६३

अल-मुनाफ़िक़ून

मदनी ११ आयतें पारा २८
المنافقون
बिस्मिल्लाह
بِسْمِ साथ नाम bis'mi
साथ नाम
ٱللَّهِ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
ٱلرَّحْمَـٰنِ जो बहुत मेहरबान l-raḥmāni
जो बहुत मेहरबान
ٱلرَّحِيمِ निहायत रहम करने वाला है l-raḥīmi
निहायत रहम करने वाला है
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
६३:१
إِذَا जब idhā
जब
جَآءَكَ आते हैं आपके पास jāaka
आते हैं आपके पास
ٱلْمُنَـٰفِقُونَ मुनाफ़िक़ l-munāfiqūna
मुनाफ़िक़
قَالُوا۟ वो कहते हैं qālū
वो कहते हैं
نَشْهَدُ हम गवाही देते हैं nashhadu
हम गवाही देते हैं
إِنَّكَ कि बेशक आप innaka
कि बेशक आप
لَرَسُولُ यक़ीनन रसूल हैं larasūlu
यक़ीनन रसूल हैं
ٱللَّهِ ۗ अल्लाह के l-lahi
अल्लाह के
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
يَعْلَمُ वो जानता है yaʿlamu
वो जानता है
إِنَّكَ बेशक आप innaka
बेशक आप
لَرَسُولُهُۥ यक़ीनन रसूल हैं उसके larasūluhu
यक़ीनन रसूल हैं उसके
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
يَشْهَدُ गवाही देता है yashhadu
गवाही देता है
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ मुनाफ़िक़ l-munāfiqīna
मुनाफ़िक़
لَكَـٰذِبُونَ अलबत्ता झूठे हैं lakādhibūna
अलबत्ता झूठे हैं
١ (1)
(1)
जब आपके पास मुनाफ़िक़ आते हैं, तो कहते हैं : हम गवाही देते हैं कि निःसंदेह आप निश्चय अल्लाह के रसूल हैं। तथा अल्लाह जानता है कि निःसंदेह आप निश्चय अल्लाह के रसूल हैं और अल्लाह गवाही देता है कि मुनाफ़िक़ निश्चित रूप से झूठे1 हैं।
६३:२
ٱتَّخَذُوٓا۟ उन्होंने बना लिया ittakhadhū
उन्होंने बना लिया
أَيْمَـٰنَهُمْ अपनी क़समों क aymānahum
अपनी क़समों क
جُنَّةًۭ ढाल junnatan
ढाल
فَصَدُّوا۟ तो उन्होंने रोका faṣaddū
तो उन्होंने रोका
عَن from ʿan
from
سَبِيلِ (the) Way sabīli
(the) Way
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह के रास्ते से l-lahi
अल्लाह के रास्ते से
إِنَّهُمْ बेशक वो innahum
बेशक वो
سَآءَ कितना बुरा है sāa
कितना बुरा है
مَا जो
जो
كَانُوا۟ हैं वो kānū
हैं वो
يَعْمَلُونَ वो अमल करते yaʿmalūna
वो अमल करते
٢ (2)
(2)
उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना लिया है, फिर उन्होंने (लोगों को) अल्लाह की राह से रोका है। निःसंदेह बहुत बुरा है, जो कुछ वे करते रहे हैं।
६३:३
ذَٰلِكَ ये dhālika
ये
بِأَنَّهُمْ बवजह उसके कि वो bi-annahum
बवजह उसके कि वो
ءَامَنُوا۟ वो ईमान लाए āmanū
वो ईमान लाए
ثُمَّ फिर thumma
फिर
كَفَرُوا۟ उन्होंने कुफ़्र किया kafarū
उन्होंने कुफ़्र किया
فَطُبِعَ तो मोहर लगा दी गई faṭubiʿa
तो मोहर लगा दी गई
عَلَىٰ [upon] ʿalā
[upon]
قُلُوبِهِمْ ऊपर उनके दिलों के qulūbihim
ऊपर उनके दिलों के
فَهُمْ पस वो fahum
पस वो
لَا (do) not
(do) not
يَفْقَهُونَ नहीं वो समझते yafqahūna
नहीं वो समझते
٣ (3)
(3)
यह इस कारण कि वे ईमान लाए, फिर उन्होंने कुफ़्र किया। तो अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः वे नहीं समझते।
