७५

अल-क़ियामा

मक्की ४० आयतें पारा १
القيامة

सूरह अल-क़ियामा (القيامة) पवित्र क़ुरआन का ७५ वाँ अध्याय है — यह एक मक्की सूरह है जिसमें ४० आयतें हैं। मक्की सूरहें पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के मदीना प्रवास से पहले उतरीं और प्रायः ईमान, अल्लाह की एकता और आख़िरत पर बल देती हैं।

बिस्मिल्लाह
بِسْمِसाथ नामbis'miٱللَّهِअल्लाह केl-lahiٱلرَّحْمَـٰنِजो बहुत मेहरबानl-raḥmāniٱلرَّحِيمِनिहायत रहम करने वाला हैl-raḥīmi
परम कृपालु, अत्यंत दयावान अल्लाह के नाम से
७५:१
لَآNayأُقْسِمُनहीं मैं क़सम खाता हूँuq'simuبِيَوْمِदिन कीbiyawmiٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत केl-qiyāmati١
मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन1 की।
७५:२
وَلَآऔर नहींwalāأُقْسِمُमैं क़सम खाता हूँuq'simuبِٱلنَّفْسِनफ़्स कीbil-nafsiٱللَّوَّامَةِमलामत करने वालेl-lawāmati٢
तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा1 करने वाली अंतरात्मा की।
७५:३
أَيَحْسَبُक्या समझता हैayaḥsabuٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuأَلَّنकि हरगिज़ नहींallanنَّجْمَعَहम जमा करेंगेnajmaʿaعِظَامَهُۥउसकी हड्डियाँʿiẓāmahu٣
क्या इनसान समझता है कि हम कभी उसकी हड्डियों को एकत्र नहीं करेंगे?
७५:४
بَلَىٰक्यों नहींbalāقَـٰدِرِينَक़ादिर हैंqādirīnaعَلَىٰٓउस परʿalāأَنकिanنُّسَوِّىَहम दुरुस्त कर देंnusawwiyaبَنَانَهُۥउसके पोर-पोर कोbanānahu٤
क्यों नहीं? हम इस बता का भी सामर्थ्य रखते हैं कि उसकी उंगलियों की पोर-पोर सीधी कर दें।
७५:५
بَلْबल्किbalيُرِيدُचाहता हैyurīduٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuلِيَفْجُرَकि वो गुनाह करता रहेliyafjuraأَمَامَهُۥअपने आगे भीamāmahu٥
बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे भी1 गुनाह करता रहे।
७५:६
يَسْـَٔلُवो पूछता हैyasaluأَيَّانَकब हैayyānaيَوْمُदिनyawmuٱلْقِيَـٰمَةِक़यामत काl-qiyāmati٦
वह पूछता है कि क़ियामत का दिन कब होगा?
७५:७
فَإِذَاफिर जबfa-idhāبَرِقَचौंधिया जाऐंगीbariqaٱلْبَصَرُआँखेंl-baṣaru٧
तो जब आँख चौंधिया जाएगी।
७५:८
وَخَسَفَऔर बेनूर हो जाएगाwakhasafaٱلْقَمَرُचाँदl-qamaru٨
और चाँद को ग्रहण लग जाएगा।
७५:९
وَجُمِعَऔर जमा कर दिए जाऐंगेwajumiʿaٱلشَّمْسُसूरजl-shamsuوَٱلْقَمَرُऔर चाँदwal-qamaru٩
और सूर्य और चाँद एकत्र1 कर दिए जाएँगे।
७५:१०
يَقُولُकहेगाyaqūluٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuيَوْمَئِذٍउस दिनyawma-idhinأَيْنَकहाँ हैaynaٱلْمَفَرُّफ़रार की जगहl-mafaru١٠
उस दिन मनुष्य कहेगा कि भागने का स्थान कहाँ है?
