३३

अल-अहज़ाब

मदनी ७३ आयतें पारा २१
الأحزاب

सूरह अल-अहज़ाब (الأحزاب) पवित्र क़ुरआन का ३३ वाँ अध्याय है — यह एक मदनी सूरह है जिसमें ७३ आयतें हैं। मदनी सूरहें प्रवास के बाद उतरीं और प्रायः इबादत, क़ानून और मुस्लिम समाज के जीवन से संबंधित हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
३३:१
يَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuٱتَّقِडरिएittaqiٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَلَاऔर नाwalāتُطِعِआप इताअत कीजिएtuṭiʿiٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरोंl-kāfirīnaوَٱلْمُنَـٰفِقِينَ ۗमुनाफ़िक़ों कीwal-munāfiqīnaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaكَانَहैkānaعَلِيمًاबहुत इल्म वालाʿalīmanحَكِيمًۭاख़ूब हिकमत वालाḥakīman١
ऐ नबी! अल्लाह से डरें, और काफ़िरों तथा मुनाफ़िक़ों का कहना न मानें। निश्चय अल्लाह सब कुछ जानने वाला, बड़ी हिकमत वाला है।1
३३:२
وَٱتَّبِعْऔर पैरवी कीजिएwa-ittabiʿمَاउसकी जोيُوحَىٰٓवही की जातीyūḥāإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaمِنfromminرَّبِّكَ ۚआपके रब की तरफ़ सेrabbikaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaكَانَहैkānaبِمَاउसकी जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaخَبِيرًۭاख़ूब ख़बर रखने वालाkhabīran٢
तथा उसका अनुसरण करें, जो आपके पालनहार की तरफ से आपकी ओर वह़्य की जा रही है। निश्चय अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखने वाला है, जो तुम कर रहे हो।
३३:३
وَتَوَكَّلْऔर तवकक्कल कीजिएwatawakkalعَلَىinʿalāٱللَّهِ ۚअल्लाह परl-lahiوَكَفَىٰऔर काफ़ी हैwakafāبِٱللَّهِअल्लाहbil-lahiوَكِيلًۭاकारसाज़wakīlan٣
और अल्लाह पर भरोसा रखें तथा अल्लाह संरक्षक के रूप में काफ़ी है।
३३:४
مَّاनहींجَعَلَबनाएjaʿalaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلِرَجُلٍۢकिसी शख़्स के लिएlirajulinمِّن[of]minقَلْبَيْنِदो दिलqalbayniفِىinجَوْفِهِۦ ۚउसके सीने मेंjawfihiوَمَاऔर नहींwamāجَعَلَउसने बनायाjaʿalaأَزْوَٰجَكُمُतुम्हारी बीवियों कोazwājakumuٱلَّـٰٓـِٔىवो जोallāīتُظَـٰهِرُونَतुम ज़िहार करते होtuẓāhirūnaمِنْهُنَّजिनसेmin'hunnaأُمَّهَـٰتِكُمْ ۚमाँऐं तुम्हारीummahātikumوَمَاऔर नहींwamāجَعَلَउसने बनायाjaʿalaأَدْعِيَآءَكُمْतुम्हारे मुँह बोले बेटों कोadʿiyāakumأَبْنَآءَكُمْ ۚबेटे तुम्हारेabnāakumذَٰلِكُمْयेdhālikumقَوْلُكُمबात है तुम्हारीqawlukumبِأَفْوَٰهِكُمْ ۖतुम्हारे मुँहों सेbi-afwāhikumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَقُولُफ़रमाता हैyaqūluٱلْحَقَّहक़l-ḥaqaوَهُوَऔर वो हीwahuwaيَهْدِىवो रहनुमाई करता हैyahdīٱلسَّبِيلَरास्ते कीl-sabīla٤
अल्लाह ने किसी व्यक्ति के लिए उसके सीने में दो दिल नहीं बनाए, और न उसने तुम्हारी उन पत्नियों को जिनसे तुम ज़िहार करते हो, तुम्हारी माएँ बनाया है, और न तुम्हारे मुँह बोले बेटों को तुम्हारे बेटे बनाया है। यह तो तुम्हारा अपने मुँह से कहना है और अल्लाह सच कहता है तथा वही सीधी राह दिखाता है।1
३३:५
ٱدْعُوهُمْपुकारो उन्हेंid'ʿūhumلِـَٔابَآئِهِمْउनके बापों के (नाम) सेliābāihimهُوَवोhuwaأَقْسَطُज़्यादा इन्साफ़ वाला हैaqsaṭuعِندَनज़दीकʿindaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiفَإِنफिर अगरfa-inلَّمْनहींlamتَعْلَمُوٓا۟तुम जानतेtaʿlamūءَابَآءَهُمْउनके बापों कोābāahumفَإِخْوَٰنُكُمْतो भाई हैं तुम्हारेfa-ikh'wānukumفِىinٱلدِّينِदीन मेंl-dīniوَمَوَٰلِيكُمْ ۚऔर दोस्त हैं तुम्हारेwamawālīkumوَلَيْسَऔर नहींwalaysaعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumجُنَاحٌۭकोई गुनाहjunāḥunفِيمَآइस मामले में जोfīmāأَخْطَأْتُمख़ता की तुमनेakhṭatumبِهِۦउसमेंbihiوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinمَّاजोتَعَمَّدَتْइरादा करेंtaʿammadatقُلُوبُكُمْ ۚदिल तुम्हारेqulūbukumوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuغَفُورًۭاबहुत बख़्शने वालाghafūranرَّحِيمًاनिहायत रहम करने वालाraḥīman٥
उन्हें उनके बापों की ओर मनसूब करके पुकारो। यह अल्लाह के निकट अधिक न्याय की बात है और यदि तुम उनके बापों को न जानो, तो वे तुम्हारे धार्मिक भाई तथा तुम्हारे मित्र हैं। और तुमपर उसमें कोई दोष नहीं है, जो ग़लती से हो जाए, लेकिन (उसमें दोष है) जो दिल के इरादे से करो। तथा अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, अति दयावान् है।
३३:६
ٱلنَّبِىُّनबीal-nabiyuأَوْلَىٰक़रीबतर हैawlāبِٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों केbil-mu'minīnaمِنْthanminأَنفُسِهِمْ ۖउनके नफ़्सों सेanfusihimوَأَزْوَٰجُهُۥٓऔर बीवियाँ उसकीwa-azwājuhuأُمَّهَـٰتُهُمْ ۗमाँऐं हैं उनकीummahātuhumوَأُو۟لُوا۟And possessorswa-ulūٱلْأَرْحَامِऔर रहम वाले (रिश्तेदार)l-arḥāmiبَعْضُهُمْबाज़ उनकेbaʿḍuhumأَوْلَىٰनज़दीकतर हैंawlāبِبَعْضٍۢबाज़ केbibaʿḍinفِىinكِتَـٰبِकिताब मेंkitābiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiمِنَthanminaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों में सेl-mu'minīnaوَٱلْمُهَـٰجِرِينَऔर मोहाजिरीन में सेwal-muhājirīnaإِلَّآमगरillāأَنये किanتَفْعَلُوٓا۟तुम करेtafʿalūإِلَىٰٓtoilāأَوْلِيَآئِكُمतरफ़ अपने दोस्तों केawliyāikumمَّعْرُوفًۭا ۚकोई भलाईmaʿrūfanكَانَहैkānaذَٰلِكَयेdhālikaفِىinٱلْكِتَـٰبِकिताब मेंl-kitābiمَسْطُورًۭاलिखा हुआmasṭūran٦
यह नबी1 ईमान वालों पर उनके अपने प्राणों से अधिक हक़ रखने वाले हैं। और नबी की पत्नियाँ उनकी माताएँ2 हैं। और रिश्तेदार, अल्लाह की किताब के अनुसार, (अन्य) ईमान वालों और मुहाजिरों से एक-दूसरे के अधिक हक़दार3 हैं। सिवाय इसके कि तुम अपने मित्रों के साथ कोई भलाई करो। यह पुस्तक में लिखा हुआ है।
३३:७
وَإِذْऔर जबwa-idhأَخَذْنَاलिया हमनेakhadhnāمِنَfromminaٱلنَّبِيِّـۧنَनबियों सेl-nabiyīnaمِيثَـٰقَهُمْपुख़्ता अहद उनकाmīthāqahumوَمِنكَऔर आपसेwaminkaوَمِنand fromwaminنُّوحٍۢऔर नूहnūḥinوَإِبْرَٰهِيمَऔर इब्राहीमwa-ib'rāhīmaوَمُوسَىٰऔर मूसाwamūsāوَعِيسَىand Isawaʿīsāٱبْنِsonib'niمَرْيَمَ ۖऔर ईसा इब्ने मरयम सेmaryamaوَأَخَذْنَاऔर लिया हमनेwa-akhadhnāمِنْهُمउनसेmin'humمِّيثَـٰقًاअहदmīthāqanغَلِيظًۭاपुख़्ता /पक्काghalīẓan٧
तथा (याद करो) जब हमने नबियों से उनका वचन1 लिया। तथा (विशेष रूप से) आपसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरयम के पुत्र ईसा से। और हमने उनसे दृढ़ वचन लिया।
३३:८
لِّيَسْـَٔلَताकि वो सवाल करेliyasalaٱلصَّـٰدِقِينَसच्चों सेl-ṣādiqīnaعَنaboutʿanصِدْقِهِمْ ۚउनके सच के बारे मेंṣid'qihimوَأَعَدَّऔर उसने तैयार कर रखा हैwa-aʿaddaلِلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों के लिएlil'kāfirīnaعَذَابًاअज़ाबʿadhābanأَلِيمًۭاदर्दनाकalīman٨
ताकि वह सच्चे लोगों से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे1 तथा उसने काफ़िरों के लिए दर्दनाक यातना तैयार कर रखी है।
३३:९
يَـٰٓأَيُّهَاO youyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūٱذْكُرُوا۟याद करोudh'kurūنِعْمَةَनेअमतniʿ'mataٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiعَلَيْكُمْअपने ऊपरʿalaykumإِذْजबidhجَآءَتْكُمْआए तुम्हारे पासjāatkumجُنُودٌۭकई लश्करjunūdunفَأَرْسَلْنَاतो भेजी हमनेfa-arsalnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimرِيحًۭاएक आँधीrīḥanوَجُنُودًۭاऔर कुछ लश्करwajunūdanلَّمْनहींlamتَرَوْهَا ۚतुम ने देखा उन्हेंtarawhāوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِمَاउसे जोbimāتَعْمَلُونَतुम अमल करते होtaʿmalūnaبَصِيرًاख़ूब देखने वालाbaṣīran٩