६३:४
۞ وَإِذَا और जब wa-idhā
और जब
رَأَيْتَهُمْ देखें आप उन्हें ra-aytahum
देखें आप उन्हें
تُعْجِبُكَ अच्छे लगें आपको tuʿ'jibuka
अच्छे लगें आपको
أَجْسَامُهُمْ ۖ जिस्म उनके ajsāmuhum
जिस्म उनके
وَإِن और अगर wa-in
और अगर
يَقُولُوا۟ वो बात करें yaqūlū
वो बात करें
تَسْمَعْ आप सुनते रह जाऐं tasmaʿ
आप सुनते रह जाऐं
لِقَوْلِهِمْ ۖ उनकी बात को liqawlihim
उनकी बात को
كَأَنَّهُمْ गोया कि वो ka-annahum
गोया कि वो
خُشُبٌۭ लकड़ियाँ हैं khushubun
लकड़ियाँ हैं
مُّسَنَّدَةٌۭ ۖ टेक लगाई हुईं musannadatun
टेक लगाई हुईं
يَحْسَبُونَ वो गुमान करते हैं yaḥsabūna
वो गुमान करते हैं
كُلَّ हर kulla
हर
صَيْحَةٍ बुलन्द आवाज़ को ṣayḥatin
बुलन्द आवाज़ को
عَلَيْهِمْ ۚ अपने ऊपर ʿalayhim
अपने ऊपर
هُمُ वो ही humu
वो ही
ٱلْعَدُوُّ दुश्मन हैं l-ʿaduwu
दुश्मन हैं
فَٱحْذَرْهُمْ ۚ पस आप मोहतात रहिए उनसे fa-iḥ'dharhum
पस आप मोहतात रहिए उनसे
قَـٰتَلَهُمُ ग़ारत करे उन्हें qātalahumu
ग़ारत करे उन्हें
ٱللَّهُ ۖ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
أَنَّىٰ कहाँ से annā
कहाँ से
يُؤْفَكُونَ वो फेरे जाते हैं yu'fakūna
वो फेरे जाते हैं
٤ (4)
(4)
और यदि तुम उन्हें देखो, तो तुम्हें उनके शरीर अच्छे लगेंगे और यदि वे बात करें, तो तुम उनकी बात पर कान लगाओगे। मानो कि वे टेक लगाई हुई लकड़ियाँ1 हैं। वे हर तेज़ आवाज़ को अपने ही विरुद्ध2 समझते हैं। वही वास्तविक शत्रु हैं। अतः आप उनसे सावधान रहें। अल्लाह उन्हें नाश करे! वे किधर फेरे जा रहे हैं!
६३:५
وَإِذَا और जब wa-idhā
और जब
قِيلَ कहा जाता है qīla
कहा जाता है
لَهُمْ उनसे lahum
उनसे
تَعَالَوْا۟ आओ taʿālaw
आओ
يَسْتَغْفِرْ बख़्शिश की दुआ करें yastaghfir
बख़्शिश की दुआ करें
لَكُمْ तुम्हारे लिए lakum
तुम्हारे लिए
رَسُولُ (the) Messenger rasūlu
(the) Messenger
ٱللَّهِ अल्लाह के रसूल l-lahi
अल्लाह के रसूल
لَوَّوْا۟ वो मोड़ते है lawwaw
वो मोड़ते है
رُءُوسَهُمْ अपने सरों को ruūsahum
अपने सरों को
وَرَأَيْتَهُمْ और देखते हैं आप उन्हें wara-aytahum
और देखते हैं आप उन्हें
يَصُدُّونَ वो रुकते हैं yaṣuddūna
वो रुकते हैं
وَهُم इस हाल में कि वो wahum
इस हाल में कि वो
مُّسْتَكْبِرُونَ तकब्बुर करने वाले हैं mus'takbirūna
तकब्बुर करने वाले हैं
٥ (5)
(5)
और जब उनसे कहा जाए : आओ, अल्लाह के रसूल तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करें, तो वे अपने सिर फेर लेते हैं। तथा आप उन्हें देखेंगे कि वे अभिमान करते हुए विमुख हो जाते हैं।
६३:६
سَوَآءٌ यक्साँ है sawāon
यक्साँ है
عَلَيْهِمْ उन पर ʿalayhim
उन पर
أَسْتَغْفَرْتَ ख़्वाह बख़्शिश माँगें आप astaghfarta
ख़्वाह बख़्शिश माँगें आप
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
أَمْ या am
या
لَمْ ना lam
ना
تَسْتَغْفِرْ आप बख़्शिश माँगें tastaghfir
आप बख़्शिश माँगें
لَهُمْ उनके लिए lahum
उनके लिए
لَن हरगिज़ नहीं lan
हरगिज़ नहीं
يَغْفِرَ बख़्शेगा yaghfira
