamtarūna٥٠
निःसंदे यह वही है जिसके बारे में तुम संदेह करते थे।
४४:५१
إِنَّबेशकinnaٱلْمُتَّقِينَमुत्तक़ी लोगl-mutaqīnaفِى(will be) inمَقَامٍजगह पर होंगेmaqāminأَمِينٍۢअमन वालीamīnin٥١
निःसंदेह परहेज़गार लोग शांति एवं सुरक्षा वाली जगह में होंगे।
४४:५२
فِىInجَنَّـٰتٍۢबाग़ों मेंjannātinوَعُيُونٍۢऔर चश्मों मेंwaʿuyūnin٥٢
बाग़ों तथा जल स्रोतों में।
४४:५३
يَلْبَسُونَवो पहनेंगेyalbasūnaمِنofminسُندُسٍۢबारीक रेशम सेsundusinوَإِسْتَبْرَقٍۢऔर मोटे रेशम सेwa-is'tabraqinمُّتَقَـٰبِلِينَआमने-सामने बैठने वालेmutaqābilīna٥٣
वे बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहनेंगे, आमने-सामने बैठे होंगे।
४४:५४
كَذَٰلِكَइसी तरहkadhālikaوَزَوَّجْنَـٰهُمऔर ब्याह देंगे हम उन्हेंwazawwajnāhumبِحُورٍगोरी औरतों सेbiḥūrinعِينٍۢबड़ी आँखों वालीʿīnin٥٤
ऐसा ही होगा और हम उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर देंगे, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली होंगी।
४४:५५
يَدْعُونَवो तलब करेंगेyadʿūnaفِيهَاउसमेंfīhāبِكُلِّहर क़िस्म केbikulliفَـٰكِهَةٍफलfākihatinءَامِنِينَबेख़ौफ़ हो करāminīna٥٥
वे उसमें निश्चिंत होकर हर प्रकार के फल मंगवाएँगे।
४४:५६
لَاNotيَذُوقُونَना वो चखेंगेyadhūqūnaفِيهَاउसमेंfīhāٱلْمَوْتَमौत कोl-mawtaإِلَّاसिवायillāٱلْمَوْتَةَमौतl-mawtataٱلْأُولَىٰ ۖपहली केl-ūlāوَوَقَىٰهُمْऔर वो बचा लेगा उन्हेंwawaqāhumعَذَابَअज़ाब सेʿadhābaٱلْجَحِيمِजहन्नम केl-jaḥīmi٥٦
वे उसमें मृत्यु1 का स्वाद नहीं चखेंगे, परंतु वह मृत्यु जो पहली थी, और वह (अल्लाह) उन्हें दहकती हुई आग के अज़ाब से बचा लेगा।
४४:५७
فَضْلًۭاफ़ज़ल हैfaḍlanمِّنfromminرَّبِّكَ ۚआपके रब की तरफ़ सेrabbikaذَٰلِكَयहीdhālikaهُوَवोhuwaٱلْفَوْزُकामयाबी हैl-fawzuٱلْعَظِيمُबहुत बड़ीl-ʿaẓīmu٥٧
आपके पालनहार की ओर से अनुग्रह के कारण। यही बहुत बड़ी सफलता है।
४४:५८
فَإِنَّمَاपस बेशकfa-innamāيَسَّرْنَـٰهُआसान कर दिया हमने उसेyassarnāhuبِلِسَانِكَआपकी ज़बान परbilisānikaلَعَلَّهُمْशायद कि वोlaʿallahumيَتَذَكَّرُونَवो नसीहत पकड़ेंyatadhakkarūna٥٨
सो तथ्य यही है कि हमने इसे आपकी भाषा में आसान कर दिया है, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।
४४:५९
فَٱرْتَقِبْपस इन्तज़ार कीजिएfa-ir'taqibإِنَّهُمबेशक वो (भी)innahumمُّرْتَقِبُونَइन्तज़ार करने वाले हैंmur'taqibūna٥٩
अतः आप प्रतीक्षा करें, निःसंदेह वे भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।