ऐ ईमान वालो! अपने ऊपर अल्लाह के उपकार को याद करो, जब सेनाएँ तुमपर चढ़ आईं, तो हमने उनपर आँधी भेज दी और ऐसी सेनाएँ, जिन्हें तुमने नहीं देखा। और जो कुछ तुम कर रहे थे, अल्लाह उसे खूब देखने वाला था।
३३:१०
إِذْजबidhجَآءُوكُمवो आए तुम परjāūkumمِّنfromminفَوْقِكُمْतुम्हारे ऊपर सेfawqikumوَمِنْand fromwaminأَسْفَلَऔर नीचे सेasfalaمِنكُمْतुम्हारेminkumوَإِذْऔर जबwa-idhزَاغَتِफिर गईंzāghatiٱلْأَبْصَـٰرُनिगाहेंl-abṣāruوَبَلَغَتِऔर पहुँच गएwabalaghatiٱلْقُلُوبُदिलl-qulūbuٱلْحَنَاجِرَगलों तकl-ḥanājiraوَتَظُنُّونَऔर तुम गुमान कर रहे थेwataẓunnūnaبِٱللَّهِअल्लाह के बारे मेंbil-lahiٱلظُّنُونَا۠बहुत से गुमानl-ẓunūnā١٠
जब वे तुमपर, तुम्हारे ऊपर से तथा तुम्हारे नीचे से चढ़ आए, तथा जब आँखें फिर गईं, और दिल गले तक पहुँच गए, तथा तुम अल्लाह के बारे में तरह-तरह के गुमान करने लगे।1
३३:११
هُنَالِكَउस वक़्तhunālikaٱبْتُلِىَआज़माए गएub'tuliyaٱلْمُؤْمِنُونَसब मोमिनl-mu'minūnaوَزُلْزِلُوا۟और वो हिला मारे गएwazul'zilūزِلْزَالًۭاहिला मारा जानाzil'zālanشَدِيدًۭاशिद्दत काshadīdan١١
इस जगह ईमान वाले आज़माए गए और वे पूर्ण रूप से झंझोड़ दिए गए।
३३:१२
وَإِذْऔर जबwa-idhيَقُولُकह रहे थेyaqūluٱلْمُنَـٰفِقُونَमुनाफ़िक़l-munāfiqūnaوَٱلَّذِينَऔर वो लोगwa-alladhīnaفِىinقُلُوبِهِمजिनके दिलों मेंqulūbihimمَّرَضٌۭमर्ज़ हैmaraḍunمَّاनहींوَعَدَنَاवादा किया हमसेwaʿadanāٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَرَسُولُهُۥٓऔर उसके रसूल नेwarasūluhuإِلَّاमगरillāغُرُورًۭاधोके काghurūran١٢
और जब मुनाफ़िक़ और वे लोग जिनके दिलों में रोग है, कह रहे थे : अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे जो वादा किया था, वह मात्र धोखा था।
३३:१३
وَإِذْऔर जबwa-idhقَالَتकहाqālatطَّآئِفَةٌۭएक गिरोह नेṭāifatunمِّنْهُمْउनमें सेmin'humيَـٰٓأَهْلَऐ अहलेyāahlaيَثْرِبَयसरबyathribaلَاNoمُقَامَनहीं कोई जगह ठहरने कीmuqāmaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفَٱرْجِعُوا۟ ۚपस लौट चलोfa-ir'jiʿūوَيَسْتَـْٔذِنُऔर इजाज़त माँग रहा थाwayastadhinuفَرِيقٌۭएक गिरोहfarīqunمِّنْهُمُउनमें सेmin'humuٱلنَّبِىَّनबी सेl-nabiyaيَقُولُونَवो कह रहे थेyaqūlūnaإِنَّबेशकinnaبُيُوتَنَاहमारे घर तोbuyūtanāعَوْرَةٌۭग़ैर महफ़ूज़ हैंʿawratunوَمَاहालाँकि नहीं थेwamāهِىَवोhiyaبِعَوْرَةٍ ۖग़ैर महफ़ूज़biʿawratinإِنनहींinيُرِيدُونَवो चाहते थेyurīdūnaإِلَّاमगरillāفِرَارًۭاफ़रार होनाfirāran١٣
और जब उनके एक गिरोह ने कहा : ऐ यसरिब1 वालो! तुम्हारे लिए ठहरने का कोई अवसर नहीं है। अतः लौट2 चलो। तथा उनमें से एक गिरोह नबी से (वापसी की) अनुमति माँगता था। वे कहते थे : हमारे घर असुरक्षित हैं। हालाँकि वे असुरक्षित नहीं हैं। वे तो केवल भागना चाहते हैं।
३३:१४
وَلَوْऔर अगरwalawدُخِلَتْदाख़िल किए जातेdukhilatعَلَيْهِمउन पर (लश्कर)ʿalayhimمِّنْfromminأَقْطَارِهَاउनके अतराफ़ सेaqṭārihāثُمَّफिरthummaسُئِلُوا۟वो सवाल किए जातेsu-ilūٱلْفِتْنَةَफ़ितना बरपा करने काl-fit'nataلَـَٔاتَوْهَاअलबत्ता वो आते उसेlaātawhāوَمَاऔर नाwamāتَلَبَّثُوا۟वो इन्तिज़ार करतेtalabbathūبِهَآउसकाbihāإِلَّاमगरillāيَسِيرًۭاबहुत थोड़ाyasīran١٤
और यदि उनपर उस (मदीने) की चारों ओर से सेनाएँ दाखिल की जातीं, फिर उनसे फितने1 का अह्वान किया जाता, तो वे निश्चित रूप से ऐसा कर डालते और उसमें केवल थोड़ा ही संकोच करते।
३३:१५
وَلَقَدْऔर अलबत्ता तहक़ीक़walaqadكَانُوا۟थे वोkānūعَـٰهَدُوا۟वो अहद कर चुकेʿāhadūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaمِنbeforeminقَبْلُइससे पहलेqabluلَاnotيُوَلُّونَकि नहीं वो फेरेंगेyuwallūnaٱلْأَدْبَـٰرَ ۚपुश्तेंl-adbāraوَكَانَऔर हैwakānaعَهْدُअहदʿahduٱللَّهِअल्लाह काl-lahiمَسْـُٔولًۭاपूछा जाने वालाmasūlan١٥
जबकि उन्होंने इससे पूर्व अल्लाह से प्रतिज्ञा की थी कि वे पीठ नहीं फेरेंगे। और अल्लाह से की गई प्रतिज्ञा के बारे में तो पूछा ही जाएगा।
३३:१६
قُلकह दीजिएqulلَّنहरगिज़ नहींlanيَنفَعَكُمُफ़ायदा देगा तुम्हेंyanfaʿakumuٱلْفِرَارُभागनाl-firāruإِنअगरinفَرَرْتُمभागे तुमfarartumمِّنَfromminaٱلْمَوْتِमौत सेl-mawtiأَوِयाawiٱلْقَتْلِक़त्ल सेl-qatliوَإِذًۭاऔर तबwa-idhanلَّاnotتُمَتَّعُونَना तुम फ़ायदा दिए जाओगेtumattaʿūnaإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭاबहुत थोड़ाqalīlan١٦
आप कह दें : यदि तुम मौत से या क़त्ल होने से भागते हो, तो भागना तुम्हें कदापि लाभ नहीं देगा। और उस समय तुम्हें (जीवन का) बहुत थोड़ा1 लाभ दिया जाएगा ।
३३:१७
قُلْकह दीजिएqulمَنकौन हैmanذَا(is) it thatdhāٱلَّذِىवो जोalladhīيَعْصِمُكُمबचाएगा तुम्हेंyaʿṣimukumمِّنَfromminaٱللَّهِअल्लाह सेl-lahiإِنْअगरinأَرَادَउसने इरादा कियाarādaبِكُمْतुम्हारे साथbikumسُوٓءًاबुराई काsūanأَوْयाawأَرَادَउसने इरादा कियाarādaبِكُمْतुम्हारे साथbikumرَحْمَةًۭ ۚरहमत काraḥmatanوَلَاऔर नहींwalāيَجِدُونَवो पाऐंगेyajidūnaلَهُمअपने लिएlahumمِّنbesidesminدُونِसिवाएdūniٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَلِيًّۭاकोई दोस्तwaliyyanوَلَاऔर नाwalāنَصِيرًۭاकोई मददगारnaṣīran١٧
आप कह दीजिए : वह कौन है, जो तुम्हें अल्लाह से बचाएगा, यदि वह तुम्हारे साथ कोई बुराई चाहे अथवा तुम पर कोई दया करना चाहे? और वे अपने लिए अल्लाह के सिवा न कोई संरक्षक पाएँगे और न कोई सहायक।
३३:१८
۞ قَدْतहक़ीक़qadيَعْلَمُजानता हैyaʿlamuٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْمُعَوِّقِينَरोकने वालों कोl-muʿawiqīnaمِنكُمْतुम में सेminkumوَٱلْقَآئِلِينَऔर कहने वालों कोwal-qāilīnaلِإِخْوَٰنِهِمْअपने भाईयों सेli-ikh'wānihimهَلُمَّआओhalummaإِلَيْنَا ۖतरफ़ हमारेilaynāوَلَاऔर नहींwalāيَأْتُونَवो आतेyatūnaٱلْبَأْسَलड़ाई कोl-basaإِلَّاमगरillāقَلِيلًاबहुत थोड़ेqalīlan١٨
निश्चय अल्लाह तुम में से उन लोगों को भली-भाँति जानता है, जो (जिहाद से) रोकने वाले हैं और जो अपने भाइयों से कहते हैं कि हमारे पास चले आओ और वे युद्ध में बहुत कम आते हैं।
३३:१९
أَشِحَّةًबख़ील हैंashiḥḥatanعَلَيْكُمْ ۖतुम परʿalaykumفَإِذَاफिर जबfa-idhāجَآءَआता हैjāaٱلْخَوْفُख़ौफ़l-khawfuرَأَيْتَهُمْदेखते हैं आप उन्हेंra-aytahumيَنظُرُونَवो देखते हैंyanẓurūnaإِلَيْكَतरफ़ आपकेilaykaتَدُورُघूमती हैंtadūruأَعْيُنُهُمْआँखें उनकीaʿyunuhumكَٱلَّذِىउस शख़्स की तरहka-alladhīيُغْشَىٰग़शी तारी की जा रही होyugh'shāعَلَيْهِजिस परʿalayhiمِنَfromminaٱلْمَوْتِ ۖमौत कीl-mawtiفَإِذَاफिर जबfa-idhāذَهَبَचला जाता हैdhahabaٱلْخَوْفُख़ौफ़l-khawfuسَلَقُوكُمबदज़बानी करते हैं आपसेsalaqūkumبِأَلْسِنَةٍसाथ ज़बानों केbi-alsinatinحِدَادٍतेज़ḥidādinأَشِحَّةًहिर्स/बुख़्ल करते हुएashiḥḥatanعَلَىtowardsʿalāٱلْخَيْرِ ۚमाल परl-khayriأُو۟لَـٰٓئِكَयही लोग हैंulāikaلَمْनहींlamيُؤْمِنُوا۟वो ईमान लाएyu'minūفَأَحْبَطَतो ज़ाया कर दियाfa-aḥbaṭaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuأَعْمَـٰلَهُمْ ۚउनके अमाल कोaʿmālahumوَكَانَऔर हैwakānaذَٰلِكَयेdhālikaعَلَىforʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiيَسِيرًۭاबहुत आसानyasīran١٩
वे तुम्हारे बारे में बड़े कंजूस हैं। फिर जब भय1 का समय आ जाए, तो आप उन्हें देखेंगे कि वे आपकी ओर ऐसे देखते हैं कि उनकी आँखें उस व्यक्ति की तरह घूमती हैं, जिसपर मौत की बेहोशी छा रही हो। फिर जब भय दूर हो जाए, तो तुम्हें तेज़ ज़बानों2 के साथ कष्ट पहुँचाएँगे, इस हाल में कि धन के बहुत लोभी हैं। ये लोग ईमान लाए ही नहीं हैं। इसलिए अल्लाह ने उनके कार्यों को व्यर्थ कर दिया। तथा यह अल्लाह पर अति सरल है।
