८४
अल-इंशिक़ाक़
الإنشقاق
सूरह अल-इंशिक़ाक़ (الإنشقاق) पवित्र क़ुरआन का ८४ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें २५ आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।
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बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
८४:१
إِذَاजबidhāٱلسَّمَآءُआसमानl-samāuٱنشَقَّتْफट जाऐगाinshaqqat١
जब आकाश फट जाएगा।
८४:२
وَأَذِنَتْऔर वो कान लगाए हुए हैwa-adhinatلِرَبِّهَاअपने रब के लिएlirabbihāوَحُقَّتْऔर वो हक़ दिया गया हैwaḥuqqat٢
और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगा और यही उसके योग्य है।
८४:३
وَإِذَاऔर जबwa-idhāٱلْأَرْضُज़मीनl-arḍuمُدَّتْफैला दी जाएगीmuddat٣
तथा जब धरती फैला दी जाएगी।
८४:४
وَأَلْقَتْऔर वो डाल देगीwa-alqatمَاजो कुछmāفِيهَاउसमें हैfīhāوَتَخَلَّتْऔर वो ख़ाली हो जाएगीwatakhallat٤
और जो कुछ उसके भीतर है, उसे निकाल बाहर फेंक देगी और खाली हो जाएगी।
८४:५
وَأَذِنَتْऔर वो कान लगाए हुए हैwa-adhinatلِرَبِّهَاअपने रब के लिएlirabbihāوَحُقَّتْऔर वो हक़ दी गई हैwaḥuqqat٥
और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगी और यही उसके योग्य है।1
८४:६
يَـٰٓأَيُّهَاऐyāayyuhāٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuإِنَّكَबेशक तूinnakaكَادِحٌमेहनत करने वाला हैkādiḥunإِلَىٰtoilāرَبِّكَतरफ़ अपने रब केrabbikaكَدْحًۭاसख़्त मेहनतkadḥanفَمُلَـٰقِيهِफिर मिलने वाला है उससेfamulāqīhi٦
ऐ इनसान! निःसंदेह तू कठिन परिश्रम करते-करते अपने पालनहार की ओर जाने वाला है, फिर तू उससे मिलने वाला है।
८४:७
فَأَمَّاतो रहाfa-ammāمَنْवो जोmanأُوتِىَदिया गयाūtiyaكِتَـٰبَهُۥकिताब अपनीkitābahuبِيَمِينِهِۦअपने दाऐं हाथ मेंbiyamīnihi٧
फिर जिस व्यक्ति को उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया।
८४:८
فَسَوْفَतो अनक़रीबfasawfaيُحَاسَبُवो हिसाब लिया जाएगyuḥāsabuحِسَابًۭاहिसाबḥisābanيَسِيرًۭاनिहायत आसानyasīran٨
तो उसका आसान हिसाब लिया जाएगा।
८४:९
وَيَنقَلِبُऔर वो लौटेगाwayanqalibuإِلَىٰٓtoilāأَهْلِهِۦतरफ़ अपने घर वालों केahlihiمَسْرُورًۭاमसरूर/ ख़ुशmasrūran٩
तथा वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश लौटेगा।
८४:१०
وَأَمَّاऔर रहाwa-ammāمَنْवो जोmanأُوتِىَदिया गयाūtiyaكِتَـٰبَهُۥकिताब अपनीkitābahuوَرَآءَपीछे सेwarāaظَهْرِهِۦअपनी पुश्त केẓahrihi١٠
और लेकिन जिसे उसका कर्मपत्र उसकी पीठ के पीछे दिया गया।
८४:११
فَسَوْفَतो अनक़रीबfasawfaيَدْعُوا۟वो पुकारेगाyadʿūثُبُورًۭاहलाकत कोthubūran١١
तो वह विनाश को पुकारेगा।
८४:१२
وَيَصْلَىٰऔर वो जलेगाwayaṣlāسَعِيرًاभड़कती आग मेंsaʿīran١٢