७५:११
كَلَّاहरगिज़ नहींkallāلَا(There is) noوَزَرَनहीं कोई जाएपनाहwazara١١
कदापि नहीं, शरण लेने का स्थान कोई नहीं।
७५:१२
إِلَىٰToilāرَبِّكَतरफ़ आपके रब केrabbikaيَوْمَئِذٍउस दिनyawma-idhinٱلْمُسْتَقَرُّठिकाना हैl-mus'taqaru١٢
उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर लौटकर जाना है।
७५:१३
يُنَبَّؤُا۟ख़बर दिया जाएगाyunabba-uٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuيَوْمَئِذٍۭउस दिनyawma-idhinبِمَاउसकी जोbimāقَدَّمَउसने आगे भेजाqaddamaوَأَخَّرَऔर उसने पीछे छोड़ाwa-akhara١٣
उस दिन इनसान को बताया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।1
७५:१४
بَلِबल्किbaliٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuعَلَىٰagainstʿalāنَفْسِهِۦअपने नफ़्स परnafsihiبَصِيرَةٌۭख़ूब नज़र रखने वाला हैbaṣīratun١٤
बल्कि इनसान स्वयं अपने विरुद्ध गवाह1 है।
७५:१५
وَلَوْऔर अगरचेwalawأَلْقَىٰवो डालेalqāمَعَاذِيرَهُۥमआज़रतें अपनीmaʿādhīrahu١٥
अगरचे वह अपने बहाने पेश करे।
७५:१६
لَاNotتُحَرِّكْना आप हरकत दीजिएtuḥarrikبِهِۦसाथ उसकेbihiلِسَانَكَअपनी ज़बान कोlisānakaلِتَعْجَلَताकि आप जल्दी (याद) करेंlitaʿjalaبِهِۦٓउसकोbihi١٦
(ऐ नबी!) आप इसके साथ अपनी ज़ुबान न हिलाएँ1, ताकि इसे शीघ्र याद कर लें।
७५:१७
إِنَّबेशकinnaعَلَيْنَاहम पर ही हैʿalaynāجَمْعَهُۥजमा करना उसकाjamʿahuوَقُرْءَانَهُۥऔर पढ़ना उसकाwaqur'ānahu١٧
निःसंदेह उसको एकत्र करना और (आपका) उसे पढ़ना हमारे ज़िम्मे है।
७५:१८
فَإِذَاफिर जबfa-idhāقَرَأْنَـٰهُपढ़ें हम उसेqaranāhuفَٱتَّبِعْतो पैरवी कीजिए आपfa-ittabiʿقُرْءَانَهُۥउसके पढ़ने कीqur'ānahu١٨
अतः जब हम उसे पढ़ लें, तो आप उसके पठन का अनुसरण करें।
७५:१९
ثُمَّफिरthummaإِنَّबेशकinnaعَلَيْنَاहमारे ही ज़िम्मे हैʿalaynāبَيَانَهُۥउसे बयान करनाbayānahu١٩
फिर निःसंदेह उसे स्पषट करना हमारे ही ज़िम्मे है।
७५:२०
كَلَّاहरगिज़ नहींkallāبَلْबल्किbalتُحِبُّونَतुम पसंद करते होtuḥibbūnaٱلْعَاجِلَةَजल्द मिलने वाली (दुनिया) कोl-ʿājilata٢٠
कदापि नहीं1, बल्कि तुम शीघ्र प्राप्त होने वाली चीज़ (संसार) से प्रेम करते हो।
७५:२१
وَتَذَرُونَऔर तुम छोड़ देते होwatadharūnaٱلْـَٔاخِرَةَआख़िरत कोl-ākhirata٢١
और बाद में आने वाली (आख़िरत) को छोड़ देते हो।
७५:२२
وُجُوهٌۭकुछ चेहरेwujūhunيَوْمَئِذٍۢउस रोज़yawma-idhinنَّاضِرَةٌतरो ताज़ा होंगेnāḍiratun٢٢
उस दिन कई चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।
७५:२३
إِلَىٰTowardsilāرَبِّهَاअपने रब की तरफ़rabbihāنَاظِرَةٌۭदेखने वालेnāẓiratun٢٣
अपने पालनहार की ओर देख रहे होंगे।
७५:२४
وَوُجُوهٌۭऔर कुछ चेहरेwawujūhunيَوْمَئِذٍۭउस रोज़yawma-idhinبَاسِرَةٌۭबेरौनक़ होंगेbāsiratun٢٤
और कई चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।
७५:२५
تَظُنُّवो समझ रहे होंगेtaẓunnuأَنकिanيُفْعَلَकिया जाएगाyuf'ʿalaبِهَاसाथ उनकेbihāفَاقِرَةٌۭकमर तोड़ देने वालाfāqiratun٢٥
उन्हें विश्वास होगा कि उनके साथ कमड़ तोड़ देने वाली सख्ती की जाएगी।
७५:२६
كَلَّآहरगिज़ नहींkallāإِذَاजबidhāبَلَغَتِपहुँच जाएगीbalaghatiٱلتَّرَاقِىَ(जान) हलक़ कोl-tarāqiya٢٦
कदापि नहीं1, जब प्राण हँसलियों तक पहुँच जाएगा।
७५:२७
وَقِيلَऔर कह दिया जाएगाwaqīlaمَنْ ۜकौन हैmanرَاقٍۢझाड़ फ़ूँक करने वालाrāqin٢٧
और कहा जाएगा : कौन है झाड़-फूँक करने वाला?