३३:२०
يَحْسَبُونَवो समझते हैंyaḥsabūnaٱلْأَحْزَابَगिरोहों /लश्करों कोl-aḥzābaلَمْकि नहींlamيَذْهَبُوا۟ ۖवो गएyadhhabūوَإِنऔर अगरwa-inيَأْتِआ जाऐंyatiٱلْأَحْزَابُगिरोह/लश्करl-aḥzābuيَوَدُّوا۟वो चाहेंगेyawaddūلَوْकाशlawأَنَّهُمये कि वोannahumبَادُونَबाहर रहने वाले होतेbādūnaفِىamongٱلْأَعْرَابِबद्दुओं /एराबियों मेंl-aʿrābiيَسْـَٔلُونَवो पूछ लिया करतेyasalūnaعَنْaboutʿanأَنۢبَآئِكُمْ ۖख़बरें तुम्हारीanbāikumوَلَوْऔर अगरwalawكَانُوا۟वो होतेkānūفِيكُمतुम मेंfīkumمَّاनाقَـٰتَلُوٓا۟वो जंग करतेqātalūإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭاबहुत कमqalīlan٢٠
वे समझते हैं कि सैन्य दल (अभी) नहीं गए1 हैं। और यदि सेनाएँ (दोबारा) आ जाएँ, तो वे चाहेंगे कि काश! वे देहातियों के साथ देहातों में चले जाते और (वहीं से) तुम्हारे समाचार मालूम करते रहते। और अगर वे तुम्हारे साथ होते भी, तो युद्ध में कम ही भाग लेते।
३३:२१
لَّقَدْअलबत्ता तहक़ीक़laqadكَانَहैkānaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumفِىinرَسُولِ(the) Messengerrasūliٱللَّهِअल्लाह के रसूल मेंl-lahiأُسْوَةٌनमूनाus'watunحَسَنَةٌۭअच्छाḥasanatunلِّمَنउसके लिए जोlimanكَانَहोkānaيَرْجُوا۟उम्मीद रखताyarjūٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَٱلْيَوْمَand the Daywal-yawmaٱلْـَٔاخِرَऔर आख़िरी दिन कीl-ākhiraوَذَكَرَऔर वो याद करेwadhakaraٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaكَثِيرًۭاकसरत सेkathīran٢١
निःसंदेह तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में उत्तम1 आदर्श है। उसके लिए, जो अल्लाह और अंतिम दिन की आशा रखता हो, तथा अल्लाह को अत्यधिक याद करता हो।
३३:२२
وَلَمَّاऔर जबwalammāرَءَاदेखाraāٱلْمُؤْمِنُونَमोमिनों नेl-mu'minūnaٱلْأَحْزَابَगिरोहों कोl-aḥzābaقَالُوا۟वो कहने लगेqālūهَـٰذَاये हैhādhāمَاवो ही जोوَعَدَنَاवादा किया हमसेwaʿadanāٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَرَسُولُهُۥऔर उसके रसूल नेwarasūluhuوَصَدَقَऔर सच फ़रमायाwaṣadaqaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuوَرَسُولُهُۥ ۚऔर उसके रसूल नेwarasūluhuوَمَاऔर नहींwamāزَادَهُمْउसने ज़्यादा किया उन्हेंzādahumإِلَّآमगरillāإِيمَـٰنًۭاईमानīmānanوَتَسْلِيمًۭاऔर सुपुर्दगी मेंwataslīman٢٢
और जब ईमान वालों ने सेनाएँ देखीं, तो पुकार उठे : यह वही चीज़ है, जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था और अल्लाह और उसके रसूल ने सच कहा। और इस चीज़ ने उनके ईमान तथा आज्ञापालन को और बढ़ा दिया।
३३:२३
مِّنَAmongminaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों में सेl-mu'minīnaرِجَالٌۭकुछ मर्द हैंrijālunصَدَقُوا۟जिन्होंने सच्चा कर दियाṣadaqūمَاजोعَـٰهَدُوا۟उन्होंने अहद किया थाʿāhadūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaعَلَيْهِ ۖजिस परʿalayhiفَمِنْهُمतो उनमें से वो हैfamin'humمَّنजोmanقَضَىٰपूरी कर चुकाqaḍāنَحْبَهُۥनज़र अपनीnaḥbahuوَمِنْهُمऔर उनमें से कोई हैwamin'humمَّنजोmanيَنتَظِرُ ۖमुन्तज़िर हैyantaẓiruوَمَاऔर नहींwamāبَدَّلُوا۟उन्होंने तब्दीली कीbaddalūتَبْدِيلًۭاतब्दीली करनाtabdīlan٢٣
ईमान वालों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह से जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सच कर दिखाया। फिर उनमें से कुछ तो अपना प्रण1 पूरा कर चुके, और उनमें से कुछ लोग (अभी) प्रतीक्षा कर रहे हैं। और उन्होंने (अपनी प्रतिज्ञा में) तनिक भी परिवर्तन नहीं किया।
३३:२४
لِّيَجْزِىَताकि बदला देliyajziyaٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلصَّـٰدِقِينَसच्चों कोl-ṣādiqīnaبِصِدْقِهِمْउनकी सच्चाई काbiṣid'qihimوَيُعَذِّبَऔर वो अज़ाब देwayuʿadhibaٱلْمُنَـٰفِقِينَमुनाफ़िक़ों कोl-munāfiqīnaإِنअगरinشَآءَवो चाहेshāaأَوْयाawيَتُوبَवो मेहरबान होजाएyatūbaعَلَيْهِمْ ۚउन परʿalayhimإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaكَانَहैkānaغَفُورًۭاबहुत बख़्शने वालाghafūranرَّحِيمًۭاनिहायत रहम करने वालाraḥīman٢٤
ताकि अल्लाह सच्चे लोगों को उनके सच का बदला प्रदान करे, और मुनाफ़िक़ों को, यदि चाहे तो यातना दे या उनकी तौबा क़बूल कर ले। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
३३:२५
وَرَدَّऔर फेर दियाwaraddaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūبِغَيْظِهِمْसाथ उनके ग़ुस्से केbighayẓihimلَمْनहींlamيَنَالُوا۟उन्होंने पाईyanālūخَيْرًۭا ۚकोई भलाईkhayranوَكَفَىऔर काफ़ी हो गयाwakafāٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों कोl-mu'minīnaٱلْقِتَالَ ۚजंग मेंl-qitālaوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuقَوِيًّاबहुत क़ुव्वत वालाqawiyyanعَزِيزًۭاबहुत ज़बरदस्तʿazīzan٢٥
तथा अल्लाह ने काफ़िरों को (मदीना से) उनके क्रोध सहित लौटा दिया, उन्होंने कोई भलाई प्राप्त न की। और अल्लाह ईमान वालों को लड़ाई से काफी हो गया। और अल्लाह बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत प्रभुत्वशाली है।
३३:२६
وَأَنزَلَऔर उसने उताराwa-anzalaٱلَّذِينَउनको जिन्होंनेalladhīnaظَـٰهَرُوهُمमदद की उनकीẓāharūhumمِّنْamongminأَهْلِ(the) Peopleahliٱلْكِتَـٰبِअहले किताब में सेl-kitābiمِنfromminصَيَاصِيهِمْउनके क़िलों सेṣayāṣīhimوَقَذَفَऔर उसने डाल दियाwaqadhafaفِىintoقُلُوبِهِمُउनके दिलों मेंqulūbihimuٱلرُّعْبَरोबl-ruʿ'baفَرِيقًۭاएक गिरोह कोfarīqanتَقْتُلُونَतुम क़त्ल कर रहे थेtaqtulūnaوَتَأْسِرُونَऔर तुम क़ैद कर रहे थेwatasirūnaفَرِيقًۭاएक गिरोह कोfarīqan٢٦
और अल्लाह ने उन किताब वालों को, जिन्होंने उन (काफ़िरों) की सहायता की थी, उनके क़िलों से उतार दिया तथा उनके दिलों में भय1 डाल दिया। तुम उनके एक समूह को क़त्ल करते थे और एक समूह को बंदी बनाते थे।
३३:२७
وَأَوْرَثَكُمْऔर उसने वारिस बनादिया तुम्हेंwa-awrathakumأَرْضَهُمْउनकी ज़मीन काarḍahumوَدِيَـٰرَهُمْऔर उनके घरों काwadiyārahumوَأَمْوَٰلَهُمْऔर उनके मालों काwa-amwālahumوَأَرْضًۭاऔर ज़मीन काwa-arḍanلَّمْनहींlamتَطَـُٔوهَا ۚतुम ने पामाला किया जिसेtaṭaūhāوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinقَدِيرًۭاख़ूब क़ुदरत रखने वालाqadīran٢٧
और तुम्हें उनकी भूमि तथा उनके घरों और उनके धनों का वारिस बना दिया और उस भूमि का भी जिसपर तुमने क़दम नहीं रखा। और अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
३३:२८
يَـٰٓأَيُّهَاO Prophetyāayyuhāٱلنَّبِىُّऐ नबीl-nabiyuقُلकह दीजिएqulلِّأَزْوَٰجِكَअपनी बीवियों सेli-azwājikaإِنअगरinكُنتُنَّहो तुमkuntunnaتُرِدْنَतुम चाहतीturid'naٱلْحَيَوٰةَज़िन्दगीl-ḥayataٱلدُّنْيَاदुनिया कीl-dun'yāوَزِينَتَهَاऔर ज़ीनत उसकीwazīnatahāفَتَعَالَيْنَतो आओfataʿālaynaأُمَتِّعْكُنَّमैं कुछ सामान दे दूँ तुम्हेंumattiʿ'kunnaوَأُسَرِّحْكُنَّऔर मैं रुख़्सत कर दूँ तुम्हेंwa-usarriḥ'kunnaسَرَاحًۭاरुख़्सत करनाsarāḥanجَمِيلًۭاअच्छे तरीक़े सेjamīlan٢٨
ऐ नबी! आप अपनी पत्नियों से कह दें कि यदि तुम सांसारिक जीवन और उसकी शोभा चाहती हो, तो आओ, मैं तुम्हें कुछ सामान दे दूँ और अच्छे तरीक़े से रुख़्सत कर दूँ।
३३:२९
وَإِنऔर अगरwa-inكُنتُنَّहो तुमkuntunnaتُرِدْنَतुम चाहतीturid'naٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कोwarasūlahuوَٱلدَّارَऔर घर कोwal-dāraٱلْـَٔاخِرَةَआख़िरत केl-ākhirataفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाह नेl-lahaأَعَدَّतैयार कर रखा हैaʿaddaلِلْمُحْسِنَـٰتِनेकी करने वालों के लिएlil'muḥ'sinātiمِنكُنَّतुम में सेminkunnaأَجْرًاअजरajranعَظِيمًۭاबहुत बड़ाʿaẓīman٢٩
और यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल तथा आख़िरत के घर को चाहती हो, तो अल्लाह ने तुममें से अच्छे कार्य करने वालियों के लिए बहुत बड़ा बदला1 तैयार कर रखा है।
३३:३०
يَـٰنِسَآءَO wivesyānisāaٱلنَّبِىِّऐ नबी की बीवियोl-nabiyiمَنजो कोईmanيَأْتِआएगीyatiمِنكُنَّतुम में सेminkunnaبِفَـٰحِشَةٍۢबेहयाई कोbifāḥishatinمُّبَيِّنَةٍۢखुलीmubayyinatinيُضَـٰعَفْबढ़ा दिया जाएगाyuḍāʿafلَهَاउसके लिएlahāٱلْعَذَابُअज़ाबl-ʿadhābuضِعْفَيْنِ ۚदोगुनाḍiʿ'fayniوَكَانَऔर हैwakānaذَٰلِكَयेdhālikaعَلَىforʿalāٱللَّهِअल्लाह परl-lahiيَسِيرًۭاबहुत आसानyasīran٣٠
ऐ नबी की पत्नियो! तुममें से जो खुला दुराचार करेगी, उसे दुगनी यातना दी जाएगी। और यह अल्लाह पर अति सरल है।
३३:३१
۞ وَمَنऔर जो कोईwamanيَقْنُتْइताअत करेगीyaqnutمِنكُنَّतुम में सेminkunnaلِلَّهِअल्लाह कीlillahiوَرَسُولِهِۦऔर उसके रसूल कीwarasūlihiوَتَعْمَلْऔर वो अमल करेगीwataʿmalصَـٰلِحًۭاनेकṣāliḥanنُّؤْتِهَآहम देंगे उसेnu'tihāأَجْرَهَاअजर उसकाajrahāمَرَّتَيْنِदो बारmarratayniوَأَعْتَدْنَاऔर तैयार कर रखा है हमनेwa-aʿtadnāلَهَاउसके लिएlahāرِزْقًۭاरिज़्क़riz'qanكَرِيمًۭاबाइज़्ज़त /उमदाkarīman٣١
तथा तुममें से जो अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करेगी और सत्कर्म करेगी, हम उसे उसका दोहरा प्रतिफल प्रदान करेंगे, और हमने उसके लिए सम्मानजनक जीविका1 तैयार कर रखी है।
३३:३२
يَـٰنِسَآءَO wivesyānisāaٱلنَّبِىِّऐ नबी की बीवियोl-nabiyiلَسْتُنَّनहीं हो तुमlastunnaكَأَحَدٍۢकिसी एक की तरहka-aḥadinمِّنَamongminaٱلنِّسَآءِ ۚऔरतों में सेl-nisāiإِنِअगरiniٱتَّقَيْتُنَّतुम तक़वा इख़्तियार करोittaqaytunnaفَلَاतो नाfalāتَخْضَعْنَतुम लोच पैदा करनाtakhḍaʿnaبِٱلْقَوْلِबात मेंbil-qawliفَيَطْمَعَवरना तमअ करेगाfayaṭmaʿaٱلَّذِىवो शख़्सalladhīفِىinقَلْبِهِۦजिसके दिल मेंqalbihiمَرَضٌۭमर्ज़ हैmaraḍunوَقُلْنَऔर कहोwaqul'naقَوْلًۭاबातqawlanمَّعْرُوفًۭاभली/मारूफ़maʿrūfan٣٢
ऐ नबी की पत्नियो! तुम अन्य स्त्रियों के समान नहीं हो। यदि तुम अल्लाह से डरती हो, तो कोमल भाव से बात न करो कि वह व्यक्ति लोभ करने लगे, जिसके दिल में रोग हो। और सभ्य बात बोलो।
३३:३३
وَقَرْنَऔर क़रार पकड़ोwaqarnaفِىinبُيُوتِكُنَّअपने घरों मेंbuyūtikunnaوَلَاऔर नाwalāتَبَرَّجْنَतुम इज़हारे ज़ीनत करोtabarrajnaتَبَرُّجَइज़हारे ज़ीनतtabarrujaٱلْجَـٰهِلِيَّةِजाहिलियतl-jāhiliyatiٱلْأُولَىٰ ۖपहली काl-ūlāوَأَقِمْنَऔर क़ायम करोwa-aqim'naٱلصَّلَوٰةَनमाज़l-ṣalataوَءَاتِينَऔर अदा करोwaātīnaٱلزَّكَوٰةَज़कातl-zakataوَأَطِعْنَऔर इताअत करोwa-aṭiʿ'naٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥٓ ۚऔर उसके रसूल कीwarasūlahuإِنَّمَاबेशकinnamāيُرِيدُचाहता हैyurīduٱللَّهُअल्लाहl-lahuلِيُذْهِبَकि वो ले जाएliyudh'hibaعَنكُمُतुम सेʿankumuٱلرِّجْسَनापाकी कोl-rij'saأَهْلَ(O) Peopleahlaٱلْبَيْتِऐ अहले बैतl-baytiوَيُطَهِّرَكُمْऔर वो पाक कर दे तुम्हेंwayuṭahhirakumتَطْهِيرًۭاख़ूब पाक करनाtaṭhīran٣٣
और अपने घरों में ठहरी रहो, और विगत अज्ञानता के युग की तरह श्रृंगार का प्रदर्शन न करो, तथा नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। ऐ नबी की घर वालियो! अल्लाह चाहता है कि तुमसे मलिनता को दूर कर दे और तुम्हें पूर्ण रूप से पवित्र कर दे।
३३:३४
وَٱذْكُرْنَऔर याद रखोwa-udh'kur'naمَاउसको जोيُتْلَىٰपढ़ा जाता हैyut'lāفِىinبُيُوتِكُنَّतुम्हारे घरों मेंbuyūtikunnaمِنْofminءَايَـٰتِआयात में सेāyātiٱللَّهِअल्लाह कीl-lahiوَٱلْحِكْمَةِ ۚऔर हिकमत में सेwal-ḥik'matiإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaكَانَहैkānaلَطِيفًاबहुत बारीक बीनlaṭīfanخَبِيرًاख़ूब बाख़बरkhabīran٣٤
तथा तुम्हारे घरों में जो अल्लाह की आयतें और हिकमत1 पढ़ी जाती हैं, उन्हें याद रखो। निःसंदेह अल्लाह सूक्ष्मदर्शी, हर चीज़ की खबर रखनेवाला है।
३३:३५
إِنَّबेशकinnaٱلْمُسْلِمِينَमुसलमान मर्दl-mus'limīnaوَٱلْمُسْلِمَـٰتِऔर मुसलमान औरतेंwal-mus'limātiوَٱلْمُؤْمِنِينَऔर मोमिन मर्दwal-mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِऔर मोमिन औरतेंwal-mu'minātiوَٱلْقَـٰنِتِينَऔर फ़रमाबरदार मर्दwal-qānitīnaوَٱلْقَـٰنِتَـٰتِऔर फ़रमाबरदार औरतेंwal-qānitātiوَٱلصَّـٰدِقِينَऔर सच्चे मर्दwal-ṣādiqīnaوَٱلصَّـٰدِقَـٰتِऔर सच्ची औरतेंwal-ṣādiqātiوَٱلصَّـٰبِرِينَऔर सब्र करने वाले मर्दwal-ṣābirīnaوَٱلصَّـٰبِرَٰتِऔर सब्र करने वाली औरतेंwal-ṣābirātiوَٱلْخَـٰشِعِينَऔर ख़ुशूअ करने वाले मर्दwal-khāshiʿīnaوَٱلْخَـٰشِعَـٰتِऔर ख़ुशूअ करने वाली औरतेंwal-khāshiʿātiوَٱلْمُتَصَدِّقِينَऔर सदक़ा देने वाले मर्दwal-mutaṣadiqīnaوَٱلْمُتَصَدِّقَـٰتِऔर सदक़ा देने वाली औरतेंwal-mutaṣadiqātiوَٱلصَّـٰٓئِمِينَऔर रोज़ा रखने वाले मर्दwal-ṣāimīnaوَٱلصَّـٰٓئِمَـٰتِऔर रोज़ा रखने वाली औरतेंwal-ṣāimātiوَٱلْحَـٰفِظِينَऔर हिफ़ाज़त करने वाले मर्दwal-ḥāfiẓīnaفُرُوجَهُمْअपनी शर्म गाहों कीfurūjahumوَٱلْحَـٰفِظَـٰتِऔर हिफ़ाज़त करने वाली औरतेंwal-ḥāfiẓātiوَٱلذَّٰكِرِينَऔर ज़िक्र करने वाले मर्दwal-dhākirīnaٱللَّهَअल्लाह काl-lahaكَثِيرًۭاबहुत ज़्यादाkathīranوَٱلذَّٰكِرَٰتِऔर ज़िक्र करने वाली औरतेंwal-dhākirātiأَعَدَّतैयार कर रखी हैaʿaddaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَهُمउनके लिएlahumمَّغْفِرَةًۭमग़फ़िरतmaghfiratanوَأَجْرًاऔर अजरwa-ajranعَظِيمًۭاबहुत बड़ाʿaẓīman٣٥
निःसंदेह मुसलमान पुरुष और मुसलमान स्त्रियाँ, ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्रियाँ, आज्ञाकारी पुरुष और आज्ञाकारिणी स्त्रियाँ, सच्चे पुरुष और सच्ची स्त्रियाँ, धैर्यवान पुरुष और धैर्यवान स्त्रियाँ, विनम्रता दिखाने वाले पुरुष और विनम्रता दिखाने वाली स्त्रियाँ, सदक़ा (दान) देने वाले पुरुष और सदक़ा देने वाली स्त्रियाँ, रोज़ा रखने वाले पुरुष और रोज़ा रखने वाली स्त्रियाँ, अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले पुरुष और रक्षा करने वाली स्त्रियाँ तथा अल्लाह को अत्यधिक याद करने वाले पुरुष और याद करने वाली स्त्रियाँ, अल्लाह ने इनके लिए क्षमा तथा महान प्रतिफल तैयार कर रखा है।1
३३:३६
وَمَاऔर नहींwamāكَانَहैkānaلِمُؤْمِنٍۢकिसी मोमिन मर्द के लिएlimu'mininوَلَاऔर नाwalāمُؤْمِنَةٍकिसी मोमिन औरत के लिएmu'minatinإِذَاजबidhāقَضَىफ़ैसला कर देqaḍāٱللَّهُअल्लाहl-lahuوَرَسُولُهُۥٓऔर उसका रसूलwarasūluhuأَمْرًاकिसी मामले काamranأَنकिanيَكُونَहोyakūnaلَهُمُउनके लिएlahumuٱلْخِيَرَةُकोई इख़्तियारl-khiyaratuمِنْaboutminأَمْرِهِمْ ۗअपने मामले में सेamrihimوَمَنऔर जो कोईwamanيَعْصِनाफ़रमानी करेगाyaʿṣiٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कीwarasūlahuفَقَدْतो तहक़ीकfaqadضَلَّवो भटक गयाḍallaضَلَـٰلًۭاभटकनाḍalālanمُّبِينًۭاखुल्लम-खुल्लाmubīnan٣٦
तथा किसी ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्री को यह अधिकार नहीं कि जब अल्लाह और उसका रसूल किसी मामले का निर्णय कर दें, तो उनके लिए अपने मामले में कोई अख़्तियार बाक़ी रहे। और जो अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करे, वह खुली गुमराही में पड़ गया।1
३३:३७