तथा जहन्नम में प्रवेश करेगा।
८४:१३
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuكَانَथा वोkānaفِىٓamongfīأَهْلِهِۦअपने घर वालों मेंahlihiمَسْرُورًاमसरूर /ख़ुशmasrūran١٣
निःसंदेह वह अपने घर वालों में बड़ा प्रसन्न था।
८४:१४
إِنَّهُۥबेशक वोinnahuظَنَّवो समझता थाẓannaأَنकिanلَّنहरगिज़ नहींlanيَحُورَवो लौटेगाyaḥūra١٤
निश्चय उसने समझा था कि वह कभी (अल्लाह की ओर) वापस नहीं लौटेगा।
८४:१५
بَلَىٰٓक्यों नहींbalāإِنَّबेशकinnaرَبَّهُۥरब उसकाrabbahuكَانَथाkānaبِهِۦउसेbihiبَصِيرًۭاख़ूब देखने वालाbaṣīran١٥
क्यों नहीं, निश्चय उसका पालनहार उसे देख रहा था।1
८४:१६
فَلَآपस नहींfalāأُقْسِمُमैं क़सम खाता हूँuq'simuبِٱلشَّفَقِशफ़क़ कीbil-shafaqi١٦
मैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।
८४:१७
وَٱلَّيْلِऔर रात कीwa-al-layliوَمَاऔर उसकी जिसेwamāوَسَقَवो समेट लेwasaqa١٧
तथा रात की और उसकी जो कुछ वह एकत्रित करती है!
८४:१८
وَٱلْقَمَرِऔर चाँद कीwal-qamariإِذَاजबidhāٱتَّسَقَवो पूरा हो जाएittasaqa١٨
तथा चाँद की, जब वह पूरा हो जाता है।
८४:१९
لَتَرْكَبُنَّअलबत्ता तुम ज़रूर चढ़ते जाओगेlatarkabunnaطَبَقًاएक दर्जे कोṭabaqanعَنfromʿanطَبَقٍۢदूसरे दर्जे सेṭabaqin١٩
तुम अवश्य एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे।
८४:२०
فَمَاपस क्या हैfamāلَهُمْउन्हेंlahumلَاnotlāيُؤْمِنُونَनहीं वो ईमान लातेyu'minūna٢٠
फिर उन्हें क्या हो गया है कि वे ईमान नहीं लाते?
८४:२१
وَإِذَاऔर जबwa-idhāقُرِئَपढ़ा जाता हैquri-aعَلَيْهِمُउन परʿalayhimuٱلْقُرْءَانُक़ुरआनl-qur'ānuلَاnotlāيَسْجُدُونَ ۩नहीं वो सजदा करतेyasjudūna٢١
और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो सजदा नहीं करते।1
८४:२२
بَلِबल्किbaliٱلَّذِينَवो लोग जिन्होंनेalladhīnaكَفَرُوا۟कुफ़्र कियाkafarūيُكَذِّبُونَवो झुठलाते हैंyukadhibūna٢٢
बल्कि जिन्होंने कुफ़्र किया, वे (उसे) झुठलाते हैं।
८४:२३
وَٱللَّهُऔर अल्लाहwal-lahuأَعْلَمُख़ूब जानता हैaʿlamuبِمَاउसे जोbimāيُوعُونَवो समेट रहे हैंyūʿūna٢٣
और अल्लाह सबसे अधिक जानने वाला है जो कुछ वे अपने भीतर रखते हैं।
८४:२४
فَبَشِّرْهُمपस ख़ुशख़बरी दे दीजिए उन्हेंfabashir'humبِعَذَابٍअज़ाब कीbiʿadhābinأَلِيمٍदर्दनाकalīmin٢٤
अतः उन्हें एक दर्दनाक यातना की शुभ सूचना दे दो।
८४:२५
إِلَّاसिवाएillāٱلَّذِينَउन लोगों के जोalladhīnaءَامَنُوا۟ईमान लाएāmanūوَعَمِلُوا۟और उन्होंने अमल किएwaʿamilūٱلصَّـٰلِحَـٰتِनेकl-ṣāliḥātiلَهُمْउनके लिएlahumأَجْرٌअजर हैajrunغَيْرُनाghayruمَمْنُونٍۭख़त्म होने वालाmamnūnin٢٥
परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है।1
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