बख़्शेगा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
لَهُمْ ۚ उन्हें lahum
उन्हें
إِنَّ बेशक inna
बेशक
ٱللَّهَ अल्लाह l-laha
अल्लाह
لَا (does) not
(does) not
يَهْدِى नहीं वो हिदायत देता yahdī
नहीं वो हिदायत देता
ٱلْقَوْمَ उन लोगों को l-qawma
उन लोगों को
ٱلْفَـٰسِقِينَ जो फ़ासिक़ हैं l-fāsiqīna
जो फ़ासिक़ हैं
٦ (6)
(6)
(ऐ नबी!) उनके लिए बराबर है, चाहे आप उनके लिए क्षमा की प्रार्थना करें या क्षमा की प्रार्थना न करें। अल्लाह उन्हें कदापि क्षमा नहीं करेगा। निःसंदेह अल्लाह अवज्ञाकारियों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।
६३:७
هُمُ वो ही हैं humu
वो ही हैं
ٱلَّذِينَ जो alladhīna
जो
يَقُولُونَ कहते हैं yaqūlūna
कहते हैं
لَا (Do) not
(Do) not
تُنفِقُوا۟ ना तुम ख़र्च करो tunfiqū
ना तुम ख़र्च करो
عَلَىٰ ऊपर ʿalā
ऊपर
مَنْ उनके जो man
उनके जो
عِندَ पास हैं ʿinda
पास हैं
رَسُولِ (the) Messenger rasūli
(the) Messenger
ٱللَّهِ रसूल अल्लाह के l-lahi
रसूल अल्लाह के
حَتَّىٰ यहाँ तक कि ḥattā
यहाँ तक कि
يَنفَضُّوا۟ ۗ वो मुन्तशिर हो जाऐं yanfaḍḍū
वो मुन्तशिर हो जाऐं
وَلِلَّهِ और अल्लाह ही के लिए हैं walillahi
और अल्लाह ही के लिए हैं
خَزَآئِنُ ख़ज़ाने khazāinu
ख़ज़ाने
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ आसमानों l-samāwāti
आसमानों
وَٱلْأَرْضِ और ज़मीन के wal-arḍi
और ज़मीन के
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ मुनाफ़िक़ l-munāfiqīna
मुनाफ़िक़
لَا (do) not
(do) not
يَفْقَهُونَ नहीं वो समझते yafqahūna
नहीं वो समझते
٧ (7)
(7)
ये वही लोग हैं, जो कहते हैं कि उन लोगों पर खर्च न करो, जो अल्लाह के रसूल के पास हैं, यहाँ तक कि वे तितर-बितर हो जाएँ। हालाँकि आकाशों और धरती के खज़ाने अल्लाह ही के हैं। परंतु मुनाफ़िक़ नहीं समझते।
६३:८
يَقُولُونَ वो कहते हैं yaqūlūna
वो कहते हैं
لَئِن अलबत्ता अगर la-in
अलबत्ता अगर
رَّجَعْنَآ वापस लौटे हम rajaʿnā
वापस लौटे हम
إِلَى to ilā
to
ٱلْمَدِينَةِ तरफ़ मदीने के l-madīnati
तरफ़ मदीने के
لَيُخْرِجَنَّ अलबत्ता ज़रूर निकाल देगा layukh'rijanna
अलबत्ता ज़रूर निकाल देगा
ٱلْأَعَزُّ ज़्यादा इज़्ज़त वाला l-aʿazu
ज़्यादा इज़्ज़त वाला
مِنْهَا उससे min'hā
उससे
ٱلْأَذَلَّ ۚ ज़्यादा ज़िल्लत वाले को l-adhala
ज़्यादा ज़िल्लत वाले को
وَلِلَّهِ और अल्लाह ही के लिए है walillahi
और अल्लाह ही के लिए है
ٱلْعِزَّةُ इज़्ज़त l-ʿizatu
इज़्ज़त
وَلِرَسُولِهِۦ और उसके रसूल के लिए walirasūlihi
और उसके रसूल के लिए
وَلِلْمُؤْمِنِينَ और मोमिनों के लिए walil'mu'minīna
और मोमिनों के लिए
وَلَـٰكِنَّ और लेकिन walākinna
और लेकिन
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ मुनाफ़िक़ l-munāfiqīna
मुनाफ़िक़
لَا (do) not
(do) not
يَعْلَمُونَ नहीं वो जानते yaʿlamūna
नहीं वो जानते
٨ (8)
(8)
वे कहते हैं : यदि हम मदीना वापस गए, तो जो सबसे अधिक सम्मान वाला है, वह वहाँ से तुच्छतर को निकाल1 बाहर करेगा। हालाँकि सम्मान तो केवल अल्लाह के लिए और उसके रसूल के लिए और ईमान वालों के लिए है। परंतु मुनाफ़िक़ नहीं जानते।