وَإِذْऔर जबwa-idhتَقُولُआप कह रहे थेtaqūluلِلَّذِىٓउस शख़्स सेlilladhīأَنْعَمَइनाम कियाanʿamaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْهِजिस परʿalayhiوَأَنْعَمْتَऔर इनाम किया आपनेwa-anʿamtaعَلَيْهِजिस परʿalayhiأَمْسِكْरोक रखamsikعَلَيْكَअपने पासʿalaykaزَوْجَكَअपनी बीवी कोzawjakaوَٱتَّقِऔर डरwa-ittaqiٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَتُخْفِىऔर आप छुपाते थेwatukh'fīفِىwithinنَفْسِكَअपने दिल मेंnafsikaمَاवो जोٱللَّهُअल्लाहl-lahuمُبْدِيهِज़ाहिर करने वाला था उसेmub'dīhiوَتَخْشَىऔर आप डर रहे थेwatakhshāٱلنَّاسَलोगों सेl-nāsaوَٱللَّهُहालाँकि अल्लाहwal-lahuأَحَقُّज़्यादा हक़दार हैaḥaqquأَنकिanتَخْشَىٰهُ ۖआप डरें उससेtakhshāhuفَلَمَّاफिर जबfalammāقَضَىٰपूरी कर चुकाqaḍāزَيْدٌۭज़ैदzaydunمِّنْهَاउससेmin'hāوَطَرًۭاहाजतwaṭaranزَوَّجْنَـٰكَهَاनिकाह कर दिया हमने आपका उससेzawwajnākahāلِكَىْso thatlikayلَاताकि नाيَكُونَहोyakūnaعَلَىonʿalāٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों परl-mu'minīnaحَرَجٌۭकोई तंगीḥarajunفِىٓconcerningأَزْوَٰجِबीवियों के मामले मेंazwājiأَدْعِيَآئِهِمْअपने मुँह बोले बेटों कीadʿiyāihimإِذَاजबidhāقَضَوْا۟वो पूरा कर चुकेंqaḍawمِنْهُنَّउनसेmin'hunnaوَطَرًۭا ۚहाजतwaṭaranوَكَانَऔर हैwakānaأَمْرُहुक्मamruٱللَّهِअल्लाह काl-lahiمَفْعُولًۭاहोकर रहने वालाmafʿūlan٣٧
तथा (ऐ नबी!) आप (वह समय याद करें) जब आप उस व्यक्ति से, जिसपर अल्लाह ने उपकार किया तथा जिसपर आपने (भी) उपकार किया था, कह रहे थे : अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो तथा अल्लाह से डरो। और आप अपने मन में वह बात छिपा रहे थे, जिसे अल्लाह प्रकट करने वाला1 था। तथा आप लोगों से डर रहे थे, हालाँकि अल्लाह अधिक योग्य है कि आप उससे डरें। फिर जब ज़ैद ने उस (स्त्री) से अपनी आवश्यकता पूरी कर ली, तो हमने आपसे उसका विवाह कर दिया, ताकि ईमान वालों पर अपने मुँह बोले (लेपालक) बेटों की पत्नियों के विषय2 में कोई तंगी न रहे, जब वे उनसे अपनी आवश्यकता पूरी कर लें। तथा अल्लाह का आदेश तो पूरा होकर ही रहता है।
३३:३८
مَّاनहींكَانَहैkānaعَلَىuponʿalāٱلنَّبِىِّनबी परl-nabiyiمِنْanyminحَرَجٍۢकोई तंगीḥarajinفِيمَاउसमें जोfīmāفَرَضَमुक़र्रर कियाfaraḍaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuلَهُۥ ۖउसके लिएlahuسُنَّةَतरीक़ा हैsunnataٱللَّهِअल्लाह काl-lahiفِىconcerningٱلَّذِينَउन लोगों में जोalladhīnaخَلَوْا۟गुज़र चुकेkhalawمِنbeforeminقَبْلُ ۚइससे पहलेqabluوَكَانَऔर हैwakānaأَمْرُहुक्मamruٱللَّهِअल्लाह काl-lahiقَدَرًۭاएक अंदाज़ाqadaranمَّقْدُورًاमुक़र्रर किया हुआmaqdūran٣٨
नबी पर उस कार्य में कोई तंगी (पाप) नहीं है, जो अल्लाह ने उसके लिए निर्धारित किया है।1 अल्लाह का यही नियम रहा है उन लोगों के बारे में भी जो पहले गुज़र चुके हैं। तथा अल्लाह का आदेश एक निश्चित निर्णय होता है।
३३:३९
ٱلَّذِينَवो लोग जोalladhīnaيُبَلِّغُونَपहुँचाते हैंyuballighūnaرِسَـٰلَـٰتِपैग़ामातrisālātiٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَيَخْشَوْنَهُۥऔर वो डरते हैं उससेwayakhshawnahuوَلَاऔर नहींwalāيَخْشَوْنَवो डरतेyakhshawnaأَحَدًاकिसी एक से भीaḥadanإِلَّاसिवाएillāٱللَّهَ ۗअल्लाह केl-lahaوَكَفَىٰऔर काफ़ी हैwakafāبِٱللَّهِअल्लाहbil-lahiحَسِيبًۭاहिसाब लेने वालाḥasīban٣٩
जो अल्लाह के संदेश पहुँचाते हैं तथा उससे डरते हैं और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते, और अल्लाह हिसाब लेने के लिए काफ़ी है।
३३:४०
مَّاनहींكَانَहैंkānaمُحَمَّدٌमुहम्मदmuḥammadunأَبَآबापabāأَحَدٍۢकिसी एक केaḥadinمِّنofminرِّجَالِكُمْतुम्हारे मर्दों में सेrijālikumوَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinرَّسُولَरसूल हैंrasūlaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَخَاتَمَand Sealwakhātamaٱلنَّبِيِّـۧنَ ۗऔर ख़ात्म अन नबिय्यीन हैंl-nabiyīnaوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ कोshayinعَلِيمًۭاख़ूब जानने वालाʿalīman٤٠
मुहम्मद तुम्हारे पुरुषों में से किसी के पिता1 नहीं हैं। बल्कि वह अल्लाह के रसूल और नबियों के समापक2 हैं। और अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।
३३:४१
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟जो ईमान लाए होāmanūٱذْكُرُوا۟ज़िक्र करोudh'kurūٱللَّهَअल्लाह काl-lahaذِكْرًۭاज़िक्र करनाdhik'ranكَثِيرًۭاकसरत सेkathīran٤١
ऐ ईमान वालो! अल्लाह को बहुलता से याद करो।1
३३:४२
وَسَبِّحُوهُऔर तस्बीह करो उसकीwasabbiḥūhuبُكْرَةًۭसुबहbuk'ratanوَأَصِيلًاऔर शामwa-aṣīlan٤٢
तथा सुबह व शाम उसकी पवित्रता बयान करो।
३३:४३
هُوَवो ही हैhuwaٱلَّذِىजोalladhīيُصَلِّىरहमत भेजता हैyuṣallīعَلَيْكُمْतुम परʿalaykumوَمَلَـٰٓئِكَتُهُۥऔर उसके फ़रिश्ते(दुआ करते हैं)wamalāikatuhuلِيُخْرِجَكُمताकि वो निकाले तुम्हेंliyukh'rijakumمِّنَfromminaٱلظُّلُمَـٰتِअंधेरों सेl-ẓulumātiإِلَىtoilāٱلنُّورِ ۚतरफ़ रौशनी केl-nūriوَكَانَऔर है वोwakānaبِٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों परbil-mu'minīnaرَحِيمًۭاख़ूब रहम फ़रमाने वालाraḥīman٤٣
वही है, जो तुमपर दया अवतरित करता है और उसके फ़रिश्ते भी (तुम्हारे लिए प्रार्थना करते हैं), ताकि वह तुम्हें अँधेरों से निकाल कर प्रकाश1 की ओर लाए। तथा वह ईमान वालों पर बहुत दयालु है।
३३:४४
تَحِيَّتُهُمْउनकी दुआ होगीtaḥiyyatuhumيَوْمَजिस दिनyawmaيَلْقَوْنَهُۥवो मिलेंगे उससेyalqawnahuسَلَـٰمٌۭ ۚसलामsalāmunوَأَعَدَّऔर उसने तैयार कर रखा हैwa-aʿaddaلَهُمْउनके लिएlahumأَجْرًۭاअजरajranكَرِيمًۭاउम्दा/बाइज़्ज़तkarīman٤٤
जिस दिन वे अपने पालनहार से मिलेंगे, उनका अभिवादन सलाम होगा। और उसने उनके लिए सम्मानजनका प्रतिफल तैयार कर रखा है।
३३:४५
يَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuإِنَّآबेशक हमinnāأَرْسَلْنَـٰكَभेजा हमने आपकोarsalnākaشَـٰهِدًۭاगवाही देने वालाshāhidanوَمُبَشِّرًۭاऔर ख़ुशख़बरी देने वालाwamubashiranوَنَذِيرًۭاऔर डराने वाला (बना कर)wanadhīran٤٥
ऐ नबी! हमने आपको गवाही1 देने वाला, शुभ सूचना देने वाला2 और डराने वाला3 बनाकर भेजा है।
३३:४६
وَدَاعِيًاऔर दावत देने वालाwadāʿiyanإِلَىtoilāٱللَّهِतरफ़ अल्लाह केl-lahiبِإِذْنِهِۦउसके इज़न सेbi-idh'nihiوَسِرَاجًۭاऔर चिराग़wasirājanمُّنِيرًۭاरौशनmunīran٤٦
तथा अल्लाह की अनुमति से उसकी ओर बुलाने वाला और एक प्रकाशमान दीप (बनाकर भेजा है)।1
३३:४७
وَبَشِّرِऔर ख़ुशख़बरी दे दीजिएwabashiriٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों कोl-mu'minīnaبِأَنَّकि बेशकbi-annaلَهُمउनके लिएlahumمِّنَ(is) fromminaٱللَّهِअल्लाह की तरफ़ से हैl-lahiفَضْلًۭاफ़ज़लfaḍlanكَبِيرًۭاबहुत बड़ाkabīran٤٧
तथा आप ईमान वालों को शुभ सूचना दे दें कि उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ा अनुग्रह है।
३३:४८
وَلَاऔर नाwalāتُطِعِआप इताअत कीजिएtuṭiʿiٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों कीl-kāfirīnaوَٱلْمُنَـٰفِقِينَऔर मुनाफ़िक़ों कीwal-munāfiqīnaوَدَعْऔर नज़र अंदाज़ कर दीजिएwadaʿأَذَىٰهُمْउनकी अज़ियत रसानी कोadhāhumوَتَوَكَّلْऔर तवक्कल कीजिएwatawakkalعَلَىinʿalāٱللَّهِ ۚअल्लाह परl-lahiوَكَفَىٰऔर काफ़ी हैwakafāبِٱللَّهِअल्लाहbil-lahiوَكِيلًۭاकारसाज़wakīlan٤٨
तथा आप काफ़िरों और मुनाफ़िकों की बात न मानें, तथा उनके कष्ट पहुँचाने की परवाह न करें, और अल्लाह ही पर भरोसा रखें, तथा अल्लाह काम बनाने के लिए काफ़ी है।
३३:४९
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوٓا۟ईमान लाए होāmanūإِذَاजबidhāنَكَحْتُمُनिकाह करो तुमnakaḥtumuٱلْمُؤْمِنَـٰتِमोमिन औरतों सेl-mu'minātiثُمَّफिरthummaطَلَّقْتُمُوهُنَّतलाक़ दे दो तुम उन्हेंṭallaqtumūhunnaمِنbeforeminقَبْلِइससे पहलेqabliأَنकिanتَمَسُّوهُنَّतुम छुओ उन्हेंtamassūhunnaفَمَاतो नहींfamāلَكُمْतुम्हारे लिएlakumعَلَيْهِنَّउन परʿalayhinnaمِنْanyminعِدَّةٍۢकोई इद्दतʿiddatinتَعْتَدُّونَهَا ۖतुम शुमार करो उसेtaʿtaddūnahāفَمَتِّعُوهُنَّतो कुछ फ़ायदा दो उन्हेंfamattiʿūhunnaوَسَرِّحُوهُنَّऔर रुख़्सत करो उन्हेंwasarriḥūhunnaسَرَاحًۭاरुख़्सत करनाsarāḥanجَمِيلًۭاभले तरीक़े सेjamīlan٤٩