७५:२८
وَظَنَّऔर वो समझ लेगाwaẓannaأَنَّهُकि बेशक वोannahuٱلْفِرَاقُजुदाई का वक़्त हैl-firāqu٢٨
और उसे विश्वास हो जाएगा कि यह (संसार से) जुदाई का समय है।
७५:२९
وَٱلْتَفَّتِऔर लिपट जाएगीwal-tafatiٱلسَّاقُपिंडलीl-sāquبِٱلسَّاقِसाथ पिंडली केbil-sāqi٢٩
और पिंडली, पिंडली1 के साथ लिपट जाएगी।
७५:३०
إِلَىٰToilāرَبِّكَआपके रब ही की तरफ़rabbikaيَوْمَئِذٍउस रोज़yawma-idhinٱلْمَسَاقُरवानगी हैl-masāqu٣٠
उस दिन तेरे पालनहार ही की ओर जाना है।
७५:३१
فَلَاपस नाfalāصَدَّقَउसने तस्दीक़ कीṣaddaqaوَلَاऔर नाwalāصَلَّىٰउसने नमाज़ पढ़ीṣallā٣١
तो न उसने (सत्य को) माना और न नमाज़ पढ़ी।
७५:३२
وَلَـٰكِنऔर लेकिनwalākinكَذَّبَउसने झुठलायाkadhabaوَتَوَلَّىٰऔर उसने मुँह मोड़ लियाwatawallā٣٢
लेकिन उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।
७५:३३
ثُمَّफिरthummaذَهَبَवो चला गयाdhahabaإِلَىٰٓtoilāأَهْلِهِۦतरफ़ अपने घर वालों केahlihiيَتَمَطَّىٰٓअकड़ता हुआyatamaṭṭā٣٣
फिर अकड़ता हुआ अपने परिजनों की ओर गया।
७५:३४
أَوْلَىٰअफ़सोसawlāلَكَतुझ परlakaفَأَوْلَىٰफिर अफ़सोसfa-awlā٣٤
तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
७५:३५
ثُمَّफिरthummaأَوْلَىٰअफ़सोसawlāلَكَतुझ परlakaفَأَوْلَىٰٓफिर अफ़सोसfa-awlā٣٥
फिर तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।
७५:३६
أَيَحْسَبُक्या समझता हैayaḥsabuٱلْإِنسَـٰنُइन्सानl-insānuأَنकिanيُتْرَكَवो छोड़ दिया जाएगाyut'rakaسُدًىबेकारsudan٣٦
क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?
७५:३७
أَلَمْक्या नहींalamيَكُथा वोyakuنُطْفَةًۭएक नुत्फ़ाnuṭ'fatanمِّنofminمَّنِىٍّۢमनी काmaniyyinيُمْنَىٰजो टपकाया जाता हैyum'nā٣٧
क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?
७५:३८
ثُمَّफिरthummaكَانَहो गया वोkānaعَلَقَةًۭजमा हुआ ख़ूनʿalaqatanفَخَلَقَफिर उसने पैदा कियाfakhalaqaفَسَوَّىٰफिर उसने दुरुस्त कर दियाfasawwā٣٨
फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।
७५:३९
فَجَعَلَफिर उसने बनायाfajaʿalaمِنْهُउससेmin'huٱلزَّوْجَيْنِजोड़ाl-zawjayniٱلذَّكَرَमर्दl-dhakaraوَٱلْأُنثَىٰٓऔर औरतwal-unthā٣٩
फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।
७५:४०
أَلَيْسَक्या नहीं हैalaysaذَٰلِكَवोdhālikaبِقَـٰدِرٍक़ादिरbiqādirinعَلَىٰٓउस परʿalāأَنकिanيُحْـِۧىَवो ज़िन्दा कर देyuḥ'yiyaٱلْمَوْتَىٰमुर्दों कोl-mawtā٤٠
क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?