६३:९
يَـٰٓأَيُّهَا O yāayyuhā
O
ٱلَّذِينَ ऐ लोगो जो alladhīna
ऐ लोगो जो
ءَامَنُوا۟ ईमान लाए हो āmanū
ईमान लाए हो
لَا (Let) not
(Let) not
تُلْهِكُمْ ना ग़ाफ़िल करे तुम्हें tul'hikum
ना ग़ाफ़िल करे तुम्हें
أَمْوَٰلُكُمْ माल तुम्हारे amwālukum
माल तुम्हारे
وَلَآ और ना walā
और ना
أَوْلَـٰدُكُمْ औलाद तुम्हारी awlādukum
औलाद तुम्हारी
عَن from ʿan
from
ذِكْرِ (the) remembrance dhik'ri
(the) remembrance
ٱللَّهِ ۚ अल्लाह के ज़िक्र से l-lahi
अल्लाह के ज़िक्र से
وَمَن और जो कोई waman
और जो कोई
يَفْعَلْ करेगा yafʿal
करेगा
ذَٰلِكَ ऐसा dhālika
ऐसा
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ तो यही लोग हैं fa-ulāika
तो यही लोग हैं
هُمُ वो humu
वो
ٱلْخَـٰسِرُونَ जो ख़सारा पाने वाले हैं l-khāsirūna
जो ख़सारा पाने वाले हैं
٩ (9)
(9)
ऐ ईमान वालो! तुम्हारे धन तथा तुम्हारी संतानें तुम्हें अल्लाह की याद से गाफ़िल न कर दें। और जो ऐसा करे, तो वही लोग घाटा उठाने वाले हैं।
६३:१०
وَأَنفِقُوا۟ और ख़र्च करो wa-anfiqū
और ख़र्च करो
مِن from min
from
مَّا उसमें से जो
उसमें से जो
رَزَقْنَـٰكُم रिज़्क़ दिया हमन तुम्हें razaqnākum
रिज़्क़ दिया हमन तुम्हें
مِّن from min
from
قَبْلِ उससे पहले qabli
उससे पहले
أَن कि an
कि
يَأْتِىَ आ जाए yatiya
आ जाए
أَحَدَكُمُ तुम में से किसी एक को aḥadakumu
तुम में से किसी एक को
ٱلْمَوْتُ मौत l-mawtu
मौत
فَيَقُولَ तो वो कहे fayaqūla
तो वो कहे
رَبِّ ऐ मेरे रब rabbi
ऐ मेरे रब
لَوْلَآ क्यों ना lawlā
क्यों ना
أَخَّرْتَنِىٓ मोहलत दी तू ने मुझे akhartanī
मोहलत दी तू ने मुझे
إِلَىٰٓ for ilā
for
أَجَلٍۢ एक वक़्त तक ajalin
एक वक़्त तक
قَرِيبٍۢ क़रीब के qarībin
क़रीब के
فَأَصَّدَّقَ तो मैं सदक़ा करता fa-aṣṣaddaqa
तो मैं सदक़ा करता
وَأَكُن और मैं हो जाता wa-akun
और मैं हो जाता
مِّنَ among mina
among
ٱلصَّـٰلِحِينَ नेक लोगों में से l-ṣāliḥīna
नेक लोगों में से
١٠ (10)
(10)
तथा हमने तुम्हें जो कुछ दिया है, उसमें से खर्च करो, इससे पहले कि तुममें से किसी की मृत्यु1 आ जाए, फिर वह कहे : ऐ मेरे पालनहार! मुझे थोड़ी-सी मोहलत क्यों न दी कि मैं दान करता तथा सदाचारियों में से हो जाता।
६३:११
وَلَن और हरगिज़ ना walan
और हरगिज़ ना
يُؤَخِّرَ मोहलत देगा yu-akhira
मोहलत देगा
ٱللَّهُ अल्लाह l-lahu
अल्लाह
نَفْسًا किसी नफ़्स को nafsan
किसी नफ़्स को
إِذَا जब idhā
जब
جَآءَ आ जाऐगी jāa
आ जाऐगी
أَجَلُهَا ۚ मौत उसकी ajaluhā
मौत उसकी
وَٱللَّهُ और अल्लाह wal-lahu
और अल्लाह
خَبِيرٌۢ ख़ूब ख़बर रखने वाला है khabīrun
ख़ूब ख़बर रखने वाला है
بِمَا उसकी जो bimā
उसकी जो
تَعْمَلُونَ तुम अमल करते हो taʿmalūna
तुम अमल करते हो
١١ (11)
(11)
और अल्लाह किसी प्राणी को कदापि अवसर नहीं देगा, जब उसका निर्धारित समय आ गया। और अल्लाह उससे भली-भाँति अवगत है, जो कुछ तुम करते हो।