ऐ ईमान वालो! जब तुम ईमान वाली स्त्रियों से विवाह करो, फिर उन्हें हाथ लगाने से पहले ही तलाक़ दे दो, तो तुम्हारे लिए उनपर कोई इद्दत1 नहीं, जिसकी तुम गिनती करो। अतः तुम उन्हें कुछ सामान दे दो और उन्हें भलाई के साथ विदा कर दो।
३३:५०
يَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuإِنَّآबेशक हमinnāأَحْلَلْنَاहलाल कर दीं हमनेaḥlalnāلَكَआपके लिएlakaأَزْوَٰجَكَबीवियाँ आपकीazwājakaٱلَّـٰتِىٓवो जिन्हेंallātīءَاتَيْتَदिए आपनेātaytaأُجُورَهُنَّमहर उनकेujūrahunnaوَمَاऔर जिनकाwamāمَلَكَتْमालिक हैmalakatيَمِينُكَदायाँ हाथ आपकाyamīnukaمِمَّآउसमें से जोmimmāأَفَآءَलौटायाafāaٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuعَلَيْكَआप परʿalaykaوَبَنَاتِऔर बेटियाँwabanātiعَمِّكَआपके चचा कीʿammikaوَبَنَاتِऔर बेटियाँwabanātiعَمَّـٰتِكَआपकी फ़ूफ़ीयों कीʿammātikaوَبَنَاتِऔर बेटियाँwabanātiخَالِكَआपके मामूं कीkhālikaوَبَنَاتِऔर बेटियाँwabanātiخَـٰلَـٰتِكَआपकी ख़ालाओं कीkhālātikaٱلَّـٰتِىवो जिन्होंनेallātīهَاجَرْنَहिजरत कीhājarnaمَعَكَआपके साथmaʿakaوَٱمْرَأَةًۭऔर कोई औरतwa-im'ra-atanمُّؤْمِنَةًमोमिनाmu'minatanإِنअगरinوَهَبَتْवो हिबा कर देwahabatنَفْسَهَاअपने नफ़्स कोnafsahāلِلنَّبِىِّनबी के लिएlilnnabiyyiإِنْअगरinأَرَادَइरादा करेंarādaٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuأَنकिanيَسْتَنكِحَهَاवो निकाह करें उससेyastankiḥahāخَالِصَةًۭख़ास हैkhāliṣatanلَّكَआपके लिएlakaمِنexcludingminدُونِसिवाएdūniٱلْمُؤْمِنِينَ ۗमोमिनें केl-mu'minīnaقَدْतहक़ीक़qadعَلِمْنَاजान लिया हमनेʿalim'nāمَاजोفَرَضْنَاफ़र्ज़ किया हमनेfaraḍnāعَلَيْهِمْउन परʿalayhimفِىٓconcerningأَزْوَٰجِهِمْउनकी बीवियों के मामले मेंazwājihimوَمَاऔर जिनकेwamāمَلَكَتْमालिक हैंmalakatأَيْمَـٰنُهُمْदाऐं हाथ उनकेaymānuhumلِكَيْلَاताकि नाlikaylāيَكُونَहोyakūnaعَلَيْكَआप परʿalaykaحَرَجٌۭ ۗकोई तंगीḥarajunوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuغَفُورًۭاबहुत बख़्शने वालाghafūranرَّحِيمًۭاनिहायत रहम करने वालाraḥīman٥٠
ऐ नबी! निःसंदेह हमने आपके लिए आपकी वे पत्नियाँ हलाल (वैध) कर दी हैं, जिन्हें आपने उनका महर चुका दिया है, तथा वे लौंडियाँ (भी) जो आपके स्वामित्व में हैं, उन लौंडियों में से जो अल्लाह ने ग़नीमत के धन से आपको1 प्रदान की हैं। तथा आपके चाचा की बेटियाँ, आपकी फूफियों की बेटियाँ, आपके मामा की बेटियाँ और आपकी मौसियों की बेटियाँ, जिन्होंने आपके साथ हिजरत की है। तथा वह ईमान वाली महिला भी, जो स्वयं को नबी के लिए दान कर दे, यदि नबी उससे विवाह करना चाहे। यह विशेष रूप से आपके लिए है, अन्य ईमान वालों के लिए नहीं। निश्चय ही हम जानते हैं जो कुछ हमने उनपर उनकी पत्नियों तथा उनके स्वामित्व में आई हुई दासियों के संबंध2 में फ़र्ज़ किया है; ताकि तुमपर कोई तंगी न रहे। और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयालु है।
३३:५१
۞ تُرْجِىआप दूर रखेंtur'jīمَنजिसेmanتَشَآءُआप चाहेंtashāuمِنْهُنَّउनमें सेmin'hunnaوَتُـْٔوِىٓऔर आप जगह देंwatu'wīإِلَيْكَअपने पासilaykaمَنजिसेmanتَشَآءُ ۖआप चाहेंtashāuوَمَنِऔर जिसेwamaniٱبْتَغَيْتَतलब करें आपib'taghaytaمِمَّنْउनमें से जिसेmimmanعَزَلْتَअलग कर दिया हो आपनेʿazaltaفَلَاतो नहींfalāجُنَاحَकोई गुनाहjunāḥaعَلَيْكَ ۚआप परʿalaykaذَٰلِكَयेdhālikaأَدْنَىٰٓक़रीबतर हैadnāأَنकिanتَقَرَّठंडी होंtaqarraأَعْيُنُهُنَّआँखें उनकीaʿyunuhunnaوَلَاऔर नाwalāيَحْزَنَّवो ग़मगीन होंyaḥzannaوَيَرْضَيْنَऔर वो राज़ी रहेंwayarḍaynaبِمَآउस पर जोbimāءَاتَيْتَهُنَّदें आप उन्हेंātaytahunnaكُلُّهُنَّ ۚसब की सबkulluhunnaوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuيَعْلَمُवो जानता हैyaʿlamuمَاजोفِى(is) inقُلُوبِكُمْ ۚतुम्हारे दिलों में हैqulūbikumوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلِيمًاबहुत इल्म वालाʿalīmanحَلِيمًۭاख़ूब हिल्म वालाḥalīman٥١
आप अपनी पत्नियों में से जिसे चाहें (उसकी बारी) स्थगित कर दें, और जिसे चाहें अपने साथ रखें, और जिन्हें आपने अलग रखा है, उनमें से जिसकी भी आप (अपने पास रखने की) इच्छा करें, तो इसमें आपपर कोई दोष नहीं है। यह इस बात के अधिक निकट है कि उनकी आँखें ठंडी रहें और वे शोकाकुल न हों, तथा जो कुछ आप उन्हें दें, उससे वे सब संतुष्ट रहें। और जो कुछ तुम्हारे दिलों1 में है, अल्लाह उससे अवगत है। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, बहुत सहनशील2 है।
३३:५२
لَّا(It is) notيَحِلُّनहीं हलालyaḥilluلَكَआपके लिएlakaٱلنِّسَآءُऔरतेंl-nisāuمِنۢafter (this)minبَعْدُबाद उसकेbaʿduوَلَآऔर नाwalāأَنकिanتَبَدَّلَआप बदल लेंtabaddalaبِهِنَّउनके बदलेbihinnaمِنْforminأَزْوَٰجٍۢकोई और बीवियाँazwājinوَلَوْऔर अगरचेwalawأَعْجَبَكَपसंद आए आपकोaʿjabakaحُسْنُهُنَّहुसन उनकाḥus'nuhunnaإِلَّاमगरillāمَاजिनकाمَلَكَتْमालिक हैmalakatيَمِينُكَ ۗदायाँ हाथ आपकाyamīnukaوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinرَّقِيبًۭاख़ूब निगरानraqīban٥٢
(ऐ नबी!) इसके पश्चात् आपके लिए अन्य स्त्रियाँ हलाल (वैध) नहीं हैं, और न यह कि आप उन्हें दूसरी पत्नियों से बदलें1, यद्यपि उनका सौंदर्य आपको भा जाए, सिवाय उन दासियों के जो आपके स्वामित्व में आ जाएँ। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु का निरीक्षक है।
३३:५३
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notتَدْخُلُوا۟ना तुम दाख़िल होtadkhulūبُيُوتَघरों मेंbuyūtaٱلنَّبِىِّनबी केl-nabiyiإِلَّآमगरillāأَنये किanيُؤْذَنَइजाज़त दी जाएyu'dhanaلَكُمْतुम्हेंlakumإِلَىٰforilāطَعَامٍतरफ़ खाने केṭaʿāminغَيْرَनाghayraنَـٰظِرِينَइन्तिज़ार करने वाले होnāẓirīnaإِنَىٰهُउसकी तैयारी काināhuوَلَـٰكِنْऔर लेकिनwalākinإِذَاजबidhāدُعِيتُمْबुलाए जाओ तुमduʿītumفَٱدْخُلُوا۟तो दाख़िल हो जाओfa-ud'khulūفَإِذَاफिर जबfa-idhāطَعِمْتُمْखाना खालो तुमṭaʿim'tumفَٱنتَشِرُوا۟तो मुन्तशिर हो जाओfa-intashirūوَلَاऔर ना होwalāمُسْتَـْٔنِسِينَदिल लगाने वालेmus'tanisīnaلِحَدِيثٍ ۚबातों के लिएliḥadīthinإِنَّबेशकinnaذَٰلِكُمْयेdhālikumكَانَहैkānaيُؤْذِىईज़ा देताyu'dhīٱلنَّبِىَّनबी कोl-nabiyaفَيَسْتَحْىِۦतो वो शर्माते हैंfayastaḥyīمِنكُمْ ۖतुम सेminkumوَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuلَاis not shyيَسْتَحْىِۦनहीं शर्माताyastaḥyīمِنَofminaٱلْحَقِّ ۚहक़ सेl-ḥaqiوَإِذَاऔर जबwa-idhāسَأَلْتُمُوهُنَّसवाल करो तुम उनसेsa-altumūhunnaمَتَـٰعًۭاकिसी चीज़ काmatāʿanفَسْـَٔلُوهُنَّतो सवाल करो उनसेfasalūhunnaمِنfromminوَرَآءِपीछे सेwarāiحِجَابٍۢ ۚपर्दे केḥijābinذَٰلِكُمْये बातdhālikumأَطْهَرُज़्यादा पाकीज़ा हैaṭharuلِقُلُوبِكُمْतुम्हारे दिलों के लिएliqulūbikumوَقُلُوبِهِنَّ ۚऔर उनके दिलों के लिएwaqulūbihinnaوَمَاऔर नहींwamāكَانَहै (मुनासिब)kānaلَكُمْतुम्हारे लिएlakumأَنकिanتُؤْذُوا۟तुम ईज़ा दोtu'dhūرَسُولَ(the) Messengerrasūlaٱللَّهِअल्लाह के रसूल कोl-lahiوَلَآऔर नाwalāأَنये किanتَنكِحُوٓا۟तुम निकाह करोtankiḥūأَزْوَٰجَهُۥउनकी बीवियों सेazwājahuمِنۢafter himminبَعْدِهِۦٓबाद इसकेbaʿdihiأَبَدًا ۚकभी भीabadanإِنَّबेशकinnaذَٰلِكُمْये (बात)dhālikumكَانَहैkānaعِندَनज़दीकʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiعَظِيمًاबहुत बड़ीʿaẓīman٥٣
ऐ ईमान वालो! नबी के घरों में प्रवेश न करो, सिवाय इसके कि तुम्हें भोजन के लिए अनुमति दी जाए। परंतु भोजन पकने की प्रतीक्षा में (देर तक बैठे) न रहो। बल्कि जब बुलाए जाओ, तो प्रवेश करो। फिर जब भोजन कर लो, तो निकल जाओ। बातों में न लगे रहो। निश्चय ही इससे नबी को कष्ट पहुँचता है। लेकिन उन्हें तुमसे (बाहर जाने को कहने में) शर्म आती है। किंतु अल्लाह सत्य बात से नहीं शरमाता।1 तथा जब तुम नबी की पत्नियों से कुछ माँगो, तो पर्दे के पीछे से माँगो। यह तुम्हारे दिलों तथा उनके दिलों के लिए अधिक पवित्रता का कारण है। और तुम्हारे लिए यह उचित नहीं है कि तुम अल्लाह के रसूल को कष्ट पहुँचाओ, और न यह कि तुम उनके पश्चात् कभी उनकी पत्नियों से विवाह करो। निःसंदेह यह अल्लाह के निकट बहुत बड़ा (पाप) है।
३३:५४
إِنअगरinتُبْدُوا۟तुम ज़ाहिर करोगेtub'dūشَيْـًٔاकोई चीज़shayanأَوْयाawتُخْفُوهُतुम छुपाओगे उसेtukh'fūhuفَإِنَّतो बेशकfa-innaٱللَّهَअल्लाहl-lahaكَانَहैkānaبِكُلِّहरbikulliشَىْءٍचीज़ कोshayinعَلِيمًۭاख़ूब जानने वालाʿalīman٥٤
यदि तुम किसी चीज़ को प्रकट करो अथवा उसे गुप्त रखो, अल्लाह प्रत्येक वस्तु को अच्छी तरह जानता है।
३३:५५
لَّا(There is) noجُنَاحَनहीं कोई गुनाहjunāḥaعَلَيْهِنَّउन(औरतों)परʿalayhinnaفِىٓconcerningءَابَآئِهِنَّअपने बापों(के सामने आने)मेंābāihinnaوَلَآऔर नाwalāأَبْنَآئِهِنَّअपने बेटों केabnāihinnaوَلَآऔर नाwalāإِخْوَٰنِهِنَّअपने भाईयों केikh'wānihinnaوَلَآऔर नाwalāأَبْنَآءِबेटों केabnāiإِخْوَٰنِهِنَّअपने भाईयों केikh'wānihinnaوَلَآऔर नाwalāأَبْنَآءِबेटों केabnāiأَخَوَٰتِهِنَّअपनी बहनों केakhawātihinnaوَلَاऔर नाwalāنِسَآئِهِنَّअपनी औरतों केnisāihinnaوَلَاऔर नाwalāمَاउनके जोمَلَكَتْमालिक हैंmalakatأَيْمَـٰنُهُنَّ ۗदाऐं हाथ उनकेaymānuhunnaوَٱتَّقِينَऔर डरती रहोwa-ittaqīnaٱللَّهَ ۚअल्लाह सेl-lahaإِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaكَانَहैkānaعَلَىٰऊपरʿalāكُلِّहरkulliشَىْءٍۢचीज़ केshayinشَهِيدًاख़ूब गवाहshahīdan٥٥
स्त्रियों पर अपने पिताओं, अपने बेटों, अपने भाइयों, अपने भाइयों के बेटों (भतीजों), अपनी बहनों के बेटों (भांजों), अपनी (मेल-जोल की) स्त्रियों और उन (दासों एवं दासियों) से, जो उनके स्वामित्व में हैं, पर्दा न करने में कोई पाप नहीं है। और (ऐ स्त्रियो) तुम अल्लाह से डरती रहो। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक चीज़ का साक्षी है।
३३:५६
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाहl-lahaوَمَلَـٰٓئِكَتَهُۥऔर उसके फ़रिश्तेwamalāikatahuيُصَلُّونَसलात/दरूद भेजते हैंyuṣallūnaعَلَىuponʿalāٱلنَّبِىِّ ۚनबी परl-nabiyiيَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūصَلُّوا۟सलात/दरूद भेजोṣallūعَلَيْهِआप परʿalayhiوَسَلِّمُوا۟और सलाम भेजोwasallimūتَسْلِيمًاख़ूब सलाम भेजनाtaslīman٥٦
निःसंदेह अल्लाह तथा उसके फ़रिश्ते नबी पर दुरूद1 भेजते हैं। ऐ ईमान वालो! तुम (भी) उनपर दुरूद तथा बहुत सलाम भेजा करो।
३३:५७
إِنَّबेशकinnaٱلَّذِينَवो जोalladhīnaيُؤْذُونَईज़ा देते हैंyu'dhūnaٱللَّهَअल्लाह कोl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कोwarasūlahuلَعَنَهُمُलानत की उन परlaʿanahumuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuفِىinٱلدُّنْيَاदुनिया मेंl-dun'yāوَٱلْـَٔاخِرَةِऔर आख़िरत मेंwal-ākhiratiوَأَعَدَّऔर उसने तैयार कर रखा हैwa-aʿaddaلَهُمْउनके लिएlahumعَذَابًۭاअज़ाबʿadhābanمُّهِينًۭاरुसवा करने वालाmuhīnan٥٧
निःसंदेह जो लोग अल्लाह तथा उसके रसूल को कष्ट पहुँचाते हैं, अल्लाह ने उन्हें दुनिया एवं आखिरत में धिक्कार दिया है और उनके लिए अपमानकारी यातना तैयार की है।
३३:५८
وَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaيُؤْذُونَईज़ा देते हैंyu'dhūnaٱلْمُؤْمِنِينَमोमिन मर्दों कोl-mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِऔर मोमिन औरतों कोwal-mu'minātiبِغَيْرِबग़ैर( किसी गुनाह के)bighayriمَاजोٱكْتَسَبُوا۟उन्होंने कमायाik'tasabūفَقَدِतो तहक़ीक़faqadiٱحْتَمَلُوا۟उन्होंने उठा लियाiḥ'tamalūبُهْتَـٰنًۭاबोहतानbuh'tānanوَإِثْمًۭاऔर गुनाहwa-ith'manمُّبِينًۭاखुलाmubīnan٥٨
और जो लोग ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों को कष्ट पहुँचाते हैं, बिना इसके कि उन्होंने कुछ (अपराध) किया हो, तो उन्होंने मिथ्यारोपण और स्पष्ट पाप का बोझ उठाया।
३३:५९
يَـٰٓأَيُّهَاyāayyuhāٱلنَّبِىُّनबीl-nabiyuقُلकह दीजिएqulلِّأَزْوَٰجِكَअपनी बीवियों सेli-azwājikaوَبَنَاتِكَऔर अपनी बेटियों सेwabanātikaوَنِسَآءِऔर औरतों सेwanisāiٱلْمُؤْمِنِينَमोमिनों कीl-mu'minīnaيُدْنِينَकि वो लटका लेंyud'nīnaعَلَيْهِنَّअपने ऊपरʿalayhinnaمِن[of]minجَلَـٰبِيبِهِنَّ ۚअपनी चादरों में सेjalābībihinnaذَٰلِكَयेdhālikaأَدْنَىٰٓक़रीबतर हैadnāأَنकिanيُعْرَفْنَवो पहचान ली जाऐंyuʿ'rafnaفَلَاफिर नाfalāيُؤْذَيْنَ ۗवो ईज़ा दी जाऐंyu'dhaynaوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuغَفُورًۭاबहुत बख़्शने वालाghafūranرَّحِيمًۭاनिहायत रहम करने वालाraḥīman٥٩
ऐ नबी! अपनी पत्नियों, अपनी बेटियों और ईमान वाले लोगों की स्त्रियों से कह दें कि वे अपने ऊपर अपनी चादरें डाल लिया करें। यह इसके अधिक निकट है कि वे पहचान ली जाएँ, फिर उन्हें कष्ट न पहुँचाया1 जाए। और अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान् है।
३३:६०
۞ لَّئِنअलबत्ता अगरla-inلَّمْनाlamيَنتَهِबाज़ आएyantahiٱلْمُنَـٰفِقُونَमुनाफ़िक़l-munāfiqūnaوَٱلَّذِينَऔर वो जोwa-alladhīnaفِىinقُلُوبِهِمदिलों में उनकेqulūbihimمَّرَضٌۭमर्ज़ हैmaraḍunوَٱلْمُرْجِفُونَऔर झूठी ख़बरें उड़ाने वालेwal-mur'jifūnaفِىinٱلْمَدِينَةِमदीने मेंl-madīnatiلَنُغْرِيَنَّكَअलबत्ता हम ज़रूर मुसल्लत कर देंगे आपकोlanugh'riyannakaبِهِمْउन परbihimثُمَّफिरthummaلَاnotيُجَاوِرُونَكَना वो हमसाए रहेंगे आपकेyujāwirūnakaفِيهَآउसमेंfīhāإِلَّاमगरillāقَلِيلًۭاबहुत थोड़ाqalīlan٦٠
यदि मुनाफ़िक़1 तथा वे लोग जिनके दिलों में रोग है और मदीना में अफ़वाह फैलाने वाले बाज़ नहीं आए, तो हम आपको उनके पीछे लगा देंगे। फिर वे आपके साथ उसमें थोड़े ही समय के लिए रह सकेंगे।
३३:६१
مَّلْعُونِينَ ۖलानत किए गएmalʿūnīnaأَيْنَمَاजहाँ कहींaynamāثُقِفُوٓا۟वो पाऐ जाऐंthuqifūأُخِذُوا۟वो पकड़ लिए जाऐंukhidhūوَقُتِّلُوا۟और क़त्ल कर दिए जाऐंwaquttilūتَقْتِيلًۭاबुरी तरह क़त्ल किया जानाtaqtīlan٦١
वे धिक्कारे हुए हैं। जहाँ भी वे पाए जाएँ, पकड़ लिए जाएँगे तथा बुरी तरह वध कर दिए जाएँगे।
३३:६२
سُنَّةَतरीक़ा हैsunnataٱللَّهِअल्लाह काl-lahiفِىwithٱلَّذِينَउनके बारे में जोalladhīnaخَلَوْا۟गुज़र चुकेkhalawمِنbeforeminقَبْلُ ۖउससे पहलेqabluوَلَنऔर हरगिज़ नाwalanتَجِدَआप पाऐंगेtajidaلِسُنَّةِतरीक़े मेंlisunnatiٱللَّهِअल्लाह केl-lahiتَبْدِيلًۭاकोई तब्दीलीtabdīlan٦٢
यही अल्लाह का नियम रहा है उन लोगों के विषय में, जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं, तथा आप अल्लाह के नियम में कदापि कोई परिवर्तन नहीं पाएँगे।
३३:६३
يَسْـَٔلُكَसवाल करते हैं आप सेyasalukaٱلنَّاسُलोगl-nāsuعَنِaboutʿaniٱلسَّاعَةِ ۖक़यामत के बारे मेंl-sāʿatiقُلْकह दीजिएqulإِنَّمَاबेशकinnamāعِلْمُهَاइल्म उसकाʿil'muhāعِندَपास हैʿindaٱللَّهِ ۚअल्लाह केl-lahiوَمَاऔर क्या चीज़wamāيُدْرِيكَबताए आपकोyud'rīkaلَعَلَّशायद किlaʿallaٱلسَّاعَةَक़यामतl-sāʿataتَكُونُहो वोtakūnuقَرِيبًاक़रीब हीqarīban٦٣
(ऐ रसूल!) लोग1 आपसे क़ियामत के विषय में पूछते हैं। आप कह दें कि उसका ज्ञान तो मात्र अल्लाह ही के पास है। और आपको क्या मालूम शायद क़ियामत निकट ही हो?
३३:६४
إِنَّबेशकinnaٱللَّهَअल्लाह नेl-lahaلَعَنَलानत की हैlaʿanaٱلْكَـٰفِرِينَकाफ़िरों परl-kāfirīnaوَأَعَدَّऔर उसने तैयार कर रखा हैwa-aʿaddaلَهُمْउनके लिएlahumسَعِيرًاभड़कती आग कोsaʿīran٦٤
निःसंदेह अल्लाह ने काफ़िरों को धिक्कार दिया है और उनके लिए भड़कती हुई आग तैयार कर रखी है।
३३:६५
خَـٰلِدِينَहमेश रहने वाले हैंkhālidīnaفِيهَآउसमेंfīhāأَبَدًۭا ۖहमेशा-हमेशाabadanلَّاnotيَجِدُونَना वो पाऐंगेyajidūnaوَلِيًّۭاकोई दोस्तwaliyyanوَلَاऔर नाwalāنَصِيرًۭاकोई मददगारnaṣīran٦٥
वे उसमें सदैव रहेंगे। वे न कोई दोस्त पाएँगे और न कोई सहायक।
३३:६६
يَوْمَजिस दिनyawmaتُقَلَّبُउलट-पलट किए जाऐंगेtuqallabuوُجُوهُهُمْचेहरे उनकेwujūhuhumفِىinٱلنَّارِआग मेंl-nāriيَقُولُونَवो कहेंगेyaqūlūnaيَـٰلَيْتَنَآऐ काश कि हमyālaytanāأَطَعْنَاइताअत करते हमaṭaʿnāٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَأَطَعْنَاऔर इताअत करते हमwa-aṭaʿnāٱلرَّسُولَا۠रसूल कीl-rasūlā٦٦
जिस दिन उनके चेहरे आग में उलटे-पलटे जाएँगे, तो वे कहेंगे : ऐ काश, हमने अल्लाह का आज्ञापालन किया होता और हमने रसूल का आज्ञापालन किया होता।
३३:६७
وَقَالُوا۟और वो कहेंगेwaqālūرَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāإِنَّآबेशक हमinnāأَطَعْنَاइताअत की हमनेaṭaʿnāسَادَتَنَاअपने सरदारों कीsādatanāوَكُبَرَآءَنَاऔर अपने बड़ों कीwakubarāanāفَأَضَلُّونَاतो उन्होंने भटका दिया हमेंfa-aḍallūnāٱلسَّبِيلَا۠रास्ते सेl-sabīlā٦٧
तथा वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने सरदारों और बड़े लोगों का कहा माना, तो उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया।
३३:६८
رَبَّنَآऐ हमारे रबrabbanāءَاتِهِمْदे उन्हेंātihimضِعْفَيْنِदोगुनाḍiʿ'fayniمِنَ[of]minaٱلْعَذَابِअज़ाब में सेl-ʿadhābiوَٱلْعَنْهُمْऔर लानत फ़रमा उन परwal-ʿanhumلَعْنًۭاलानतlaʿnanكَبِيرًۭاबहुत बड़ीkabīran٦٨
ऐ हमारे पालनहार! उन्हें दोहरी यातना दे और उनपर बड़ी धिक्कार कर।
३३:६९
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūلَا(Do) notتَكُونُوا۟ना तुम हो जाओtakūnūكَٱلَّذِينَउनकी तरह जिन्होंनेka-alladhīnaءَاذَوْا۟अज़ीयतें दींādhawمُوسَىٰमूसा कोmūsāفَبَرَّأَهُतो बरी कर दिया उसेfabarra-ahuٱللَّهُअल्लाह नेl-lahuمِمَّاउससे जोmimmāقَالُوا۟ ۚउन्होंने कहा थाqālūوَكَانَऔर था वोwakānaعِندَनज़दीकʿindaٱللَّهِअल्लाह केl-lahiوَجِيهًۭاबहुत बाइज़्ज़तwajīhan٦٩
ऐ ईमान वालो! उन लोगों के समान न हो जाओ, जिन्होंने मूसा को कष्ट पहुँचाया, तो अल्लाह ने उन्हें उनकी कही हुई बातों से बरी1 कर दिया, और वह अल्लाह के यहाँ प्रतिष्ठावान थे।
३३:७०
يَـٰٓأَيُّهَاO you who believeyāayyuhāٱلَّذِينَऐ लोगो जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाए होāmanūٱتَّقُوا۟डरोittaqūٱللَّهَअल्लाह सेl-lahaوَقُولُوا۟और कहोwaqūlūقَوْلًۭاबातqawlanسَدِيدًۭاसीधीsadīdan٧٠
ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो तथा सही और सच्ची बात कहो।
३३:७१
يُصْلِحْवो इस्लाह कर देगाyuṣ'liḥلَكُمْतुम्हारे लिएlakumأَعْمَـٰلَكُمْतुम्हारे आमाल कीaʿmālakumوَيَغْفِرْऔर वो बख़्श देगाwayaghfirلَكُمْतुम्हारे लिएlakumذُنُوبَكُمْ ۗतुम्हारे गुनाहों कोdhunūbakumوَمَنऔर जो कोईwamanيُطِعِइताअत करेगाyuṭiʿiٱللَّهَअल्लाह कीl-lahaوَرَسُولَهُۥऔर उसके रसूल कीwarasūlahuفَقَدْतो तहक़ीक़faqadفَازَवो कामयाब हुआfāzaفَوْزًاकामयाब होनाfawzanعَظِيمًاबहुत बड़ाʿaẓīman٧١
वह तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्मों को सुधार देगा, तथा तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और जो अल्लाह तथा उसके रसूल का आज्ञापालन करे, उसने बड़ी सफलता प्राप्त कर ली।
३३:७२
إِنَّاबेशक हमinnāعَرَضْنَاपेश किया हमनेʿaraḍnāٱلْأَمَانَةَअमानत कोl-amānataعَلَىtoʿalāٱلسَّمَـٰوَٰتِआसमानों परl-samāwātiوَٱلْأَرْضِऔर ज़मीन परwal-arḍiوَٱلْجِبَالِऔर पहाड़ों परwal-jibāliفَأَبَيْنَतो उन्होंने इन्कार कर दियाfa-abaynaأَنकिanيَحْمِلْنَهَاवो उठाऐं उसेyaḥmil'nahāوَأَشْفَقْنَऔर वो डर गएwa-ashfaqnaمِنْهَاउससेmin'hāوَحَمَلَهَاऔर उठा लिया उसेwaḥamalahāٱلْإِنسَـٰنُ ۖइन्सान नेl-insānuإِنَّهُۥबेशक वोinnahuكَانَहैkānaظَلُومًۭاबहुत ज़ालिमẓalūmanجَهُولًۭاबहुत जाहिलjahūlan٧٢
हमने अमानत1 को आकाशों और धरती तथा पर्वतों के समक्ष प्रस्तुत किया, लेकिन उन सबने उसका भार उठाने से इनकार कर दिया और वे उससे डर गए। परंतु इनसान ने उसे उठा लिया। निःसंदेह वह बड़ा ही अत्याचारी2 औ बहुत अज्ञानी है।
३३:७३
لِّيُعَذِّبَताकि अज़ाब देliyuʿadhibaٱللَّهُअल्लाहl-lahuٱلْمُنَـٰفِقِينَमुनाफ़िक़ मर्दोंl-munāfiqīnaوَٱلْمُنَـٰفِقَـٰتِऔर मुनाफ़िक़ औरतों कोwal-munāfiqātiوَٱلْمُشْرِكِينَऔर मुशरिक मर्दों कोwal-mush'rikīnaوَٱلْمُشْرِكَـٰتِऔर मुशरिक औरतों कोwal-mush'rikātiوَيَتُوبَऔर मेहरबान हो जाएwayatūbaٱللَّهُअल्लाहl-lahuعَلَىtoʿalāٱلْمُؤْمِنِينَमोमिन मर्दों परl-mu'minīnaوَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ۗऔर मोमिन औरतों परwal-mu'minātiوَكَانَऔर हैwakānaٱللَّهُअल्लाहl-lahuغَفُورًۭاबहुत बख़्शने वालाghafūranرَّحِيمًۢاनिहायत रहम करने वालाraḥīman٧٣
ताकि अल्लाह मुनाफ़िक़ पुरुषों तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियों और मुश्रिक पुरुषों तथा मुश्रिक स्त्रियों को यातना दे, तथा अल्लाह ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों की तौबा क़बूल करे। और अल्लाह अति क्षमाशील, बड़ा दयावान् है।